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Bahraich News: रूपईडीहा रोडवेज के बेड़े में 60 बसें, सड़कों पर दौड़ रहीं सिर्फ 38
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बहराइच। रूपईडीहा से बहराइच समेत अन्य लोकल मार्ग पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। यात्रियों को यहां का सफर डग्गामार या फिर निजी बसों से पूरा करना पड़ता है। जबकि निगम के बेड़े में 60 बसे हैं। इसमें केवल 38 का ही संचालन हो रहा है, बाकी 22 बसें रोडवेज की कार्यशाला में खड़ी धूल फांक रही हैं।
रूपईडीहा देश का अंतिम पड़ाव है। इसके बाद नेपाल की सीमा शुरू हो जाती है। इसलिए आवागमन को लेकर भी इस क्षेत्र का महत्व है। प्रतिदिन सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों के साथ ही नेपाल से आने वाले लोग व स्थानीय लोगों का बहराइच सहित अन्य क्षेत्रों में आना जाना रहता है। लेकिन बस सेवा के नाम पर महज यहां कोरम पूरा किया जा रहा है।
यहां का महत्व देखते हुए दिसंबर 2022 में ही परिवहन बस डिपो स्थापित किया गया था। पहले दिन ही यहां 38 बसें मिल गईं। धीरे-धीरे यहां 60 बसों को बेड़ा तैयार हो गया। इसके बाद भी गैर जिलों के साथ ही लोकल सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। निगम केवल लंबे रूट की बसों का ही संचालन किसी तरह से शुरू कर पाया। देखा जाए तो 60 में से 38 बसें ही सड़कों पर यात्रियों की सेवा के लिए उतर पाईं। बाकी 22 बसें आज भी डिपो के कार्यशाला में सड़क पर दौड़ने का इंतजार कर रही हैं।
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चालक व परिचालक का अभाव
सड़क पर बसें ने उतरने का कारण निगम चालक व परिचालक का अभाव बता रहा है। यह बात और है कि यहां बस चलाने के लिए कई चालकों की अर्जी निगम के पास पड़ी है, लेकिन ठेका पद्धति होने के कारण निगम उस पर कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
यहां के लिए बसों की मांग
रूपईडीहा से बाबागंज, मल्हीपुर, बदला चौराहा होते हुए श्रावस्ती, बलरामपुर व गोरखपुर तक। रूपईडीहा से मल्हीपुर-बहराइच सेवा। रूपईडीहा से जिला मुख्यालय तक प्रत्येक घंटे पर शटल बस सेवा। रूपईडीहा से इमामगंज चौराहा होते हुए कोटवा, रामनगर होते हुए बहराइच।
चालक व परिचालकों की कमी से नहीं चल पा रही बसें
रोडवेज बस अड्डे पर चालक व परिचालकों की कमी से बसों का संचालन कराने में परेशानी हो रही है। हालांकि महिला परिचालकों के भर्ती की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू हो रही है। चालक व परिचालकों की तैनाती होने के बाद बसों को लोकल मार्ग पर चलाने की व्यवस्था बनाई जाएगी। -रामप्रकाश, एआरएम, रूपईडीहा रोडवेज बस अड्डा
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रूपईडीहा देश का अंतिम पड़ाव है। इसके बाद नेपाल की सीमा शुरू हो जाती है। इसलिए आवागमन को लेकर भी इस क्षेत्र का महत्व है। प्रतिदिन सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों के साथ ही नेपाल से आने वाले लोग व स्थानीय लोगों का बहराइच सहित अन्य क्षेत्रों में आना जाना रहता है। लेकिन बस सेवा के नाम पर महज यहां कोरम पूरा किया जा रहा है।
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यहां का महत्व देखते हुए दिसंबर 2022 में ही परिवहन बस डिपो स्थापित किया गया था। पहले दिन ही यहां 38 बसें मिल गईं। धीरे-धीरे यहां 60 बसों को बेड़ा तैयार हो गया। इसके बाद भी गैर जिलों के साथ ही लोकल सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। निगम केवल लंबे रूट की बसों का ही संचालन किसी तरह से शुरू कर पाया। देखा जाए तो 60 में से 38 बसें ही सड़कों पर यात्रियों की सेवा के लिए उतर पाईं। बाकी 22 बसें आज भी डिपो के कार्यशाला में सड़क पर दौड़ने का इंतजार कर रही हैं।
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चालक व परिचालक का अभाव
सड़क पर बसें ने उतरने का कारण निगम चालक व परिचालक का अभाव बता रहा है। यह बात और है कि यहां बस चलाने के लिए कई चालकों की अर्जी निगम के पास पड़ी है, लेकिन ठेका पद्धति होने के कारण निगम उस पर कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
यहां के लिए बसों की मांग
रूपईडीहा से बाबागंज, मल्हीपुर, बदला चौराहा होते हुए श्रावस्ती, बलरामपुर व गोरखपुर तक। रूपईडीहा से मल्हीपुर-बहराइच सेवा। रूपईडीहा से जिला मुख्यालय तक प्रत्येक घंटे पर शटल बस सेवा। रूपईडीहा से इमामगंज चौराहा होते हुए कोटवा, रामनगर होते हुए बहराइच।
चालक व परिचालकों की कमी से नहीं चल पा रही बसें
रोडवेज बस अड्डे पर चालक व परिचालकों की कमी से बसों का संचालन कराने में परेशानी हो रही है। हालांकि महिला परिचालकों के भर्ती की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू हो रही है। चालक व परिचालकों की तैनाती होने के बाद बसों को लोकल मार्ग पर चलाने की व्यवस्था बनाई जाएगी। -रामप्रकाश, एआरएम, रूपईडीहा रोडवेज बस अड्डा