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गन्ना किसानों का सवा अरब बकाया, दो मिलों को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 28 Jan 2016 09:53 PM IST
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बहराइच। लगातार चौथे साल गन्ने का रेट न बढ़ाकर प्रदेश सरकार ने किसानों को छला और अब शुगर मिलें किसानों को पाई-पाई के लिए मोहताज बना रही हैं।
जिले की चारों शुगर मिलों पर किसानों के गन्ना तौल का एक अरब 29 करोड़ रुपये बकाया है। निजी चीनी मिलों में सर्वाधिक बकाया 71 करोड़ रुपये सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया मिल पर है। वहीं, जरवलरोड दूसरे नंबर पर है। दोनों मिलों को गन्ना विभाग ने नोटिस जारी किया है।
जिले की चारों शुगर मिलें सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया, पारलेजी परसेंडी, श्रावस्ती किसान सहकारी चीनी मिल नानपारा व आईपीएल जरवलरोड मिल ने 27 जनवरी तक 65 लाख 29 हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की है। बावजूद इसके किसान गाढ़ी कमाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
सट्टा नीति के अनुसार 14 दिन पूर्व तक मिलों पर एक अरब 29 करोड़ 49 लाख छह हजार रुपये की बकाएदारी हो गई है। सर्वाधिक 71 करोड़ 14 लाख एक हजार रुपये सिंभावली शुगर मिल गन्ना किसानों का दबाए बैठी है। दूसरे पायदान पर श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल नानपारा हैं।
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इस मिल पर 22 करोड़ 44 लाख 69 हजार की बकाएदारी है। वहीं 19 करोड़ 77 लाख 15 हजार रुपये पर कुंडली मारकर बैठी जरवलरोड चीनी मिल तीसरे पायदान पर है।
परसेंडी चीनी मिल पर भी 16 करोड़ 13 लाख 21 हजार रुपये बकाया है। दोनों ही निजी मिली चिलवरिया और जरवलरोड को किसानों का भुगतान न करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
जिला गन्ना अधिकारी राम किशुन ने बताया कि चिलवरिया व जरवलरोड के मिल प्रबंधक को नोटिस जारी कर किसानों को बकाया तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया है। जवाब भी मांगा गया है।
चिलवरिया मिल पर 49 करोड़ रुपये पिछला बकाया
सिंभावली शुगर मिल की आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। यहां के करीब 26 हजार किसान प्रभावित हैं। कारण मिल पर पिछले पेराई सत्र का अभी तक 49 करोड़ 74 लाख 95 हजार रुपये का बकाया है।
गन्ना आयुक्त मिल को नोटिस भी जारी कर चुके हैं लेकिन अभी तक बकाएदारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। फिलहाल मिल ने इस साल सबसे पहले 29 नवंबर को मिल संचालित कर दो करोड़ 94 लाख 6 हजार रुपये चुकता किया है, लेकिन यह बकाएदारी पिछले साल की है।
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जिले की चारों शुगर मिलों पर किसानों के गन्ना तौल का एक अरब 29 करोड़ रुपये बकाया है। निजी चीनी मिलों में सर्वाधिक बकाया 71 करोड़ रुपये सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया मिल पर है। वहीं, जरवलरोड दूसरे नंबर पर है। दोनों मिलों को गन्ना विभाग ने नोटिस जारी किया है।
जिले की चारों शुगर मिलें सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया, पारलेजी परसेंडी, श्रावस्ती किसान सहकारी चीनी मिल नानपारा व आईपीएल जरवलरोड मिल ने 27 जनवरी तक 65 लाख 29 हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की है। बावजूद इसके किसान गाढ़ी कमाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
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सट्टा नीति के अनुसार 14 दिन पूर्व तक मिलों पर एक अरब 29 करोड़ 49 लाख छह हजार रुपये की बकाएदारी हो गई है। सर्वाधिक 71 करोड़ 14 लाख एक हजार रुपये सिंभावली शुगर मिल गन्ना किसानों का दबाए बैठी है। दूसरे पायदान पर श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल नानपारा हैं।
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इस मिल पर 22 करोड़ 44 लाख 69 हजार की बकाएदारी है। वहीं 19 करोड़ 77 लाख 15 हजार रुपये पर कुंडली मारकर बैठी जरवलरोड चीनी मिल तीसरे पायदान पर है।
परसेंडी चीनी मिल पर भी 16 करोड़ 13 लाख 21 हजार रुपये बकाया है। दोनों ही निजी मिली चिलवरिया और जरवलरोड को किसानों का भुगतान न करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
जिला गन्ना अधिकारी राम किशुन ने बताया कि चिलवरिया व जरवलरोड के मिल प्रबंधक को नोटिस जारी कर किसानों को बकाया तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया है। जवाब भी मांगा गया है।
चिलवरिया मिल पर 49 करोड़ रुपये पिछला बकाया
सिंभावली शुगर मिल की आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। यहां के करीब 26 हजार किसान प्रभावित हैं। कारण मिल पर पिछले पेराई सत्र का अभी तक 49 करोड़ 74 लाख 95 हजार रुपये का बकाया है।
गन्ना आयुक्त मिल को नोटिस भी जारी कर चुके हैं लेकिन अभी तक बकाएदारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। फिलहाल मिल ने इस साल सबसे पहले 29 नवंबर को मिल संचालित कर दो करोड़ 94 लाख 6 हजार रुपये चुकता किया है, लेकिन यह बकाएदारी पिछले साल की है।