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लक्कड़शाह दरगाह : कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के लिए लगाई रोक
Sat, 14 Jun 2025 02:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 14 Jun 2025 02:54 AM IST
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कतर्नियाघाट जंगल के बीचो बीच लक्कड़ शाह की मजार पर कार्रवाई के बाद पड़ा मलबा।
बहराइच। लक्कड़शाह दरगाह मामले में किसी भी अग्रिम कार्रवाई करने पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। यह आदेश दरगाह प्रबंधन के सचिव की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया है। याचिका में सचिव ने दावा किया था कि डीएफओ की सुनवाई के बाद उन्हें अपील का समय नहीं मिला और विभाग ने दरगाह पर तोड़फोड़ शुरू कर दी।
कतर्नियाघाट जंगल के बीच बनी लक्कड़शाह दरगाह को वन विभाग ने अवैध निर्माण करार देते हुए कुछ दिन पूर्व ही ध्वस्त कर दिया था। इसी के बाद दरगाह प्रबंधन की ओर से सचिव मोहम्मद हाशिम शाह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसकी सुनवाई के दौरान दरगाह प्रबंधन ने कहा कि डीएफओ ने जिस दिन ऑर्डर किया और तत्काल दरगाह पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। जबकि उसे अग्रिम कोर्ट में अपील करने का मौका मिलना चाहिए था।
कोर्ट में सरकार की ओर से मौजूद अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि वन विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण शुरू किया गया था, जिसे रोक दिया गया है। इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। आश्वासन दिया है कि चार सप्ताह तक दरगाह प्रबंधन के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्हें इस मामले में अपील करने का पूरा अधिकार व स्वतंत्रता है।
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इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि दरगाह प्रबंधन अपील करता है, तो उस पर तेजी से सुनवाई की जाए। हालांकि जिस दरगाह के मामले को लेकर प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वहां अब दरगाह के नाम पर केवल मलबा ही बचा है। जिसे अब चार सप्ताह तक हटाया नहीं जा सकता।
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कतर्नियाघाट जंगल के बीच बनी लक्कड़शाह दरगाह को वन विभाग ने अवैध निर्माण करार देते हुए कुछ दिन पूर्व ही ध्वस्त कर दिया था। इसी के बाद दरगाह प्रबंधन की ओर से सचिव मोहम्मद हाशिम शाह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसकी सुनवाई के दौरान दरगाह प्रबंधन ने कहा कि डीएफओ ने जिस दिन ऑर्डर किया और तत्काल दरगाह पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। जबकि उसे अग्रिम कोर्ट में अपील करने का मौका मिलना चाहिए था।
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कोर्ट में सरकार की ओर से मौजूद अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि वन विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण शुरू किया गया था, जिसे रोक दिया गया है। इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। आश्वासन दिया है कि चार सप्ताह तक दरगाह प्रबंधन के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्हें इस मामले में अपील करने का पूरा अधिकार व स्वतंत्रता है।
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इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि दरगाह प्रबंधन अपील करता है, तो उस पर तेजी से सुनवाई की जाए। हालांकि जिस दरगाह के मामले को लेकर प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वहां अब दरगाह के नाम पर केवल मलबा ही बचा है। जिसे अब चार सप्ताह तक हटाया नहीं जा सकता।