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UP Cabinet: बकाया टैक्स पर 35 प्रतिशत छूट, सरकारी वकीलों के मानदेय-बहस फीस में बड़ी वृद्धि; पढ़ें 24 बड़े फैसले

Wed, 03 Jun 2026 10:49 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 03 Jun 2026 10:49 PM IST
सार

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रदेश के 17 नगर निगमों और नोएडा में 1725 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी, जिससे परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही राज्य के विधि अधिकारियों के मानदेय और प्रति सुनवाई फीस में भी उल्लेखनीय वृद्धि को स्वीकृति मिली।

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UP Cabinet: 1,725 New E-Buses Approved; Fees for State Law Officers Also Increased — Read the Key Decisions
योगी कैबिनेट के फैसले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 25 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 24 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। केवल परिवहन विभाग से जुड़ा एक प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। बैठक में शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने और विधि अधिकारियों के मानदेय में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में किसानों, परिवहन व्यवस्था, न्यायिक क्षेत्र और जेल प्रशासन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। पढ़ें 24 बड़े फैसले...

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1725 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी

प्रदेश के 17 नगर निगमों तथा नोएडा क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए 1725 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी है। इनमें 9 मीटर लंबाई की 725 और 12 मीटर लंबाई की 1000 बसें शामिल होंगी। वर्तमान में 733 ई-बसें संचालित हैं। नई बसों के संचालन से शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ नगरों की परिधि में आने वाले क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। इस योजना के तहत जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को भी सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

परियोजना के संचालन के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) और कंपनियों का गठन किया गया है। योजना पर कुल 1852 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें सरकार पर 653 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, जबकि शेष निवेश ऑपरेटर द्वारा किया जाएगा। बस संचालन में किराए और बोली राशि के बीच के अंतर की भरपाई सरकार करेगी। साथ ही बसों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा भी सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।

 

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UP Cabinet: 1,725 New E-Buses Approved; Fees for State Law Officers Also Increased — Read the Key Decisions
यूपी कैबिनेट की बैठक में फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी

इसके अलावा राज्य के विधि अधिकारियों की फीस और मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। जिला शासकीय अधिवक्ताओं का मासिक मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि प्रति सुनवाई फीस 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं का मानदेय भी 7900 रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के विधि अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

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किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलेगा 

मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि राज्य के करीब 17 करोड़ किसानों के हित में मक्का खरीद को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है। मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 175 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करते हुए इसे 2225 रुपये से बढ़ाकर 2400 रुपये कर दिया गया है।

मक्का की खरीद वर्ष में दो बार की जाएगी और 25 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर किया जाएगा। इस निर्णय से फिरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस, एटा, शाहजहांपुर, कानपुर नगर और कानपुर देहात समेत कई जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा।

नई जेलें और बंदियों के लिए नई नीति

कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए पांच नए कारागारों को मंजूरी दी गई है। ये जेल मुरादाबाद, ललितपुर, औरैया, कानपुर नगर और भदोही में बनाए जाएंगे। इस परियोजना पर 1400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होगा।

वर्तमान में प्रदेश की 37 जेलों में क्षमता से अधिक बंदी हैं और कुल 86,762 कैदी निरुद्ध हैं। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निर्देशों के क्रम में जेल में आपसी झगड़े या इलाज में लापरवाही से बंदी की मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये तथा आत्महत्या की स्थिति में तीन लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

पांच एकड़ जमीन पर बनेगा पशु अस्पताल और गो आश्रय स्थल

झांसी में पशुपालन विभाग की पांच एकड़ भूमि पर गो आश्रय स्थल की स्थापना की जाएगी। यहां पशुचिकित्सा व अन्य सम्बन्धित गतिविधियों के संचालन के लिए दया भावना फाउंडेशन से एमओयू किया जाएगा। इस आशय के प्रस्ताव को बुधवार को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई।

बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों झंसी, ललितपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व जालौन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर निराश्रित गोवंशों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने की योजना बनाई गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर विचरण कर रहे निराश्रित गोवंशों को संरक्षित किए जाने व घायल पशुओं के आकस्मिक उपचार की सुविधा देने की भी तैयारी है। इसके लिए झांसी के मोंठ के बम्हरौली में 9.777 हेक्टेयर भूमि में से पशुपालन विभाग की 05 एकड़ भूमि पर दया भावना फाउंडेशन सोनागिरी को दी जाएगी।

संस्था द्वारा इस जमीन पर गो आश्रय स्थल की स्थापना, पशुचिकित्सा एवं अन्य सम्बन्धित गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसके लिए पशुपालन विभाग और संस्था के बीच द्विपक्षीय एमओयू किया जाएगा। संस्था द्वारा गो आश्रय स्थलों की स्थापना, पशुचिकित्सा के लिए पशुचिकित्सालय का निर्माण व अन्य संबंधित गतिविधियां की जाएगी।

संस्था द्वारा पशु चिकित्सालय के निर्माण के बाद शेष भूमि पर निराश्रित गोवंश के लिए गोशाला निर्माण व गोवंशों के भरण-पोषण के लिए हरा चारा आदि पैदा किया जाएगा। इस भूमि पर पशुपालन विभाग का स्वामित्त्व बना रहेगा।

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना - फोटो : संवाद

अब 12 साल की सेवा के बाद आबकारी निरीक्षक बन सकेंगे जिला आबकारी अधिकारी

प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग के निरीक्षकों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने उप्र सहायक आबकारी आयुक्त सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली लागू करने की मंजूरी प्रदान कर दी। अब आबकारी निरीक्षक 15 वर्ष की बजाय 12 वर्ष की सेवा के बाद जिला आबकारी अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए अर्ह माने जाएंगे। 

कैबिनेट में दी गई जानकारी के मुताबिक आबकारी निरीक्षकों को 15 वर्ष में पदोन्नत करने के नियम की वजह से तमाम कर्मी जिला आबकारी अधिकारी बने बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे थे। इससे पूरे संवर्ग में पदोन्नति की रफ्तार भी धीमी होने से कर्मियों में असंतोष था। कैबिनेट ने इसके लिए नियमावली में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी है।

बकाया टैक्स पर 35 प्रतिशत छूट, जुर्माना पूरी तरह माफ

उत्तर प्रदेश सरकार ने लाखों व्यवसायिक वाहन स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए बकाया कर और जुर्माने के निस्तारण के लिए नई एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। योजना के तहत बकाया मूल कर पर 35 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी, जबकि जुर्माने की पूरी राशि माफ कर दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से लंबे समय से कर न जमा कर पाने वाले वाहन मालिकों को राहत मिलेगी और परिवहन विभाग को भी फंसा हुआ राजस्व प्राप्त हो सकेगा। योजना अधिसूचना जारी होने की तिथि से दो माह तक प्रभावी रहेगी। 

परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 7.5 टन तक के हल्के व्यवसायिक वाहनों की संख्या 29.15 लाख है। इनमें से 8.48 लाख वाहनों पर कुल 1,852.96 करोड़ रुपये का कर बकाया है। इस बकाये में 1,073.47 करोड़ रुपये मूल कर और 779.50 करोड़ रुपये जुर्माना शामिल है। विभाग का मानना है कि बकाया राशि अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में वाहन स्वामी कर जमा नहीं कर पा रहे थे, जिससे राजस्व वसूली प्रभावित हो रही थी।

कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पुराने वाहनों पर देय एकबारीय कर की गणना करते समय वाहन स्वामी द्वारा पहले से जमा कर की राशि को समायोजित किया जाएगा। यानी वाहन मालिकों से केवल शेष बकाया राशि ही वसूली जाएगी। 

इससे उन्हें अतिरिक्त वित्तीय राहत मिलेगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इससे पहले वर्ष 2022-23 और 2024-25 में भी समाधान योजनाएं लागू की गई थीं, लेकिन उनमें केवल जुर्माने में छूट दी गई थी। इस बार मूल कर में भी राहत दिए जाने से योजना के अधिक सफल होने की उम्मीद है।इस प्रस्ताव की मंजूरी से वर्षों से लंबित करोड़ों रुपये के राजस्व की वसूली भी संभव हो सकेगी। परिवहन विभाग जल्द ही योजना की विस्तृत अधिसूचना जारी करेगा।

