फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Katnaniaghat Wildlife Sanctuary will be closed from tomorrow

कल से बंद हो जाएगा कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार

Tue, 13 Jun 2017 10:14 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Tue, 13 Jun 2017 10:14 PM IST
विज्ञापन
Katnaniaghat Wildlife Sanctuary will be closed from tomorrow
झारखंड और छत्तीसगढ़ के जंगलों से विंढमगंज क्षेत्र में घुस आया हाथी फसल नष्ट करता हुआ।
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार के दीदार पर 15 जून से प्रतिबंध लग जाएगा, जिससे संरक्षित वन क्षेत्र में पर्यटक भ्रमण नहीं कर सकेंगे। हालांकि इस बार वन विभाग ने पर्यटकों को मामूली राहत दी है। वन्यजीव अभ्यारण्य बंद होने के बावजूद अगर आपका मूड कतर्निया की सैर का है तो निराश नहीं होना पड़ेगा। रेस्ट हाउस तक जा सकते हैं, लेकिन घने जंगल में प्रवेश वर्जित रहेगा। पर्यटक घड़ियाल सेंटर और गेरुआ नदी के तट का भी लुत्फ ले सकेंगे। 15 नवंबर से पुन: वन्य जीव विहार सामान्य तरीके से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
विज्ञापन

 
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस वन क्षेत्र में सात रेंज हैं। इनमें कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा व मुर्तिहा रेंजों में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ, काकड़, पाढ़ा, बारहसिंघा, गैंडे, हाथी समेत कई वन्य जीव विहार करते हैं।
विज्ञापन


जंगल के बीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में डाल्फिन की उछलकूद पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। घड़ियाल भी काफी संख्या में नदी के टॉपुओं पर रोमांचित करते हैं, लेकिन बरसात की आहट के चलते वन्यजीव विहार में भ्रमण पर 15 जून से हर साल की तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। हालांकि पर्यटकों की आमद को देखते हुए वन विभाग ने पर्यटकों को थोेड़ी सहूलियत दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बार जंगल बंद होने के बावजूद अगर आपका मूड कतर्निया की सैर का है तो मोतीपुर, ककरहा और कतर्नियाघाट रेस्ट हाउस पहुंचकर ठहर सकेंगे। वहीं पर जंगल की प्राकृतिक छटा भी देख सकेंगे। लेकिन जंगल के अंदर और बाघ जोन में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। हां, कतर्नियाघाट में स्थित घड़ियाल सेंटर और गेरुआ नदी के तट पर जरूर सैर कर सकेंगे, लेकिन बोटिंग नहीं कर सकेंगे।

कतर्नियाघाट के वनक्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि बरसात के महीने में जंगल में बने शेड खराब हो जाते हैं। रास्ते भी झाड़-झंखाड़ व जंगली घास से अवरुद्ध रहते हैं। जंगल के रास्तों पर कीचड़ और पानी पानी भर जाता है। वन्य जीवों के हमले का खतरा रहता है, जिससे आवागमन में परेशानी होती है।

गेरुआ नदी में पानी अधिक होने से बोटिंग करने में भी खतरा रहता है। जिसके चलते प्रति वर्ष पांच महीने तक पर्यटकों के भ्रमण पर अंकुश लगा दिया जाता है। हालांकि पर्यटकों की डिमांड के चलते थोड़ी छूट दी गई है, जिसके तहत पर्यटक रेस्ट हाउस तक जा सकेंगे। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद 15 नवंबर से वन्य जीव विहार नई पर्यटकों के भ्रमण के लिए पुन: खोला जाएगा।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अक्तूबर से नवंबर के मध्य तक का समय बाघों के प्रजनन का होता है। ऐसे में जंगल में पर्यटकों का विहार करना काफी खतरनाक होता है। बाघ, बाघिन एक साथ आक्रामक हो जाते हैं। इसलिए भी पर्यटकों के भ्रमण पर पाबंदी लगाई जाती है।  


वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि जंगल बंद होने के दौरान भी अगर जंगल की सैर का मूड बनता है तो यूपी टूरिज्म की वेबसाइट ऑन कर ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी। इसके बाद बुकिंग तिथि में रेस्ट हाउस पहुंच सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed