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Bahraich News: मानक के विपरीत स्पर का निर्माण, दांव पर 13 गांवों की सुरक्षा

Fri, 05 Jun 2026 12:25 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:25 AM IST
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The construction of the spur is contrary to the standard, putting the safety of 13 villages at stake.
महसी के किलोमीटर संख्या 49 पर बन रहा स्पर। - फोटो : महसी के किलोमीटर संख्या 49 पर बन रहा स्पर।
बहराइच। सरयू नदी के कटान से 13 गांवों और करीब दो लाख आबादी को बचाने के लिए शुरू की गई 9.65 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं। बेलहा-बहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 49 और 50 पर बनाए जा रहे स्पर, बोल्डर नोज और अपरन निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। निर्माण स्थल पर ऐसे सफेद बोल्डरों का उपयोग किया जा रहा है, जिन्हें विभागीय मानकों पर खरे नहीं हैं।
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सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम की ओर से महसी क्षेत्र में कटान रोकने के लिए दो स्पर निर्माण कराए जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य तटबंध को सुरक्षित रखना और नदी की धारा को नियंत्रित कर गांवों को कटान से बचाना है, लेकिन निर्माण कार्य की शुरुआत में ही गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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बेलहा-बहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 49 पर बनाए जा रहे स्पर और नोज में सफेद बोल्डरों का प्रयोग खुलकर किया जा रहा है। खास बात यह है कि विभाग के सहायक अभियंता नंदू प्रसाद ने भी स्वीकार किया है कि ऐसे बोल्डर विभागीय मानकों में अनुमन्य नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में केवल मिर्जापुर और चिनार क्षेत्र के पत्थरों का उपयोग मानक के अनुरूप माना जाता है। सफेद बोल्डरों में मिट्टी की मात्रा अधिक होती है और उनका उपयोग सामान्यतः सड़क निर्माण में किया जाता है, जबकि नदी की तेज धारा और कटान को रोकने वाली संरचनाओं में इनका प्रयोग तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं माना जाता। सहायक अभियंता ने कहा कि शिकायत मिली है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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दो लाख आबादी की सुरक्षा से जुड़ा है मामला
महसी क्षेत्र में सरयू नदी की कटान हर वर्ष भारी तबाही मचाती है। बाढ़ के दौरान करीब दो लाख लोग प्रभावित होते हैं, जबकि 400 से अधिक गांव जलभराव और कटान के खतरे का सामना करते हैं। इसी को देखते हुए शासन ने दो स्पर निर्माण के लिए 9.65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। किलोमीटर संख्या 49.100 पर बनने वाले स्पर पर 4.83 करोड़ रुपये और किलोमीटर संख्या 50.100 पर बनने वाले स्पर पर 4.81 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।


गुणवत्तापूर्ण निर्माण ही देगा सुरक्षा

सेवानिवृत्त अभियंता एएन वर्मा का कहना है कि स्पर, नोज और अपरन जैसी संरचनाएं तभी प्रभावी होती हैं जब उनमें मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग किया जाए। यदि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया तो बाढ़ के दौरान पूरी संरचना कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि बरसात से पहले निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।



इन गांवों के लिए बन रहे स्पर

सरयू नदी के किनारे बसे टिकरी, कोढ़वा, पिपरा, पिपरी, राठौरनपुरवा, किशनगंज चौराहा, गोलागंज, लोधौनी, हलवाईपुरवा समेत 13 गांव हर वर्ष कटान के खतरे से जूझते हैं। इन्हीं गांवों और तटबंध की सुरक्षा के लिए यह परियोजना शुरू की गई है, लेकिन निर्माण में मानकों की अनदेखी के आरोपों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
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