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Bahraich News: टूटते रिश्ते बचाने में रुचि नहीं ले रही पुलिस
Sat, 11 Mar 2023 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 11 Mar 2023 11:40 PM IST
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श्रावस्ती। सोशल मीडिया का बढ़ता दायरा और घर में फोन पर सिमटते संसार के कारण गृहस्थ जीवन में जहर घुलता जा रहा है। जरा-जरा सी बातों को लेकर पति पत्नी घर की दहलीज लांघकर थाने पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों को अभी तक पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में सुलझाया जाता था। अब धीरे-धीरे यह व्यवस्था शिथिल पड़ गई।
अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब इस केंद्र में मात्र चार मामले ही बचे हैं। अब छोटे पारिवारिक विवादों के लिए कोई समझौता केंद्र न होने के कारण पीड़ित न्यायालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। टूट रहे रिश्तों को बिखरने से बचाने के लिए वर्ष 2019 में पुलिस परामर्श केंद्र की स्थापना जिले में हुई थी। यहां पूरे जिले से टूट रहे परिवारों के मामले आने लगे। धीरे-धीरे यहां अधिकारियों ने रुचि दिखाई तो काउंसलरों ने टूटते परिवार की डोर को पुन: जोड़ने का काम किया। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर 2021 तक जिले में 779 परिवारों को टूटने से बचा लिया गया। इसके बाद भी यह क्रम कुछ धीरे धीरे चलता रहा। पहले प्रत्येक रविवार को टूटने के कगार पर पहुंच चुके परिवारों को एक मंच मिलता रहा। अधिकारियों ने भी ऐसे फरियादियों को सुन कर इस केंद्र पर भेजना प्रारंभ कर दिया, ताकि मुकदमेबाजी से पहले वह अपने टूटे संबंधों को बचा सके। धीरे-धीरे यहां मामले ज्यादा हो गए, लेकिन अधिकारियों की रुचि कम होती चली गई। अब स्थिति यह है कि पीड़ित समय पर आ जाते है, लेकिन विपक्षी आते ही नहीं। जबकि विपक्षी को केंद्र भेजने की जिम्मेदारी थाना प्रभारियों को दी गई थी। ऐसे में कई नोटिसों के बाद भी विपक्षी के न आने से पीड़िताओं के हौसले पस्त हो गए। अब हालात यह है कि जहां इस परामर्श केंद्र पर पहले प्रतिदिन पांच से दस परिवारों को जोड़ा जाता था। वहीं अब यहां परामर्श के लिए मात्र चार मामले ही बचे है। इसमें भी विपक्षी समझौता वार्ता के लिए आने को तैयार नहीं है।
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अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब इस केंद्र में मात्र चार मामले ही बचे हैं। अब छोटे पारिवारिक विवादों के लिए कोई समझौता केंद्र न होने के कारण पीड़ित न्यायालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। टूट रहे रिश्तों को बिखरने से बचाने के लिए वर्ष 2019 में पुलिस परामर्श केंद्र की स्थापना जिले में हुई थी। यहां पूरे जिले से टूट रहे परिवारों के मामले आने लगे। धीरे-धीरे यहां अधिकारियों ने रुचि दिखाई तो काउंसलरों ने टूटते परिवार की डोर को पुन: जोड़ने का काम किया। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर 2021 तक जिले में 779 परिवारों को टूटने से बचा लिया गया। इसके बाद भी यह क्रम कुछ धीरे धीरे चलता रहा। पहले प्रत्येक रविवार को टूटने के कगार पर पहुंच चुके परिवारों को एक मंच मिलता रहा। अधिकारियों ने भी ऐसे फरियादियों को सुन कर इस केंद्र पर भेजना प्रारंभ कर दिया, ताकि मुकदमेबाजी से पहले वह अपने टूटे संबंधों को बचा सके। धीरे-धीरे यहां मामले ज्यादा हो गए, लेकिन अधिकारियों की रुचि कम होती चली गई। अब स्थिति यह है कि पीड़ित समय पर आ जाते है, लेकिन विपक्षी आते ही नहीं। जबकि विपक्षी को केंद्र भेजने की जिम्मेदारी थाना प्रभारियों को दी गई थी। ऐसे में कई नोटिसों के बाद भी विपक्षी के न आने से पीड़िताओं के हौसले पस्त हो गए। अब हालात यह है कि जहां इस परामर्श केंद्र पर पहले प्रतिदिन पांच से दस परिवारों को जोड़ा जाता था। वहीं अब यहां परामर्श के लिए मात्र चार मामले ही बचे है। इसमें भी विपक्षी समझौता वार्ता के लिए आने को तैयार नहीं है।
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