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कायमपुर गांव नदी में समाया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Aug 2016 10:49 PM IST
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बाढ़ का कहर
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा के जलस्तर में गिरावट के साथ तेज हुई कटान के चलते महसी क्षेत्र का कायमपुर गांव मंगलवार भोर नदी में समा गया। गोलांगज और कैसरगंज में भी कटान तेज हो गई है। वहीं महसी का कहारनपुरवा गांव अब नदी के निशाने पर आ गया है। 28 मकान और 110 बीघा खेत कटान की भेंट चढ़ गए हैं।
पीड़ित ग्रामीणों ने तहसील को सूचना दी लेकिन मंगलवार शाम तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए। ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। लोग अपने आशियाने उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। घाघरा की लहरों का कहर महसी तहसील क्षेत्र में तेज हो गया है।
मंगलवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.356 मीटर मापा गया। नदी अभी भी लाल निशान के ऊपर है। जलस्तर में हो रही गिरावट के चलते कटान बढ़ी है। महसी तहसील का कायमपुर गांव घाघरा में समा चुका है।
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इस गांव में 74 मकान थे जो 25 दिनों से जारी कटान के चलते एक-एक कर नदी में समाहित हो गए। सोमवार रात गांव निवासी सांवल प्रसाद, नियामत अली, रुखसाना, प्रमोद कुमार के मकान कटान में विलीन हो गए। इसके साथ गांव का अस्तित्व खत्म हो गया है। ग्रामीणों ने आधी अधूरी गृहस्थी समेटकर तटबंध पर शरण ली।
उधर गोलागंज-कहारनपुरवा आरसीसी मार्ग भी आधे से अधिक नदी में समाहित हो गया है। इसके चलते तटबंध के उस पार बसे ग्रामीणों का आवागमन भी दुश्वार हो गया है। क्षेत्र का कहारनपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव निवासी रमेश, प्रेम कुमार, नगेश्वर, दिनेश, अयोध्या प्रसाद, बबलू, कमलेश, झब्बू, लाला, जयंकर, मदनलाल, बचनू, कोयली, ननकऊ, राजू आदि के मकान कटान में समाहित हो गए हैं। कैसरगंज के गोड़हिया नई आबादी गांव का अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है।
इससे ग्रामीणों में हड़कंप की स्थिति है। सूचना के बावजूद राहत और कटान निरोधक उपाय नहीं हुए हैं। जैसे-तैसे ग्रामीण स्वयं आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।
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पीड़ित ग्रामीणों ने तहसील को सूचना दी लेकिन मंगलवार शाम तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए। ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। लोग अपने आशियाने उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। घाघरा की लहरों का कहर महसी तहसील क्षेत्र में तेज हो गया है।
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मंगलवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.356 मीटर मापा गया। नदी अभी भी लाल निशान के ऊपर है। जलस्तर में हो रही गिरावट के चलते कटान बढ़ी है। महसी तहसील का कायमपुर गांव घाघरा में समा चुका है।
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इस गांव में 74 मकान थे जो 25 दिनों से जारी कटान के चलते एक-एक कर नदी में समाहित हो गए। सोमवार रात गांव निवासी सांवल प्रसाद, नियामत अली, रुखसाना, प्रमोद कुमार के मकान कटान में विलीन हो गए। इसके साथ गांव का अस्तित्व खत्म हो गया है। ग्रामीणों ने आधी अधूरी गृहस्थी समेटकर तटबंध पर शरण ली।
उधर गोलागंज-कहारनपुरवा आरसीसी मार्ग भी आधे से अधिक नदी में समाहित हो गया है। इसके चलते तटबंध के उस पार बसे ग्रामीणों का आवागमन भी दुश्वार हो गया है। क्षेत्र का कहारनपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव निवासी रमेश, प्रेम कुमार, नगेश्वर, दिनेश, अयोध्या प्रसाद, बबलू, कमलेश, झब्बू, लाला, जयंकर, मदनलाल, बचनू, कोयली, ननकऊ, राजू आदि के मकान कटान में समाहित हो गए हैं। कैसरगंज के गोड़हिया नई आबादी गांव का अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है।
इससे ग्रामीणों में हड़कंप की स्थिति है। सूचना के बावजूद राहत और कटान निरोधक उपाय नहीं हुए हैं। जैसे-तैसे ग्रामीण स्वयं आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।