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Bahraich News: सड़क हादसे ने चार गांवों को रुलाया पांच युवकों की मौत से चीख-पुकार

Thu, 27 Nov 2025 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Thu, 27 Nov 2025 01:10 AM IST
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Road accident leaves four villages in tears, with five young men dying in tears.
कार हादसे में पांच लोगों की मौत के बाद रोते परिजन।    -संवाद
बहराइच/बिछिया। लखीमपुर में शारदा नहर के सोती साइफन में कार गिरने से घाघरा बैराज के चार कर्मचारियों और एक युवक की मौत ने चार गांवों को रुला दिया है। हादसे के बाद हर आंख गमगीन है, हर तरफ मातम पसरा हुआ है। हादसे की खबर मिलते ही अपनों से बिछड़ने के गम में घरों में रोने-बिलखने की आवाजें कलेजा चीरती रहीं। गांवों में मातमी सन्नाटा पसरा है और परिजन बदहवास हालत में अपने बेटों और पतियों के अंतिम दर्शन का इंतजार करते रहे।
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रामबृजपुरवा गांव निवासी निवासी सुरेंद्र सोखा का परिवार गिरिजापुरी कॉलोनी में रहता है। उसकी मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अब उनकी पत्नी माया देवी पर आ गई है। माया देवी के सामने अब रेखा (18), रानी (16), पंकज (12) और सिवानी (5) के भविष्य की चिंता सबसे बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो गई है। परिवार रो-रोकर बेसुध है। माया देवी की हालत घटना के बाद अर्धविक्षिप्तों जैसी दिखी।
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सिरसियन पुरवा चहलवा निवासी लालजी साहनी के घर में चीख-पुकार मची हुई है। उनकी मां मिसलेटा ने रोते हुए बताया कि लालजी से पहले उनके पति मेवालाल बैराज में नौकरी करते थे। पति की मौत के बाद पुत्र लालजी को नौकरी मिली थी और अब बेटे की मौत ने परिवार को फिर से बेसहारा कर दिया है। लालजी के परिवार में पत्नी सुमन देवी और तीन बच्चे प्रीति (15), विशाल (12) और राज (10) हैं। परिवार में तीन बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई है, जबकि छोटा भाई कृष्णा भी गम में डूबा है।
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चरसंडा माफी मटेरा निवासी अजीमुल्ला उर्फ खुरचाली का परिवार भी गिरिजापुरी सिंचाई कॉलोनी में रहता है। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें दो बड़े बेटों और एक बेटी की शादी हो चुकी है। दो बड़े बेटे अपने परिवार के साथ पुश्तैनी घर मटेरा में रहते हैं, जबकि वह अपनी पत्नी और दो छोटे बेटों के साथ कॉलोनी में रहते थे। अब छोटे बेटों और पत्नी की सारी जिम्मेदारी अकेले पत्नी पर आ गई है।



तेलागौढ़ी निवासी घनश्याम की मौत से गांव में परिवार बेहद दुखी है। उसके पिता बुल्लू की भी बैराज पर ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद संवेदनात्मक नियुक्ति पर घनश्याम को नौकरी मिली थी। दो साल पहले घनश्याम की शादी हुई थी। वह अपनी पत्नी ललिता, वृद्ध मां अशरफी देवी, बहन माधुरी (18) और बेटी हर्षिता (4 माह) को छोड़ गया है। अब परिवार को संभालने वाला कोई नहीं बचा है।





हादसे में तेलागौढ़ी गांव के जितेंद्र की मौत ने उसके परिवार को तोड़कर रख दिया है। उसके पिता विपिन बिहारी बैराज पर एक झोपड़ी में बाटी-चोखा बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं। जितेंद्र के बड़े भाई रविंद्र और सतेंद्र शादीशुदा हैं और वे परिवार से अलग रहते हैं। बड़ी बहन ज्ञानवती और उससे छोटी बहन गीता (20) भाई की मौत के बाद बदहवास हैं।


भाई सतेंद्र ने बताया कि जितेंद्र गोरखपुर से आईटीआई कर रहा था और हाल ही में उसने पासपोर्ट बनवाया था, वह विदेश जाकर नौकरी करने की तैयारी में था। उसकी मौत ने परिवार का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है।
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