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तीन आरोपियों को उम्रकैद
अमर उजाला/बहराइच
Updated Thu, 16 Feb 2017 11:58 PM IST
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घर से खेलने के लिए निकले एक मासूम को 1991 में गांव के पड़ोसियों ने अगवा कर तांत्रिक अनुष्ठान के लिए उसकी हत्या कर दी थी। बच्चे का शव 26 दिन बाद तालाब से बरामद हुआ था। इस मामले में मृतक के पिता ने आठ लोगों को नामजद करते हुए तहरीर दी थी। उसमें से सगे भाइयों समेत तीन आरोपियों को दोषसिद्ध करार देते हुए न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
दीवानी कचहरी के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी फिरोज अहमद खां ने बताया कि विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के नौवा गंगा जमुनी गांव निवासी रुद्रदेव शुक्ल का सात वर्षीय पुत्र अनूप कुमार उर्फ दद्दू 25 अक्तूबर 1991 को घर से खेलने निकला था। तभी गांव निवासी सगे भाई रामदेव, गोकुलाप्रसाद ने मुंशीराम व अन्य के सहयोग से उसे अगवा कर तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान हत्या कर दी थी।
अनूप के लापता होने से परिवारीजन बेचैन थे। लेकिन उस समय रुद्रदेव घर से बाहर थे। तीन सप्ताह बाद उनके लौटने पर अनूप की खोजबीन शुरू हुई तो उसका शव गांव के बाहर एक तालाब से बरामद हुआ। पिता रुद्रदेव ने गांव के लोगों से पूछताछ के बाद रामदेव समेत आठ लोगों को नामजद करते हुए थाने पर तहरीर दी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया था, जिससे हत्या की पुष्टि हुई।
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गुरुवार को मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर चार सुरेश चंद्र भारती के न्यायालय पर हुई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने सगे भाइयों रामदेव शुक्ला और गोकुला प्रसाद पुत्र बच्छराज तथा सहयोगी मुंशीराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। उधर, एडीजीसी क्रिमनल फिरोज अहमद ने बताया कि सत्र परीक्षण के दौरान संदेह के आधार पर बालक की हत्या में नामजद जसवंत लाल, गिरीशचंद्र, छेदी उर्फ रामनरेश, टीकमदत्त तथा विद्याधर को बरी कर दिया गया है।
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दीवानी कचहरी के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी फिरोज अहमद खां ने बताया कि विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के नौवा गंगा जमुनी गांव निवासी रुद्रदेव शुक्ल का सात वर्षीय पुत्र अनूप कुमार उर्फ दद्दू 25 अक्तूबर 1991 को घर से खेलने निकला था। तभी गांव निवासी सगे भाई रामदेव, गोकुलाप्रसाद ने मुंशीराम व अन्य के सहयोग से उसे अगवा कर तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान हत्या कर दी थी।
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अनूप के लापता होने से परिवारीजन बेचैन थे। लेकिन उस समय रुद्रदेव घर से बाहर थे। तीन सप्ताह बाद उनके लौटने पर अनूप की खोजबीन शुरू हुई तो उसका शव गांव के बाहर एक तालाब से बरामद हुआ। पिता रुद्रदेव ने गांव के लोगों से पूछताछ के बाद रामदेव समेत आठ लोगों को नामजद करते हुए थाने पर तहरीर दी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया था, जिससे हत्या की पुष्टि हुई।
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गुरुवार को मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर चार सुरेश चंद्र भारती के न्यायालय पर हुई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने सगे भाइयों रामदेव शुक्ला और गोकुला प्रसाद पुत्र बच्छराज तथा सहयोगी मुंशीराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। उधर, एडीजीसी क्रिमनल फिरोज अहमद ने बताया कि सत्र परीक्षण के दौरान संदेह के आधार पर बालक की हत्या में नामजद जसवंत लाल, गिरीशचंद्र, छेदी उर्फ रामनरेश, टीकमदत्त तथा विद्याधर को बरी कर दिया गया है।