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भारत-नेपाल सीमा पर छह पिलर गायब

अमर उजाला/बहराइच Updated Sat, 20 May 2017 11:52 PM IST
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भारत-नेपाल सीमा पर गायब पिलर
भारत-नेपाल सीमा पर गायब पिलर - फोटो : अमर उजाला

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विधान परिषद में बीते दिन लखीमपुर खीरी के संपूर्णनगर क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के पिलर गायब होने का मुद्दा उठाया गया। मगर बहराइच से सटी भारत-नेपाल सीमा पर भी लगभग यही हालात हैं। सीमा की सुरक्षा के लिए नोमेंस लैंड पर दोनों देशों के सीमा स्तंभ स्थापित हैं, लेकिन छह सीता स्तंभ कई साल से गायब हैं। वहीं 13 से अधिक स्तंभ क्षतिग्रस्त हैं।
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अभी तक उसे दुरुस्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं खुली सीमा होने से देश विरोधी तत्व और तस्कर आए दिन सीमा में सेंध लगाते हैं। सघन गश्त के बावजूद तस्करों ने जंगल और गांवों की पगडंडियों को रास्ता बना लिया है। 


भारत-नेपाल की सीमा बहराइच में 110 किमी परिक्षेत्र में है। इनमें 80 फीसदी हिस्सा जंगल और ग्रामीण अंचलों का शामिल है। खुली सीमा ऊपर से जंगल और ग्रामीण अंचलों के दुरूह रास्ते सेंधमारी का सबब बनते हैं। आए दिन घुसपैठ की वारदातें होती हैं। हालांकि सीमा की सुरक्षा के लिए एसएसबी तैनात है। फिर भी जंगल और गांव की पगडंडियां देश विरोधी गतिविधियों में सहायक बन रही हैं।

उपेक्षा का आलम यह है कि भारत और नेपाल को अलग-अलग हिस्सों में बांटने वाले सीमा स्तंभ भी सुरक्षित नहीं है। छह सीमा स्तंभ अरसे से गायब हैं। कुछ स्थानों पर लोगों ने नोमेंस लैंड पर कब्जा कर मकान बना लिए हैं। उधर, कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में बिछिया बाजार से 10 किलोमीटर की दूरी पर भारत-नेपाल सीमा स्थित है। लेकिन यहां पर नोमेंस लैंड का ही पता नहीं है। यहीं पर चार सीमा स्तंभ बीते वर्षों में गेरुआ नदी में समाहित हो चुके हैं।

भारत-नेपाल के बीच आवागमन के लिए एसएसबी ने जुमनहा, निबिया, पचपकरी और रुपईडीहा में रास्ते खोल रखे हैं। लेकिन इसके बावजूद रुपईडीहा में रेलवे स्टेशन के उस पार, रंजीतबोझा, नेपाल के सैनिक गांव, लक्ष्मनपुर गुलाली, हिरमिनिया, चकिया और अब्दुल्लागंज रेंज के अलावा, मिहींपुरवा, मुर्तिहा, सुजौली और बिछिया क्षेत्र के जंगलों में 32 स्थानों पर पगडंडियां भारत व नेपाल के बीच रास्ता बनाती हैं। इन पगडंडियों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।

डीआईजी गोरखपुर सेक्टर रंजीत सिंह ने कहा कि भारत-नेपाल की खुली सीमा काफी लंबी है। गोरखपुर सेक्टर की सीमा ही 246 किमी तक है। कई स्थानों पर सीमा स्तंभ गायब होने और क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। उन सभी को चिन्हित करने के लिए नेपाल के समन्वय से सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे कार्य पूर्ण कर गायब सीमा स्तंभों को स्थापित करने और क्षतिग्रस्त पिलर को दुरुस्त करने की कार्रवाई होगी।
 

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