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Bahraich News: भवानीपुर पहुंचीं पक्की ईंटें, हुआ स्वागत
Sat, 28 Jan 2023 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 28 Jan 2023 12:05 AM IST
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मोतीपुर(बहराइच)। देश को आजादी मिलने के बाद भी मोतीपुर तहसील के चार वनग्रामवासी गुलामों की तरह ही जिदंगी जीने को विवश थे। ग्रामीणों को अपने गांव में पक्का निर्माण कराने की इजाजत नहीं थी। पक्की सड़कें व बिजली तो ग्रामीणों के लिए सपना था। बीते दिनों इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला तो खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद गणतंत्र दिवस के मौके पर जब भवानीपुुर गांव में पहली बार पक्की ईंटों की खेप पहुंची तो महिलाओं ने परछन कर नई बहू की तरह इनका स्वागत किया। इन ईंटों से पुत्तीलाल पक्का आवास बनवाएंगे। इस दौरान पूरा गांव संविधान जिंदाबाद, वन अधिकार कानून जिंदाबाद के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। तहसील मोतीपुर के वनग्राम भवानीपुर, बिछिया, टेड़ियाढकिया व गोकुलपुर के लोग देश को आजादी मिलने के बाद भी गुलामों की तरह जिंदगी जीने को विवश थे। 1903 के गजेटियर के अनुसार, 1891 में इन गांवों को वन क्षेत्र में शामिल किया गया था। तभी से इन गांवों का प्रबंधन वन विभाग के हाथों में चल रहा था। वन भूमि होने की वजह से यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे। ग्रामवासी अपने गांव में पक्का आवास नहीं बनवा सकते थे। पक्के स्कूल, शौचालय, बिजली व सड़कें ग्रामवासियों के लिए सपना थे। भवानीपुर गांव घने जंगल के बीच होने के चलते यहां के बच्चे जंगली रास्तों से होकर तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में बच्चों के सामने जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता था। ग्रामीण वन अधिकार आंदोलन के तहत गांवों की आजादी को लेकर संघर्ष कर रहे थे। ग्रामीणों के 75 वर्ष तक चले लंबे संघर्ष के बाद आठ जनवरी, 2022 को प्रदेश के राज्यपाल ने अधिसूचना जारी करते हुए ऐसे गांवों को राजस्वग्राम में परिवर्तित कर विकास की जरूरत बताई। ग्रामीणों के लिए ऐतिहासिक घड़ी बृहस्पतिवार को तब आई जब भवानीपुर गांव निवासी पुत्तीलाल पक्का आवास बनवाने के लिए ईंटों की खेप लेकर पंहुचे।
कच्चे मकान में रहने व खेती का ही था अधिकार
सामाजिक कार्यकर्ता व वन अधिकार आंदोलन के अगुवाकार जंग हिंदुस्तानी का कहना है कि वन अधिकार कानून 2006 की धारा 3(1)(क) के तहत वनग्राम वासियों को निवास व खेती का ही अधिकार दिया गया था। ग्रामीण कच्चे मकानों में ही निवास कर खेती के माध्यम से जीवकोपार्जन करते थे।
...............
15 नवंबर को मुख्यमंत्री ने सौंपा था अधिकार पत्र
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 नवंबर, 2022 को भवानीपुर गांव निवासी पुत्तीलाल, माता प्रसाद, जबदीश व मनीराम को सोनभद्र आमंत्रित कर अधिकार पत्र सौंपा था। अधिकार पत्र मिलने के बाद जब 19 जनवरी को पहली बार पुत्तीलाल पक्के आवास के निर्माण के लिए ईंट की खेप लेकर गांव जा रहे थे तो वन विभाग की ओर से बैरियर पर रोक दिया गया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने चूल्हाबंदी आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, डीएम डाॅ. दिनेश चंद्र के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन वापस ले लिया था। डीएम के प्रयास के बाद वन विभाग की ओर से पुत्तीलाल को ईंट गांव ले जाने की सहमति प्रदान कर दी गई थी।
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अधिकार पत्र मिलने के बाद ग्रामीण अब पक्के मकान बनवा सकेंगे। गांवों में सरकार की ओर से पक्के शौचालय, बच्चों के लिए विद्यालय, बिजली व पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होने लगेंगी।वनग्रामों को राजस्व ग्राम में शामिल करने की घोषणा के बाद भावरनीपुर व टेड़िया ढकिया में प्राथमिक विद्यालय के निर्माण के लिए भूमि का चिह्नीकरण कर लिया गया है। बजट का आवंटन होते ही विद्यालय भवन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
वनग्रामों में निवास कर रहे ग्रामीण सरोज गुप्ता, फरीद अंसारी, सोनू खान, फूलमती, नंदकिशोर, बालकराम, मीरादेवी, रामलखन, रामनिवास आदि ने बताया कि उन्हें अब पूर्ण रूप से आजादी मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि 75 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद खुले में सांस लेने जैसा महसूस कर रहे हैं।
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कच्चे मकान में रहने व खेती का ही था अधिकार
सामाजिक कार्यकर्ता व वन अधिकार आंदोलन के अगुवाकार जंग हिंदुस्तानी का कहना है कि वन अधिकार कानून 2006 की धारा 3(1)(क) के तहत वनग्राम वासियों को निवास व खेती का ही अधिकार दिया गया था। ग्रामीण कच्चे मकानों में ही निवास कर खेती के माध्यम से जीवकोपार्जन करते थे।
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15 नवंबर को मुख्यमंत्री ने सौंपा था अधिकार पत्र
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 नवंबर, 2022 को भवानीपुर गांव निवासी पुत्तीलाल, माता प्रसाद, जबदीश व मनीराम को सोनभद्र आमंत्रित कर अधिकार पत्र सौंपा था। अधिकार पत्र मिलने के बाद जब 19 जनवरी को पहली बार पुत्तीलाल पक्के आवास के निर्माण के लिए ईंट की खेप लेकर गांव जा रहे थे तो वन विभाग की ओर से बैरियर पर रोक दिया गया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने चूल्हाबंदी आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, डीएम डाॅ. दिनेश चंद्र के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन वापस ले लिया था। डीएम के प्रयास के बाद वन विभाग की ओर से पुत्तीलाल को ईंट गांव ले जाने की सहमति प्रदान कर दी गई थी।
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अधिकार पत्र मिलने के बाद ग्रामीण अब पक्के मकान बनवा सकेंगे। गांवों में सरकार की ओर से पक्के शौचालय, बच्चों के लिए विद्यालय, बिजली व पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होने लगेंगी।वनग्रामों को राजस्व ग्राम में शामिल करने की घोषणा के बाद भावरनीपुर व टेड़िया ढकिया में प्राथमिक विद्यालय के निर्माण के लिए भूमि का चिह्नीकरण कर लिया गया है। बजट का आवंटन होते ही विद्यालय भवन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
वनग्रामों में निवास कर रहे ग्रामीण सरोज गुप्ता, फरीद अंसारी, सोनू खान, फूलमती, नंदकिशोर, बालकराम, मीरादेवी, रामलखन, रामनिवास आदि ने बताया कि उन्हें अब पूर्ण रूप से आजादी मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि 75 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद खुले में सांस लेने जैसा महसूस कर रहे हैं।