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Bahraich News: मातम में बदलीं दो परिवारों की खुशियां, अनाथ हुआ विक्की
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फखरपुर में मदन कोठी के पास हादसे के बाद जमा भीड़। -संवाद
बहराइच/शिवपुर। फखरपुर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों से उनकी खुशियां एक झटके में छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले चंद्र किशोर की पत्नी बबिता पोस्टमार्टम हाउस पर बिलख-बिलख कर रो रही थीं। पति और बेटे की बातों को याद कर वह कभी चीख उठतीं तो कभी बेसुध हो जातीं। इस गमगीन माहौल में वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार सुबह हुए इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें चंद्र किशोर, उनका बहनोई करन सिंह, करन की पत्नी सेनू और छोटा पुत्र विष्णु शामिल थे। हादसे की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।
हादसे में पति चंद्र किशोर को खो चुकीं बबिता ने अपने दर्द को बयां करते हुए बताया, मेरा बेटा कहता था पापा, मैं बड़ा होकर आपका नाम रोशन करूंगा… अब वो सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना कहते ही वह बेसुध हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और मुंह पर पानी के छींटे मारने लगे।
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चंद्र किशोर के तीन बेटे सौरभ (15), लकी और निखिल हैं। सौरभ भी अपने पिता को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहा। घर में चंद्र किशोर की बूढ़ी मां की आंखें भी पथरा सी गई हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में बेटे की मौत की खबर ने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया है।
उधर करन सिंह के घर में भी मातम पसरा है। करन दिहाड़ी मजदूरी करते थे और पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी सेनू और तीन साल का बेटा भी इसी हादसे में चल बसे। बड़ा बेटा विक्की (8) अब अनाथ हो चुका है। परिजन उसे संभालते रहे, पर उसके मासूम सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे।
दिहाड़ी मजदूरी करते थे दोनों
मटेरा। सड़क हादसे में दम तोड़ने वाले करन सिंह और उनके बहनोई चंद्रकिशोर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। चंद्रकिशोर अपने घर में कमाने वाला अकेला था। उसकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
रात में ससुराल में रुका था करन
खैरीघाट के ललुही गांव निवासी करन सिंह अपनी पत्नी सेनू और बेटे विष्णु के साथ कोटवाधाम मेले में जाने के लिए मंगलवार शाम को ससुराल भगवानपुर नानपारा पहुंचा था। भोर में 5 बजे वह अपने साले चंद्र किशोर, पत्नी और बेटे के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर कोटवा धाम मेले के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया।
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लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार सुबह हुए इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें चंद्र किशोर, उनका बहनोई करन सिंह, करन की पत्नी सेनू और छोटा पुत्र विष्णु शामिल थे। हादसे की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।
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हादसे में पति चंद्र किशोर को खो चुकीं बबिता ने अपने दर्द को बयां करते हुए बताया, मेरा बेटा कहता था पापा, मैं बड़ा होकर आपका नाम रोशन करूंगा… अब वो सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना कहते ही वह बेसुध हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और मुंह पर पानी के छींटे मारने लगे।
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चंद्र किशोर के तीन बेटे सौरभ (15), लकी और निखिल हैं। सौरभ भी अपने पिता को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहा। घर में चंद्र किशोर की बूढ़ी मां की आंखें भी पथरा सी गई हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में बेटे की मौत की खबर ने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया है।
उधर करन सिंह के घर में भी मातम पसरा है। करन दिहाड़ी मजदूरी करते थे और पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी सेनू और तीन साल का बेटा भी इसी हादसे में चल बसे। बड़ा बेटा विक्की (8) अब अनाथ हो चुका है। परिजन उसे संभालते रहे, पर उसके मासूम सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे।
दिहाड़ी मजदूरी करते थे दोनों
मटेरा। सड़क हादसे में दम तोड़ने वाले करन सिंह और उनके बहनोई चंद्रकिशोर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। चंद्रकिशोर अपने घर में कमाने वाला अकेला था। उसकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
रात में ससुराल में रुका था करन
खैरीघाट के ललुही गांव निवासी करन सिंह अपनी पत्नी सेनू और बेटे विष्णु के साथ कोटवाधाम मेले में जाने के लिए मंगलवार शाम को ससुराल भगवानपुर नानपारा पहुंचा था। भोर में 5 बजे वह अपने साले चंद्र किशोर, पत्नी और बेटे के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर कोटवा धाम मेले के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया।