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Bahraich News: फिर जिंदा हुआ लंगड़े भेड़िये का खौफ

Thu, 05 Jun 2025 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Thu, 05 Jun 2025 01:10 AM IST
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The fear of the lame wolf came alive again
महसी तहसील क्षेत्र में पिछले साल पकड़े गए भेड़िये की फाइल फोटो।
बहराइच। गदामार कला के मजरा गढ़ीपुरवा में सोमवार देर रात मां के साथ बरामदे में सो रहे मासूम आयुष (02) को भेड़िया उठा ले गया था। वह उसे करीब एक किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में ले जा कर अपना निवाला बनाया। ग्रामीणों का दावा है कि कई लोगों ने आयुष के शव को खाते हुए तीन भेड़ियों को देखा है। जिनमें से भेड़िये के दो बच्चे व एक लंगड़ा भेड़िया था। ग्रामीणों के दावे से बीते वर्ष करीब पांच माह तक आतंक का पर्याय बना रहने वाला लंगड़ा भेड़िया लोगों के जेहन में फिर से जिंदा को गया है।
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महसी का इलाका जून से लेकर अक्तूबर माह तक भेड़िये के साये में रहता है। सोमवार रात को करीब एक से दो बजे रात को खुशबू के बगल सो रहे उसके दो वर्ष के बेटे को वन्यजीव उठा ले गया। मासूम को वह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में ले गया और उसे निवाला बनाया। घटना की जानकारी पर ग्रामीण बच्चे को खोजते हुए जब खेत में पहुंचे तो तीन भेड़िये आयुष के शव को खा रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि इस भेड़िये को पकड़ने के लिए वन विभाग ने जो जाल लगाया था उसे फाड़ कर भेड़िया फिर गन्ने के खेत में भाग गया।
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ग्रामीणों का दावा यह भी है कि ड्रोन से भी भेड़िये को देखा गया, लेकिन वन विभाग उसे देखने के बाद भी उसे सियार बताता रहा। ऐसा ही बीते वर्ष जून से अक्तूबर माह के बीच भी देखने को मिला था, जब भेड़िये लोगों को लगातार अपना निवाला बना रहे थे। लेकिन वन विभाग उसे भेड़िया मानने को तैयार नहीं था। हालांकि वन विभाग ने दो सितंबर 2024 को पत्र जारी कर केवल आठ मौत भेड़िये के हमले में होने की पुष्टि की थी। हमलों में लंगड़े भेड़िया के शामिल होने का जिक्र ग्रामीणों ने किया था। दावा था कि लगातार हमला कर रहे भेड़िये के इस कुटुंब का अगुवाई यही लंगड़ा भेड़िया ही कर रहा था।
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हालांकि वन विभाग ऐसे किसी लंगड़े भेड़िये के होने की की पुष्टि तो नहीं की थी, लेकिन लगातार हो रहे हमले व इसमें हुई मौतों ने अधिकारियों की चिंता जरूर बढ़ा दी थीं। एक के बाद एक हुए वन्यजीव के हमलों में करीब अस्सी लोग घायल हुए थे। वन विभाग ने पांच भेड़ियों को पकड़ा था।
आयुष की मौत के बाद एक बार फिर भेड़ियों की दहशत लोगों में दिख रही है। पीड़ित के परिजनों के साथ ही ग्रामीण लंगड़े भेड़िये के हमले में शामिल होने की बात कह रहे हैं। यही नहीं उसके कुटुंब में दो नए भेड़ियों की मौजूदगी लोगों की चिंता के साथ दहशत भी बढ़ा रही है।


बीते वर्ष जुलाई में हुआ था पहला हमला
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार भेड़िये का पहला हमला 17 जुलाई को मक्कापुरवा में हुआ था। भेड़िये ने अख्तर रजा के एक वर्ष के पुत्र को अपना निवाला बनाया था। भेड़िये के आखिरी हमले की घटना दो सितंबर को गठेरी में हुई थी। यहां ढाई वर्ष की अंजली को भेड़िये ने अपना शिकार बनाया था। हालांकि वन विभाग से इतर ग्रामीणों का दावा है कि जुलाई माह से पूर्व 10 मार्च को मिश्रनपुरवा में तीन वर्षीय सायरा को तो 23 मार्च को नयापुरवा से दो वर्षीय छोटू की हमले में मौत हुई थी।


क्या कहते हैं पीड़ित
गदामार कला के गढ़ीपुरवा निवासी हरीश चंद्र राव बताते हैं कि उन्होंने खुद ही भेड़िये को बच्चे का शव खाते देखा है। शिव दुलारी का दावा है कि उनके बेटों ने भेड़िये को घेर लिया था। वहां सभी ने उसे देखा। दूसरी ओर आयुष की मां खुशबू व उसके पिता प्रमोद अभी भी इस हालत में नहीं है कि वह यह बता सकें कि उनके बच्चे को घसीट कर एक किलोमीटर तक ले जाने वाला वन्यजीव भेड़िया था या फिर सियार। वे उस वन्यजीव को पकड़ने की मांग कर रहे हैं, जिसने उनके बच्चे को अपना निवाला बनाया।


इन गांवों में थी भेड़िये की दहशत
महसी के नयापुरवा, मक्कापुरवा, नक्वा, कौलेला, सिंगिया नसीरपुर , पूरे बस्ती, गडेरिया, कुम्हारनपुरवा, दीवानपुरवा, गरेठी गुरदत्त सिंह, नौव्वन गरेठी में आठ लोगों की मौत भेड़िये के हमले में हो चुकी है। इनमें केवल एक अधेड़ था और बाकी सब बच्चे।



घटना के बाद मैं वहां गया था। ग्रामीण परेशान हैं। थर्मल सेंसर कैमरे के साथ ड्रोन से पूरे इलाके को स्कैन किया गया है। वहां भेड़िया नहीं मिला, न ही कोई मांद दिखाई दी है। यदि कोई भेड़िया दिखाई देता है तो उसकी जानकारी दी जाएगी। अभी लोगों को भेड़िये के नाम पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। मृतक बच्चे के घाव से लिए सैंपल को लैब टेस्ट के लिए देहरादून भेजा गया है। जहां यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत किसके हमले से हुई है। -अजीत प्रताप सिंह डीएफओ
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