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बहराइच: हजारों निराश्रित गोवंशों को मिलेगा ठिकाना
Wed, 15 Feb 2023 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 15 Feb 2023 11:11 PM IST
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बहराइच। गांव व सड़कों पर छुट्टा घूम रहे निराश्रित गोवंशों को बहुत जल्द स्थायी ठिकाना मिलने वाला है। गोवंश संरक्षण के लिए जिले के तीन विकासखंडों में बनाए जा रहे चार गो संरक्षण केंद्र लगभग पूूरे हो गए हैं। नवाबगंज में बनाया जा रहा संरक्षण केंद्र पशुपालन विभाग को कल हैंडओवर कर दिया जाएगा। जबकि तीन गो संरक्षण केंद्र माह के अंत तक हैंड ओवर कर दिए जाएंगे। जिले में निराश्रित घूम रहे छुट्टा गोवंशों को आसरा देने के लिए जिले के तीन ब्लॉकों में 4.80 करोड़ से वृहद गो संरक्षण केन्द्र बनाए जा रहे हैं। इसमें फखरपुर ब्लॉक में निर्मित हो रहा अचौलिया, गोहनिया, चित्तौरा ब्लॉक में चफरिया और नवाबगंज ब्लॉक का चर्दा गोसंरक्षण केन्द्र शामिल हैं। एक करोड़ 20 लाख की लागत से बन रहे प्रत्येक गोसंरक्षण केन्द्र में से नवाबगंज का चर्दा गोसंरक्षण केंद्र का काम पूरा हो गया है। इसकी जांच के लिए डीएम की अध्यक्षता में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की टीम गठित की गई है जो बृहस्पतिवार को गोसंरक्षण केंद्र की जांच करेगी और अगर सब कुछ सही मिला तो कल विभाग को रिपोर्ट हैंडओवर हो जाएगी। वहीं फखरपुर ब्लॉक के अचौलिया, गोहनिया और चित्तौरा ब्लॉक के चफरिया गो संरक्षण केन्द्र का कार्य भी अंतिम दौर में है और इसे भी एक सप्ताह के भीतर पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है।
निराश्रित गोवंशों का सबसे बड़ा खामियाजा जिले के किसानों केे उठाना पड़ रहा है। निराश्रित गोवंश किसानों के खेतों में लगी मेहनत से उगाई गई फसल को चट कर जाते हैं। इसके चलते अधिकांश गांवों में किसानों को रात भर जाग कर चौकीदारी करते देखा जा रहा है। ऐसे में जिन चार क्षेत्रों में गोसंरक्षण केन्द्र बन रहे हैं, उनके चालू होने से आसपास के किसानों को सीधा फायदा होगा और उन्हें रात में चौकीदारी करने से निजात मिलेगी। प्रत्येक गो संरक्षण केन्द्र में 400-400 गोवंश संरक्षित किए जाएंगे।वृहद गो संरक्षण केंद्र में गोवंशों के रहने के लिए तीन बड़े टिन शेड बनाए गए हैं। साथ ही गोवंशों के खाने के लिए एक भूसा गोदाम, एक कर्मचारियों के लिए कार्यालय, पानी पीने के लिए हौज, समरसेबल पंप आदि का निर्माण करवाया गया है।
एक गो संरक्षण केंद्र तैयार हो चुका है, आज जांच में सब कुछ सही मिलने पर यह हैंडओवर हो जाएगा। शेष बचे तीनों गो संरक्षण केंद्र भी महीनें के आखिरी तक पूरे हो जाएंगे। एक जनवरी से इनमें गोवंशों का संरक्षण शुरु कर दिया जाएगा।
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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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निराश्रित गोवंशों का सबसे बड़ा खामियाजा जिले के किसानों केे उठाना पड़ रहा है। निराश्रित गोवंश किसानों के खेतों में लगी मेहनत से उगाई गई फसल को चट कर जाते हैं। इसके चलते अधिकांश गांवों में किसानों को रात भर जाग कर चौकीदारी करते देखा जा रहा है। ऐसे में जिन चार क्षेत्रों में गोसंरक्षण केन्द्र बन रहे हैं, उनके चालू होने से आसपास के किसानों को सीधा फायदा होगा और उन्हें रात में चौकीदारी करने से निजात मिलेगी। प्रत्येक गो संरक्षण केन्द्र में 400-400 गोवंश संरक्षित किए जाएंगे।वृहद गो संरक्षण केंद्र में गोवंशों के रहने के लिए तीन बड़े टिन शेड बनाए गए हैं। साथ ही गोवंशों के खाने के लिए एक भूसा गोदाम, एक कर्मचारियों के लिए कार्यालय, पानी पीने के लिए हौज, समरसेबल पंप आदि का निर्माण करवाया गया है।
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एक गो संरक्षण केंद्र तैयार हो चुका है, आज जांच में सब कुछ सही मिलने पर यह हैंडओवर हो जाएगा। शेष बचे तीनों गो संरक्षण केंद्र भी महीनें के आखिरी तक पूरे हो जाएंगे। एक जनवरी से इनमें गोवंशों का संरक्षण शुरु कर दिया जाएगा।
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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी