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हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने किया दरगाह मेले का उद्घाटन, मांगी अमन की दुआ
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sat, 13 May 2017 10:53 PM IST
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सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर शनिवार को चादर पोशी करते मुख्य अतिथि इलाहाबाद खंडपीठ के न्यायाधीश।
- फोटो : अमर उजाला
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सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर शुरू हुए जेठ मेले का शनिवार देर शाम को पारंपरिक तरीके से उद्घाटन हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ के न्यायाधीश ने जंजीरी गेट पर फीता काटकर किया। इस दौरान दरगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने फूलों की वर्षा की। इसके बाद न्यायाधीश ने गाजी की दरगाह पर पहुंचकर हाजिरी लगाते हुए चादरपोशी कर अमन-चैन की दुआ मांगी। प्रबंध समिति की ओर से न्यायाधीश की साफापोशी कर उन्हें सम्मानित भी किया गया।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह एक माह तक चलने वाले जेठ मेले की शुरुआत 11 मई को अनौपचारिक रूप से हुई थी। मेले के उद्घाटन की तिथि शनिवार 13 मई निश्चित की गई थी। मुख्य अतिथि हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ के न्यायाधीश अताउर रहमान मसऊदी शाम को बहराइच पहुंचे।
बाद नमाजे ईशा दरगाह शरीफ पहुंचकर उन्होंने परंपरागत तरीके से जंजीरी गेट पर फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद की अगुवाई में खादिम और खुद्दामों ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। उद्घाटन के समय आम जायरीन का प्रवेश रोक दिया गया।
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फीता काटने के बाद न्यायाधीश नाल दरवाजा होते हुए सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पहुंचे। वहां उन्होंने हाजिरी लगाते हुए चादर पोशी की। शाही इमाम मौलाना अरशदुल कादरी ने अमनो अमान की दुआ की।
इसके बाद दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद और सदस्य अब्दुल रहमान उर्फ बच्चेभारती की अगुवाई में हाईकोर्ट के न्यायाधीश के साथ ही जिलाधिकारी अजयदीप सिंह, एसपी सुनील सक्सेना, न्यायिक अधिकारी नरेंद्र कुमार, विजय बहादुर यादव, एडीएम विद्याशंकर सिंह, एएसपी दिनेश त्रिपाठी अदि की साफापोशी कर उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में खादिम, खुद्दाम और न्याय विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर मुख्य मेला आज है। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। मेले में गाजे-बाजे के साथ विभिन्न जनपदों से सैयद सालार मसऊद गाजी (बाले मियां) की परंपरागत बारातें आएंगी। हालांकि दूल्हा नदारद होगा। टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक व रुदौली की बारातें आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मुख्य मेले में शामिल होने के लिए जायरीन का सैलाब उमड़ रहा है।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेला शुरू हो गया है। मुख्य मेला रविवार को है। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि मुख्य जेठ मेले पर हजार वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। पूर्वांचल, नेपाल, मुंबई, दिल्ली, राजस्थान, बिहार से बाराती दरगाह शरीफ पहुंच चुके हैं।
काफी संख्या में बारातियों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार शाम 7:00 बजे बारातें गाजे-बाजे के साथ विभिन्न डेरों से गाजी की दरगाह की ओर रवाना होंगी। बारातियों का स्वागत दरगाह प्रबंध समिति के साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी करेंगे। इन बारातियों के हाथों में निशान, चादर, पलंगपीढ़ी व दहेज का पूरा सामान होगा।
ऐसी मान्यता है कि रुदौली की रहने वाली जोहराबीबी एक हजार साल पूर्व दुल्हन बनी थीं। उन्हीं की याद में यह बारातें गाजी की दरगाह तक आती हैं। मुख्य बारात टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक व रुदौली की होती है। लगभग 550 बारातें देश के विभिन्न हिस्सों से बहराइच पहुंचने की उम्मीद है।
