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झुलसा रोग से बचाने को फसलों में छिड़कें दवा
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बहराइच। मौसम विभाग की ओर से प्रदेश में तापमान में गिरावट, कोहरा, पाला एवं आने वाले दिनों में बारिश की संभावना के मद्देनजर आलू, आम, केला एवं शाकभाजी जैसी औद्यानिक फसलों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए प्रतिकूल मौसम होगा। इसमें समय से रोगों की रोकथाम किए जाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग की ओर से किसानों के लिए एडवायजरी जारी की गई है।
जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में लगभग 2200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बोवाई की गई है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है, जिससे फसल को काफी नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू होती हैं जो तीव्रगति से फैलती है।
पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं तथा पत्तियों की निचली सतह पर रूई की तरह फफूंद दिखाई देती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं 10-20 डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है और दो से चार दिनों के अंदर ही पूरी फसल नष्ट हो जाती है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को सलाह दी है कि आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा बीमारी के रोकथाम के लिए मेंकोजेब, प्रोपीनेब व क्लोरोेथेलोनील युक्त फफूंदनाशक दवा को पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव तुरंत करें।
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साथ ही साथ यह भी सलाह दी गई है कि जिन खेतों में फसलोें में रोग दिखाई दे रहा हो, उनमें किसी भी फफूंदनाशक दवा का छिड़काव तत्काल करें। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिले में आम की अच्छी उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए गुजिया कीट (मैंगो मिलीबग) से बचाया जाना बहुत जरूरी है। इस कीट से आम की फसल को काफी क्षति पहुंचती है। इसके लिए पानी में घोल बनाकर दवा का छिड़काव करना चाहिए।
पाला से केले की फसल होती बर्बाद
डीएचओ ने बताया कि जनपद बहराइच तराई क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जनपद में केला की खेती व्यवसायिक स्तर पर तेजी से की जा रही है। वातावरण में पाला पड़ने के कारण केले की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। इसी प्रकार अन्य सब्जियों मिर्च, टमाटर, मटर आदि फसलों पर भी कम तापमान एवं कोहरा, पाला, एवं बूंदाबांदी से नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में किसानों को सलाह दी जाती है कि अपने खेतों के आसपास धुआं आदि करके फसल को पाले से बचाएं। फसलों में नमी बनाये रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई की जाए। पौधशाला के छोटे पौधों को पाले, कोहरे से बचाये जाने के लिए उद्यानों को पॉलिथीन अथवा टाट से ढंकना चाहिए।
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जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में लगभग 2200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बोवाई की गई है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है, जिससे फसल को काफी नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू होती हैं जो तीव्रगति से फैलती है।
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पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं तथा पत्तियों की निचली सतह पर रूई की तरह फफूंद दिखाई देती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं 10-20 डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है और दो से चार दिनों के अंदर ही पूरी फसल नष्ट हो जाती है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को सलाह दी है कि आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा बीमारी के रोकथाम के लिए मेंकोजेब, प्रोपीनेब व क्लोरोेथेलोनील युक्त फफूंदनाशक दवा को पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव तुरंत करें।
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साथ ही साथ यह भी सलाह दी गई है कि जिन खेतों में फसलोें में रोग दिखाई दे रहा हो, उनमें किसी भी फफूंदनाशक दवा का छिड़काव तत्काल करें। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिले में आम की अच्छी उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए गुजिया कीट (मैंगो मिलीबग) से बचाया जाना बहुत जरूरी है। इस कीट से आम की फसल को काफी क्षति पहुंचती है। इसके लिए पानी में घोल बनाकर दवा का छिड़काव करना चाहिए।
पाला से केले की फसल होती बर्बाद
डीएचओ ने बताया कि जनपद बहराइच तराई क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जनपद में केला की खेती व्यवसायिक स्तर पर तेजी से की जा रही है। वातावरण में पाला पड़ने के कारण केले की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। इसी प्रकार अन्य सब्जियों मिर्च, टमाटर, मटर आदि फसलों पर भी कम तापमान एवं कोहरा, पाला, एवं बूंदाबांदी से नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में किसानों को सलाह दी जाती है कि अपने खेतों के आसपास धुआं आदि करके फसल को पाले से बचाएं। फसलों में नमी बनाये रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई की जाए। पौधशाला के छोटे पौधों को पाले, कोहरे से बचाये जाने के लिए उद्यानों को पॉलिथीन अथवा टाट से ढंकना चाहिए।