मोहनलाल गंज में बनेगा नया रजिस्ट्री कार्यालय

राजधानी लखनऊ के मोहनलाल गंज में नया रजिस्ट्री कार्यालय बनेगा। इस संबंध में 953 वर्गमीटर जमीन स्टांप एवं निबंधन विभाग के पक्ष में हस्तातंरित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। रजिस्ट्री विलेख, विवाह पंजीकरण, मुख्तारनामा आदि की बढ़ती संख्या देखते हुए विभाग ने परिसरों में सुविधाएं बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके तहत सब रजिस्ट्रार कक्ष के अलावा रजिस्ट्री कक्ष, अभिलेखागार, बरामदा, पेयजल और शौचालय आदि की व्यवस्था होगी। भीड़ का दबाव कम करने के लिए नए कार्यालय खोले जा रहे हैं।

3706 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव के बीच वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए होगा बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश का प्रमुख सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन की तैयारी की गई है। वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने और निवेश को गति देने के लिए नीति को और व्यावहारिक बनाया जाना जरूरी है। इस संबंध में पेश प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

भारत में अभी बड़े स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण नहीं हो रहा है, जिससे उद्योगों को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की कोशिश है कि विश्व की प्रतिष्ठित कंपनियों के सहयोग से प्रदेश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित हों। इसके लिए यूपी सेमी कंडक्टर में निवेशक अनुकूल नीतिगत सहयोग, अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से सामंजस्य के लिए संशोधन जरूरी है।

निवेशक को पूरी परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादशशुरु होने की तारीख से कम से कम 3 वर्ष तक उत्पादन बनाए रखना होगा। इस फैसले से प्रदेश में सेमीकंडक्टर इकाइयों की स्थापना में आसानी होगी। नीति के तहत अब तक दो निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जा चुके हैं, जबकि एक अन्य निवेश प्रस्ताव प्रक्रिया में है। 

इनमें एक कंपनी ने ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर, एटीएमपी और ओसैट इकाई स्थापित करने के लिए करीब 3706.12 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

UP Cabinet: 1,725 New E-Buses Approved; Fees for State Law Officers Also Increased — Read the Key Decisions
कैबिनेट बैठक - फोटो : amar ujala

लखनऊ, अयोध्या समेत 18 शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें

प्रदेश के 18 शहरी क्षेत्रों में रहने लोगों को सुगम यातायात की सुविधा देने के लिए सरकार ने एसी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का फैसला किया है। इससे संबंधित नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही शहरों में संचालित होने वाली कुल ई-बसों की संख्या 1725 हो जाएगी। 

इन बसों का संचालन भी प्राइवेट संचालकों द्वारा ग्रास कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर किया जाएगा। ई-बसों के संचालन से 45 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

बुधवार को हुई कैबिनेट की फैसले की जानकारी देते हुए नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रदेश आरामदायक और प्रदूषण-मुक्त सिटी बसों के नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। बता दें कि पहले से ही नगर परिवहन निदेशालय द्वारा 15 नगर निगम वाले शहरों में 743 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसमें से 700 बसों का संचालन भी जीसीसी मॉडल पर ही किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश में बढ़ते शहरीकरण, नागरिकों की परिवहन आवश्यकताओं तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों को चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा। 

इससे नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ, वातानुकूलित एवं पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही वायु एवं ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी तथा प्रदेश के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना से लगभग 10,500 प्रत्यक्ष एवं 35,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इन शहरों में चलेंगी ई-बसें

प्रथम चरण में लखनऊ, आगरा, अयोध्या, अलीगढ़, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी एवं नोएडा (जेवर सहित) में बसों का संचालन होगा। बता दें कि नगर विकास विभाग की ओर से कुल 1725 ई बसों का संचालन का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसमें जिसमें से 743 इलेक्ट्रिक बसों का पहले से ही संचालन किया जा रहा है।

