फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Shabby buildings life at stake

जर्जर इमारतों में दांव पर जिंदगी

Sun, 12 Jul 2015 10:56 PM IST
बहराइच / अमर उजाला ब्यूरो
बहराइच / अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 12 Jul 2015 10:56 PM IST
विज्ञापन
टपकते आवास और उसमें दांव पर जिंदगी...। कुछ ऐसी ही हालात में जर्जर इमारतों में लोग रहने को मजबूर हैं। जिले के ऐतिहासिक भवन भी अब गिरे कि तब गिरे वाली स्थिति में हैं। दशकों से इनके मरम्मत की सुधि न तो सरकार ने ली है और न प्रशासन ने। अप्रैल माह में आए भूकंप ने जर्जर इमारतों की नींव को और हिला दिया है। अब बारिश तराई को तर-बतर करने लगी है। ऐसे में जर्जर भवन कभी भी जमींदोज हो सकते हैं।
विज्ञापन


शहर के कपूरथला भवन में बंदोबस्त अधिकारी कार्यालय, चकबंदी कार्यालय, पूर्ति कार्यालय के साथ ही कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बने हुए हैं। ये कॉलोनियां पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। दीवानी कचहरी के पास स्थित मकबूल इंडियन क्लब के वर्ष 1923 में बने भवन में आयकर कार्यालय व राजर्षि पुस्तकालय के वर्ष 1985 में बने भवन में मौसम विभाग और पुस्तकालय संचालित है। इन भवनों में निर्माण के बाद कोई मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया है।
विज्ञापन


यही हाल एलआरपी कॉलोनी, प्लानिंग कॉलोनी, विकास भवन कॉलोनी, नगर कोतवाली की पुलिस कॉलोनी, जेल कॉलोनी, जिला अस्पताल परिसर स्थित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आवास, पुराना अस्पताल भवन, फसल अनुसंधान केंद्र, पंचायत कार्यालय भवन, पुलिस लाइन का है। इन भवनों के निर्माण के बाद मरम्मत को छोड़कर अन्य काम नहीं कराए गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले में 1500 निजी भवन जर्जर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नानपारा के राजा सआदत अली, पयागपुर में तस्वीर घर और बेड़नापुर में राजमहल की स्थिति अच्छी नहीं है। गत 25 अप्रैल को नेपाल में आए जोरदार भूकंप के झटकों ने जर्जर इमारतों की नींव को हिला दिया हैै। दीवारों में दरारें आ गईं। उस वक्त प्रशासन ने सिर्फ सर्वे का काम कराया। आज तक जर्जर भवनों की मरम्मत नहीं हुई न नोटिस दिया गया है। सरकारी भवनों व दफ्तरों में कर्मचारी व निजी भवनों में आम आदमी अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर रहने को मजबूर हैं।

केस- एक
वर्ष 2012 में विकास भवन के आस-पास खेल रहे बच्चों की बॉल भवन के छज्जे पर चली गई थी। जिसे उतारने के लिए दो बच्चे छज्जे पर चढ़ गए। इसी दौरान छज्जा भरभराकर ढह गया। इससे दो बच्चों की मौत हो गई थी।

केस- दो
रामगांव में वर्ष वर्ष 2014 में बारिश के दौरान एक मकान भरभराकर ढह गया। मकान के मलबे के नीचे दबकर पिता-पुत्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। उपचार के लिए दोनों को जिला अस्पताल लाया गया। यहां दोनों की मौत हो गई थी।

जान-माल का रहता खतरा
अनुपम गुप्ता ने कहा कि भवन जर्जर हो चुके  हैं। बारिश में छत टपकती है। लेकिन इसके मरम्मत की सुधि नहीं ली जा रही है। चंदन मंडल ने कहा कि बारिश में दीवारों में सीलन आ जाती है। कीमती घरेलू सामान बर्बाद हो रहे हैं। महेश वर्मा ने कहा कि भूकंप आया था तो लगा कि भवन ढह जाएगा। लेकिन बच गया। दीवारों में दरारें हैं। हमेशा गिरने की संभावना बनी रहती है। विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि जब बारिश की मौसम आता है तो भवन के गिरने का डर बढ़ जाता है। लेकिन न तो मकहमा सुधि ले रहा है न प्रशासन।


कराया जाएगा सर्वे
पुरानी इमारतों की जर्जरता के बाबत सूची बनाने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर उनके निर्माण व मरम्मत के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-विद्याशंकर सिंह, अपर जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed