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100 साल बाद टूटेगी परंपरा, बिना महोत्सव के मनाया जाएगा जन्माष्टमी

Mon, 10 Aug 2020 10:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 10:12 PM IST
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tradition will break after 100 years,  janamashtmi will be celebrated without festival
बहराइच। लगातार 100 साल से चली आ रही परंपरा इस बार टूट जाएगी। पूरे जिले में बिना महोत्सव के जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिर हो या पुलिस लाइन, थाना हो या घर। कहीं पर भी भीड़ एकत्रित कर पर्व को मनाने की अनुमति नहीं दी गई है। लोग अपने घरों में बिना महोत्सव के पर्व को परिवार के साथ मनाएंगे। इसको लेकर लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में कृष्ण की मनमोहक मूर्तियाें व पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। भगवान श्रीकृष्ण के झूले व कपड़ों की खरीदारी शुरू हो गई है। बाजार मेें एलईडी झूले की धूम मची हुई है। लोगों की पहली पसंद एलईडी वाला झूला बन रहा है।
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100 साल से मनाई जा रही जन्माष्टमी
शहर के छावनी बाजार के पास स्थित श्रीराम जानकी मंदिर के पदाधिकारी बताते हैं कि पिछले 100 साल से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। मंदिर की स्थापना को भी 101 साल पूरे हो गए है। इस बार कोरोना के कारण सादगी के साथ जन्माष्टमी मनाई जाएगी। बाहर से किसी को भी आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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50 साल से सजा रहे झांकी, इस बार नहीं
शहर के फायर ब्रिगेड के सामने स्थित भाजपा जिलाध्यक्ष श्यामकरन टेकड़ीवाल के आवास के बाहर जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता रहा है। जिलाध्यक्ष श्यामकरन टेकड़ीवाल ने बताया कि पिछले 50 साल से जन्माष्टमी मनाई जा रही है और झांकी सजाई जा रही है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते झांकी नहीं तैयार की जाएगी। घर में ही पूजा होगी।

कोरोना के चलते नहीं होगा महोत्सव
शहर के अग्रसेन चौराहे के पास भगवान शिव की मंदिर है। पदाधिकारी बताते हैं कि लगभग 20 साल से भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की मनाई जा रही है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते किसी भी महोत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा। पदाधिकारियों से राय व प्रशासन के गाइड लाइन के अनुसार ही कार्यक्रम करने की फैसला पदाधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
1920 से शुरू हुई थी परंपरा
भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पूरे धूमधाम व उल्लास के साथ मनाई जाती रही है। यह सिलसिला पिछले 100 साल से शुरू हुआ है। 1920 से पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी मनानी शुरू हुई था। ऐसा पहली बार होगा कि बिना महोत्सव व बिना भक्तों के जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
राधाकृष्ण पाठक, पुजारी पंचायती मंदिर
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