इस बारात में दूल्हा व दुल्हन नदारद होते हैं। लेकिन परंपरा निर्वहन में रस्म की अदायगी बिल्कुल उसी तरह होती है जैसे वैवाहिक समारोह के समय होता है। गाजी की दरगाह पर बारातें तो सैकड़ों आती हैं, लेकिन मुंबई से आने वाले किन्नरों का समूह जो बारात लेकर आता है उसकी छटा अलग ही होती है।
ढोलक व मंजीरे की थाप पर थिरकते हुए बाराती गाजी की मजार पहुंचकर सलाम करते हुए परंपरा का निर्वहन करेंगे। बारात में शामिल होने वाले बाराती पूरे दिन उपवास रखेंगे। अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। बारात की रस्म अदायगी के बाद ही सभी भोजन करेंगे।
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सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह एक माह तक चलने वाले जेठ मेले की शुरुआत 11 मई को अनौपचारिक रूप से हुई थी। मेले के उद्घाटन की तिथि शनिवार 13 मई निश्चित की गई थी। मुख्य अतिथि हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ के न्यायाधीश अताउर रहमान मसऊदी शाम को बहराइच पहुंचे।
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बाद नमाजे ईशा दरगाह शरीफ पहुंचकर उन्होंने परंपरागत तरीके से जंजीरी गेट पर फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद की अगुवाई में खादिम और खुद्दामों ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। उद्घाटन के समय आम जायरीन का प्रवेश रोक दिया गया।
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फीता काटने के बाद न्यायाधीश नाल दरवाजा होते हुए सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पहुंचे। वहां उन्होंने हाजिरी लगाते हुए चादर पोशी की। शाही इमाम मौलाना अरशदुल कादरी ने अमनो अमान की दुआ की।
इसके बाद दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद और सदस्य अब्दुल रहमान उर्फ बच्चेभारती की अगुवाई में हाईकोर्ट के न्यायाधीश के साथ ही जिलाधिकारी अजयदीप सिंह, एसपी सुनील सक्सेना, न्यायिक अधिकारी नरेंद्र कुमार, विजय बहादुर यादव, एडीएम विद्याशंकर सिंह, एएसपी दिनेश त्रिपाठी अदि की साफापोशी कर उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में खादिम, खुद्दाम और न्याय विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर मुख्य मेला आज है। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। मेले में गाजे-बाजे के साथ विभिन्न जनपदों से सैयद सालार मसऊद गाजी (बाले मियां) की परंपरागत बारातें आएंगी। हालांकि दूल्हा नदारद होगा। टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक व रुदौली की बारातें आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मुख्य मेले में शामिल होने के लिए जायरीन का सैलाब उमड़ रहा है।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेला शुरू हो गया है। मुख्य मेला रविवार को है। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि मुख्य जेठ मेले पर हजार वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। पूर्वांचल, नेपाल, मुंबई, दिल्ली, राजस्थान, बिहार से बाराती दरगाह शरीफ पहुंच चुके हैं।
काफी संख्या में बारातियों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार शाम 7:00 बजे बारातें गाजे-बाजे के साथ विभिन्न डेरों से गाजी की दरगाह की ओर रवाना होंगी। बारातियों का स्वागत दरगाह प्रबंध समिति के साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी करेंगे। इन बारातियों के हाथों में निशान, चादर, पलंगपीढ़ी व दहेज का पूरा सामान होगा।
ऐसी मान्यता है कि रुदौली की रहने वाली जोहराबीबी एक हजार साल पूर्व दुल्हन बनी थीं। उन्हीं की याद में यह बारातें गाजी की दरगाह तक आती हैं। मुख्य बारात टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक व रुदौली की होती है। लगभग 550 बारातें देश के विभिन्न हिस्सों से बहराइच पहुंचने की उम्मीद है।
इस बारात में दूल्हा व दुल्हन नदारद होते हैं। लेकिन परंपरा निर्वहन में रस्म की अदायगी बिल्कुल उसी तरह होती है जैसे वैवाहिक समारोह के समय होता है। गाजी की दरगाह पर बारातें तो सैकड़ों आती हैं, लेकिन मुंबई से आने वाले किन्नरों का समूह जो बारात लेकर आता है उसकी छटा अलग ही होती है।
ढोलक व मंजीरे की थाप पर थिरकते हुए बाराती गाजी की मजार पहुंचकर सलाम करते हुए परंपरा का निर्वहन करेंगे। बारात में शामिल होने वाले बाराती पूरे दिन उपवास रखेंगे। अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। बारात की रस्म अदायगी के बाद ही सभी भोजन करेंगे।