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तपोस्थली के और विकास की दरकारः राजदूत
अमर उजाला ब्यूरो/ बहराइच
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:21 PM IST
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बौद्ध तपोस्थली का भ्रमण करते थाईलैंड के राजदूत व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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थाईलैंड के राजदूत मंगलवार शाम बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचे। उन्होंने तपोस्थली पर मत्था टेकने के साथ ही विभिन्न मूमेंटाें का भ्रमण भी किया। उन्होंने तपोस्थली को और विकसित करने के लिए भारत सरकार से अपील करने की बात कही।
थाईलैंड के राजदूत सी मानित्याकुल मंगलवार शाम आठ सदस्यीय दल के साथ तथागत भगवान बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचे। उन्होंने तपोस्थली में दल समेत रात्रि प्रवास किया और बुधवार को गंध कुटि पर पूजा की। इसके उपरांत राजदूत ने जेतवन के आनंद बोधि पर मत्था टेका।
इस दौरान राजदूत ने कहा कि बुद्ध तपोस्थली श्रावस्ती विश्व का सबसे शांति प्रिय स्थल है। यह बहुत ही पावन व पवित्र स्थल है। जहां भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक 24 वर्ष बिताया। यह स्थल हम लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने कहा कि यहां अभी विकास के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। इसके लिए हम अपने स्तर से भारत सरकार से अपील करेंगे कि श्रावस्ती के विकास के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।
इस दौरान उनके साथ अडून सरावान, कान्यापाक मुनिरात, पीएस संगपता, एके राइ सयांतान बद्रा चेट्टी दा कितचैटवैट आदि शामिल रहे। श्रावस्ती पहुंचने पर प्रशासन द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। तपोस्थली के भ्रमण के बाद राजदूत अपने दल के साथ लुंबनी रवाना हो गए।
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थाईलैंड के राजदूत सी मानित्याकुल मंगलवार शाम आठ सदस्यीय दल के साथ तथागत भगवान बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचे। उन्होंने तपोस्थली में दल समेत रात्रि प्रवास किया और बुधवार को गंध कुटि पर पूजा की। इसके उपरांत राजदूत ने जेतवन के आनंद बोधि पर मत्था टेका।
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इस दौरान राजदूत ने कहा कि बुद्ध तपोस्थली श्रावस्ती विश्व का सबसे शांति प्रिय स्थल है। यह बहुत ही पावन व पवित्र स्थल है। जहां भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक 24 वर्ष बिताया। यह स्थल हम लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने कहा कि यहां अभी विकास के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। इसके लिए हम अपने स्तर से भारत सरकार से अपील करेंगे कि श्रावस्ती के विकास के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।
इस दौरान उनके साथ अडून सरावान, कान्यापाक मुनिरात, पीएस संगपता, एके राइ सयांतान बद्रा चेट्टी दा कितचैटवैट आदि शामिल रहे। श्रावस्ती पहुंचने पर प्रशासन द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। तपोस्थली के भ्रमण के बाद राजदूत अपने दल के साथ लुंबनी रवाना हो गए।