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तीन बच्चों को दिमागी बुखार
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 18 Nov 2015 09:51 PM IST
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बहराइच। तराई में दिमागी बुखार का कहर जारी है। बुधवार को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी की रिपोर्ट में तीन बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है। इससे पीड़ित एक बच्चा निशक्त भी हो चुका है।
डॉक्टरों ने संदिग्धता के आधार पर नौ बच्चों के ब्लड सैंपल लिए थे। दिमागी बुखार की पुष्टि से स्वास्थ्य महकमा सजग हो गया है। शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
बता दें कि बहराइच में दिमागी बुखार के 55 केस मिल चुके हैं। एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। इस वर्ष जुलाई से सितंबर तक जापानी इंसेफेेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (दिमागी बुखार) ने तराई में कहर बरपाया।
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पीड़ित एक मासूम की जान भी चली गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इलाज व बचाव की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की। संवेदनहीनता का मामला जब शासन तक पहुंचा तो विभाग ने जांच प्रक्रिया शुुरू की।
15 सितंबर को जांच के पहले चक्र में 46 केस में से 31 केस पॉजिटिव मिले। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद पॉजिटिव केसों को बैलेंस करने के लिए 22 सितंबर को 21 और बच्चों के सैंपल लिए गए थे लेकिन इस बार भी 9 केस पॉजिटिव मिले।
अब अक्तूबर के अंत में एकत्रित किए गए नौ सैंपलों के परिणाम बुधवार को मिले हैं। इनमें चित्तौरा विकासखंड के गोविंदपुर गांव निवासी चेतराम (6) पुत्र फौजदार, दरगाह थाना अंतर्गत बड़ाचक गांव निवासी कंचन (8) व रिसिया थाना क्षेत्र के कटघरा गांव निवासी सुनील (4) में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है।
विभाग के मुताबिक कंचन की हालत बेहतर है लेकिन सुनील शारीरिक व मानसिक रूप से निशक्त हो चुका है। चेतराम के बारे में विभाग को जानकारी नहीं मिल पा रही है।
वहीं, अब तक बहराइच में दिमागी बुखार के 55 केस मिल चुके हैं। इनमें जापानी इंसेफेलाइटिस के 28 व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 27 केस हैं। एक बच्चे की मौत हो चुकी है।
अब कोई भी पीड़ित नहीं : सीएमएस
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि तीन बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है। ये सैंपल अक्तूबर के अंत में लिए गए थे। सीएमएस ने दावा किया है कि अब जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप खत्म हो चुका है।
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डॉक्टरों ने संदिग्धता के आधार पर नौ बच्चों के ब्लड सैंपल लिए थे। दिमागी बुखार की पुष्टि से स्वास्थ्य महकमा सजग हो गया है। शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
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बता दें कि बहराइच में दिमागी बुखार के 55 केस मिल चुके हैं। एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। इस वर्ष जुलाई से सितंबर तक जापानी इंसेफेेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (दिमागी बुखार) ने तराई में कहर बरपाया।
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पीड़ित एक मासूम की जान भी चली गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इलाज व बचाव की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की। संवेदनहीनता का मामला जब शासन तक पहुंचा तो विभाग ने जांच प्रक्रिया शुुरू की।
15 सितंबर को जांच के पहले चक्र में 46 केस में से 31 केस पॉजिटिव मिले। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद पॉजिटिव केसों को बैलेंस करने के लिए 22 सितंबर को 21 और बच्चों के सैंपल लिए गए थे लेकिन इस बार भी 9 केस पॉजिटिव मिले।
अब अक्तूबर के अंत में एकत्रित किए गए नौ सैंपलों के परिणाम बुधवार को मिले हैं। इनमें चित्तौरा विकासखंड के गोविंदपुर गांव निवासी चेतराम (6) पुत्र फौजदार, दरगाह थाना अंतर्गत बड़ाचक गांव निवासी कंचन (8) व रिसिया थाना क्षेत्र के कटघरा गांव निवासी सुनील (4) में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है।
विभाग के मुताबिक कंचन की हालत बेहतर है लेकिन सुनील शारीरिक व मानसिक रूप से निशक्त हो चुका है। चेतराम के बारे में विभाग को जानकारी नहीं मिल पा रही है।
वहीं, अब तक बहराइच में दिमागी बुखार के 55 केस मिल चुके हैं। इनमें जापानी इंसेफेलाइटिस के 28 व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 27 केस हैं। एक बच्चे की मौत हो चुकी है।
अब कोई भी पीड़ित नहीं : सीएमएस
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि तीन बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है। ये सैंपल अक्तूबर के अंत में लिए गए थे। सीएमएस ने दावा किया है कि अब जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप खत्म हो चुका है।