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नेपाल नहीं करेगा बाघ को ट्रैंकुलाइज, हटाएं कैमरे
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बहराइच। एक बाघ कतर्नियाघाट और नेपाल के नागरिकों को बीते माह से निवाला बना रहा है। नेपाल ने बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए कैमरे लगवाए थे। वन विभाग ने सीमा उल्लंघन का हवाला देकर इसका विरोध किया। गत दिवस सीमा सुरक्षा बल और वन विभाग ने नेपाल सरकार से वार्ता की। इसके बाद नेपाल ने बाघ को ट्रैंकुलाइज करने से मना करते हुए क्षेत्र में लगाए कैमरे हटवा लिए।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज में एक बाघ ने अगस्त माह में मां-बेटी समेत चार लोगों को निवाला बनाया था। इसके साथ ही बाघ ने नेपाल के नागरिकों को भी अपना शिकार बनाया। इसे देखते हुए नेपाल बर्दिया जिला प्रशासन व वन विभाग की टीम ने बाघ को ट्रैंकुलाइज करने का निर्देश दिया था।
इसके लिए कतर्नियाघाट जंगल के आसपास के क्षेत्र में बाघ पर नजर रखने के लिए खाता कारीडोर क्षेत्र में कैमरे लगवा दिए थे। इस जानकारी पर डीएफओ यशवंत सिंह ने हफ्ते भर पूर्व भारत-नेपाल सीमा का दौरा किया। जहां पर कतर्नियाघाट जंगल के निकट 200 मीटर के परिक्षेत्र में कैमरा लगाए जाने का विरोध किया था।
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वन विभाग के विरोध पर नेपाल प्रशासन ने कैमरे हटवा लिए। डीएफओ यशवंत सिंह ने बताया कि बाघ को ट्रैंकुलाइज नहीं करने के लिए एसएसबी के साथ नेपाल प्रशासन से वार्ता की गई। साथ ही पशु विशेषज्ञ को वार्ता के लिए भेजा गया। वार्ता के दौरान नेपाल प्रशासन ने बाघ को ट्रैंकुलाइज न करने की बात कही है। इससे वन विभाग ने राहत की सांस ली।
टीम ने की वार्ता, हटवा दिए सभी कैमरे
नेपाल प्रशासन ने बाघ पर नजर रखने के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए थे। ट्रैंकुलाइज करने के लिए बाघ पर नजर रख रहे थे। इसके लिए डॉ. सर्वेश राय को विशेषज्ञ बनाकर भेजा गया। वार्ता के बाद प्रशासन ने नेपाल क्षेत्र में लगे सभी कैमरे को हटा दिया है। अब वन्यजीव क्षेत्र में आ जाकर विचरण कर सकते हैं।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज में एक बाघ ने अगस्त माह में मां-बेटी समेत चार लोगों को निवाला बनाया था। इसके साथ ही बाघ ने नेपाल के नागरिकों को भी अपना शिकार बनाया। इसे देखते हुए नेपाल बर्दिया जिला प्रशासन व वन विभाग की टीम ने बाघ को ट्रैंकुलाइज करने का निर्देश दिया था।
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इसके लिए कतर्नियाघाट जंगल के आसपास के क्षेत्र में बाघ पर नजर रखने के लिए खाता कारीडोर क्षेत्र में कैमरे लगवा दिए थे। इस जानकारी पर डीएफओ यशवंत सिंह ने हफ्ते भर पूर्व भारत-नेपाल सीमा का दौरा किया। जहां पर कतर्नियाघाट जंगल के निकट 200 मीटर के परिक्षेत्र में कैमरा लगाए जाने का विरोध किया था।
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वन विभाग के विरोध पर नेपाल प्रशासन ने कैमरे हटवा लिए। डीएफओ यशवंत सिंह ने बताया कि बाघ को ट्रैंकुलाइज नहीं करने के लिए एसएसबी के साथ नेपाल प्रशासन से वार्ता की गई। साथ ही पशु विशेषज्ञ को वार्ता के लिए भेजा गया। वार्ता के दौरान नेपाल प्रशासन ने बाघ को ट्रैंकुलाइज न करने की बात कही है। इससे वन विभाग ने राहत की सांस ली।
टीम ने की वार्ता, हटवा दिए सभी कैमरे
नेपाल प्रशासन ने बाघ पर नजर रखने के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए थे। ट्रैंकुलाइज करने के लिए बाघ पर नजर रख रहे थे। इसके लिए डॉ. सर्वेश राय को विशेषज्ञ बनाकर भेजा गया। वार्ता के बाद प्रशासन ने नेपाल क्षेत्र में लगे सभी कैमरे को हटा दिया है। अब वन्यजीव क्षेत्र में आ जाकर विचरण कर सकते हैं।