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 

इस फैसले से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। 

योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। 

इसके अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल देने की मंजूरी दी गई है। प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का फैसला लिया गया है।

700 करोड़ से ईएसआई अस्पताल बनेगा मेडिकल कालेज

राज्य सरकार द्वारा संचालित कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय पाण्डुनगर कानपुर को कर्मचारी राज्य बीमा निगम भारत सरकार को हस्तांतरित किए जाने और भारत सरकार द्वारा संचालित कर्मचारी राज्य बीमा निगम चिकित्सालय जाजमऊ कानपुर को राज्य सरकार को हस्तांतरित किये जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मुहर लग गई। इसी के साथ कानपुर को एक और सुपरस्पेशिटी अस्पताल व मेडिकल कालेज का रास्ता साफ हो गया।

प्रदेश के बीमांकितों को उत्कृष्ट सेवायें देने और सेकेण्डरी केयर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय पाण्डुनगर कानपुर को सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल व मेडिकल कालेज के रूप में विकसित करने के लिए भारत सरकार को हस्तांतरित किया जाएगा। इस चिकित्सालय के एवज में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार द्वारा संचालित चिकित्सालय जाजमऊ को राज्य सरकार को हस्तांतरित किया जाएगा।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार द्वारा पाण्डुनगर चिकित्सालय परिसर में मेडिकल कालेज शुरु करने की परियोजना की लागत लगभग। 700 करोड़ रुपये है। पांडु नगर स्थित अस्पताल का संचालन मेडिकल कालेज के रूप में होने पर बीमितों के बच्चों को एमबीबीएस करने के लिए निर्धारित सीटों का 50 प्रतिशत कोटा प्राप्त होगा। राज्य सरकार का कोटा 35 प्रतिशत और केन्द्र सरकार का कोटा 15 प्रतिशत होगा।

प्रस्तावित मेडिकल कालेज में पहले एमबीबीएस की 50 सीटें होंगी, जिन्हें बाद में बढ़ाकर 100 सीट कर दिया जाएगा। मेडिकल कालेज के साथ 300 बेड के पाण्डुनगर चिकित्सालय के लिए कुल 660 चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारी एवं कार्मिक, पैराचिकित्सकीय स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ और 203 आउटसोर्सिंग सिक्योरिटी एवं हाउस कीपिंग स्टाफ के रूप में अतिरिक्त रोजगार का सृजन होगा।

ऑनलाइन होगा मंडी का शुल्क निर्धारण

प्रदेश के मंडी अधिनियम के नियमों को सरल करने के साथ ही ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ाया जा रहा है। शुल्क ढांचे को तर्कसंगत बनाने और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई नए बदलाव किए गए हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी नियमावली, 1965 के नियम 66-क एवं नियम 96 में संशोधन किये जाने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी (तीसवां संशोधन) नियमावली 2026 तैयार की गई है।

बुधवार को कैबिनेट में इस नियमावली को प्रख्यापित करने की मंजूरी दे दी गई। उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी (तीसवां संशोधन) नियमावली 2026 अभी तक विधिवत आधिकारिक गजट में प्रकाशित नहीं हुई थी। अब यह आधिकारिक गजट बन जाएगा। उसके लागू होने के बाद बिना प्रपत्रों के माल के परिवहन और मण्डी समिति द्वारा व्यापारियों-आढ़तियों पर किए जाने वाले शुल्क निर्धारण के लिए डिजिटल असेसमेंट किया जाएगा।

डिजिटल मण्डी गेट पास व्यवस्था रहेगी। इसका उद्देश्य फिजिकल चेकिंग के दौरान होने वाले विवादों को कम करना और ऑनलाइन रिटर्न तथा डिजिटल इनवॉइस के आधार पर शुल्क निर्धारण को वैधानिक रूप देना है।




 

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकारी आवास पर कैबिनेट की बैठक की। - फोटो : अमर उजाला

