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नेपाली हाथियों ने कुचली फसल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jul 2016 10:24 PM IST
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में गेरुआपार भरथापुर गांव के निकट पहुंचे हाथियों के झुंड ने चिंघाड़ते हुए गुरुवार रात किसानों की 40 बीघा धान, गन्ना और हल्दी की फसल को रौंद दिया। झुंड के गांव की ओर बढ़ने के दौरान हाका लगाकर ग्रामीणों ने किसी तरह जंगल की ओर मोड़ा।
दहशत के चलते पूरी रात ग्रामीण सो नहीं सके। सूचना के बावजूद रेंज कार्यालय से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। कतर्नियाघाट रेंज क्षेत्र में गेरुआ नदी के पार भरथापुर गांव स्थित है। गांव के निकट खाता कारीडोर से होकर वन्यजीव नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मध्य आवागमन करते हैं।
गुरुवार रात करीब 11:30 बजे हाथियों की चिंघाड़ से ग्रामीणों की नींद खुल गई। ग्रामीण एकत्र होकर हाका लगाने लगे। लेकिन तब तक हाथियों का झुंड राजेश के हल्दी और धान के खेत में पहुंच गया। हाथियों की संख्या पांच-छह थी। हल्दी और धान के खेतों को रौंदते हुए गन्ने के खेत में भी हाथियों ने उत्पात मचाया।
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इसके बाद सुरेश के खेत में झुंड घुस गया। बदलू व रामकुमार के खेतों में भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया। झुंड जब गांव की ओर बढ़ रहा था तो ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए ढोल पीटना शुरू किया। मशाल जलाए। इस पर हाथी जंगल की ओर मुड़े।
करीब ढाई घंटे तक हाथी खेत में जमा रहे। इससे पूरी रात ग्रामीणों ने जागकर बिताई। ग्रामीणों के मुताबिक रात में ही रेंज कार्यालय पर सूचना दी गई लेकिन कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है।
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दहशत के चलते पूरी रात ग्रामीण सो नहीं सके। सूचना के बावजूद रेंज कार्यालय से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। कतर्नियाघाट रेंज क्षेत्र में गेरुआ नदी के पार भरथापुर गांव स्थित है। गांव के निकट खाता कारीडोर से होकर वन्यजीव नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मध्य आवागमन करते हैं।
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गुरुवार रात करीब 11:30 बजे हाथियों की चिंघाड़ से ग्रामीणों की नींद खुल गई। ग्रामीण एकत्र होकर हाका लगाने लगे। लेकिन तब तक हाथियों का झुंड राजेश के हल्दी और धान के खेत में पहुंच गया। हाथियों की संख्या पांच-छह थी। हल्दी और धान के खेतों को रौंदते हुए गन्ने के खेत में भी हाथियों ने उत्पात मचाया।
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इसके बाद सुरेश के खेत में झुंड घुस गया। बदलू व रामकुमार के खेतों में भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया। झुंड जब गांव की ओर बढ़ रहा था तो ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए ढोल पीटना शुरू किया। मशाल जलाए। इस पर हाथी जंगल की ओर मुड़े।
करीब ढाई घंटे तक हाथी खेत में जमा रहे। इससे पूरी रात ग्रामीणों ने जागकर बिताई। ग्रामीणों के मुताबिक रात में ही रेंज कार्यालय पर सूचना दी गई लेकिन कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है।