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राप्ती बनी देश में नेपाली तस्करों का प्रवेश द्वार
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 29 Nov 2015 10:12 PM IST
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नेपाली तस्करों के लिए राप्ती नदी भारत में घुसने का आसान जरिया बन गई है। तस्कर नाव के सहारे बड़ी आसानी से भारत में माल खपा रहे हैं। देश से भी कई सामानों की तस्करी नेपाल में की जा रही है। सारा कारोबार नौकाओं से होता है। ये नौकाएं नेपाल से चलकर जिला मुख्यालय की सीमा तक बिना रुकावट पहुंचती हैं।
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राप्ती नदी नेपाल से निकलकर भारतीय सीमा में ककरदरी गांव के पास प्रवेश करती है। नदी के इस रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग नौकाओं से आवागमन करते हैं। इसी का फायदा नेपाल सहित भारतीय क्षेत्र के तस्कर उठा रहे हैं।
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प्रतिदिन राप्ती नदी के रास्ते जिले में लाखों रुपये का अवैध कारोबार तस्करी के माध्यम से होता है। इन तस्करी के सामानों में विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल होने वाला नौसादर व गंधक भी शामिल है। जानकारों की माने तो नेपाल क्षेत्र के मटहिया, भगवानपुर, होलिया व चौखेरी में तस्करों ने अड्डा जमा रखा है।
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यहां इन्होंने घाट भी बनाया है। नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से आया तस्करी का सामान इन्हीं घटों पर जमा होता है। इसके बाद यहीं से नौकाओं के माध्यम से सामान भारतीय क्षेत्र के दयाली, परसा, लौकिहा, मधवापुर व पिपरहवा घाट पर प्रतिदिन उतारा जाता है।
कुछ नोकाएं जिला मुख्यालय की सीमा तक प्रवेश करती हैं। राप्ती नदी पर कोई जांच की चौकी नहीं है। इस कारण तस्कर धड़ल्ले से तस्करी में जुटे हुए हैं।