सरकारी वकीलों के मानदेय व बहस फीस में बड़ी वृद्धि

कैबिनेट ने हर स्तर पर कार्यरत सरकारी वकीलों के मानदेय (रिटेनरशिप) और प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से उप जिला शासकीय अधिवक्ता से लेकर महाधिवक्ता तक लाभांवित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक कार्य में तेजी आएगी और योग्य वकील सरकारी पक्ष रखने के लिए आकर्षित होंगे। कैबिनेट के इस फैसले से हजारों विधि अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

अभी तक जिला शासकीय अधिवक्ता को रिटेनरशिप फीस 9000 रुपये प्रति महीने और 1650 रुपए प्रति कार्यदिवस मिलता था। इसी तरह अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को वर्तमान में 7200 रुपये रिटेनरशिप फीस व 1500 रुपये प्रति दिन बहस फीस, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता को 6300 रुपये रिटेनरशिप फीस और 1550 रुपये बहस फीस, उप जिला शासकीय अधिवक्ता की रिटेनरशिप फीस 5400 रुपये और बहस फीस 1275 रुपये मिलती थी। 

महाधिवक्ता को रिटनेरशिप फीस 75000 रुपये महीने व बहस फीस प्रतिदिन 40000 रुपये और अपर महाधिवक्ता की रिटेनरशिप फीस 30000 रुपये और बहस फीस 20 हजार रुपये प्रतिदिन मिलती थी, जिसमें कैबिनेट ने वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

जिलास्तर पर वकीलों का अब निर्धारित मानदेय

1. जिला शासकीय अधिवक्ता: रिटेनरशिप फीस 14000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 2500 रुपये प्रति कार्य दिवस। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता: रिटेनर फीस 11000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 2300 रुपये प्रति कार्यदिवस। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता: 10000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 2300 रुपये प्रति कार्यदिवस। उप जिला शासकीय अधिवक्ता: 9000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 2000 रुपये प्रति कार्यदिवस। विशेष अधिवक्ता (न्याय, वित्त व दीवानी फौजदारी) : बहस फीस 2300 रुपये प्रति कार्यदिवस।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट स्तर पर अब निर्धारित मानदेय

महाधिवक्ता: 125000 लाख रुपये प्रति माह, बहस फीस 60000 रुपये प्रति कार्यदिवस। अपर महाधिवक्ता: 50000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 40000 रुपये प्रति कार्यदिवस। अपर महाधिवक्ता (उच्चतम न्यायालय): 50,000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 50000 रुपये प्रति कार्यदिवस। मुख्य स्थायी अधिवक्ता: 35000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 12000 रुपये प्रति कार्यदिवस। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता, अपर लोक अभियोजक: 20000 रुपये प्रति माह, बहस फीस 8000 रुपये प्रति कार्यदिवस।




 

अब दंत चिकित्सक भी बन सकेंगे निदेशक

प्रदेश में अब दंत चिकित्सक भी निदेशक बन सकेंगे। इसके लिए दंत चिकित्सकों के कैडर का पुनर्गठन किया जाएगा। दंत चिकित्सकों को समयबद्ध तरीके से पदोन्नति सहित अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश दंत संवर्ग सेवा नियमावली 1979 में किया जाने वाला तृतीय संशोधन (2026) को बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

अभी तक दंत चिकित्सा का निदेशक प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सक होते हैं। नियमावली संशोधन के बाद दन्त सर्जनों की सेवा शर्तों और पदोन्नति के ढांचे में सुधार होगा। प्रांतीय चिकित्सा सेवा के सामान्य चिकित्सा अधिकारियों की तर्ज पर दंत सर्जनों के संवर्ग को भी अधिक गतिशील और प्रशासनिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। नियमावली में संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा दंत सर्जनों के पदों पर भर्ती के नियमों को अधिक स्पष्ट किया गया है।

इसमें अनिवार्य इंटर्नशिप और उत्तर प्रदेश दंत परिषद में वैध पंजीकरण की कट-ऑफ तिथियों को लेकर विसंगतियों को दूर किया गया है। संशोधन का एक मुख्य फोकस पदों के पुनर्गठन, एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) और उच्च पदों पर संवर्धन के लिए सेवा अवधि के मानकों को तर्कसंगत बनाया गया है।

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