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दूल्हा न दुल्हन, फिर भी आएंगी बारातें

Sun, 07 May 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Sun, 07 May 2017 11:26 PM IST
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Groom nor bride, still will come to the wedding
दरगाह पर जुटे जायरीन - फोटो : अमर उजाला
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले में माह के पहले रविवार को परंपरागत विवाह की रस्म अदा की जाती है। इस रस्म में दूल्हा और दुल्हन तो नहीं होती हैं, लेकिन बारातें विभिन्न जनपदों से आती हैं। नासिक व रुदौली के साथ खेता सराय बनारस, पुणे, मुंबई टांडा, बस्ती, जौनपुर की बारातें आकर्षण का केंद्र होती हैं। 
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सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह शांति, सौहार्र्द और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। दरगाह पर प्रति वर्ष लगने वाले जेठ मेले में दोनों समुदायों के लोग बड़ी संख्या में हाजिरी लगाते हैं। गाजी की दरगाह पर जेठ मेले की शुरुआत वैवाहिक समारोह से होती है। इस बार मुख्य जेठ मेला 14 मई को है।
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इस दिन हजार वर्ष पुरानी यह परंपरा एक बार फिर रस्मो रिवाज के साथ दोहरायी जाएगी। मेला 11 मई से शुरू होगा। मेला शुरू होने के सप्ताह भर पहले से ही बाराती भी पहुंचने लगते हैं। दहेज के साजो सामान के साथ सभी बाराती दरगाह शरीफ के मैदान में टेंट लगाकर ठहरेंगे। 14 मई को शाम 7:30 बजे बारातें गाजे-बाजे के साथ गाजी की दरगाह की ओर निकलेंगी।
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बारातियों का स्वागत दरगाह प्रबंध समिति के साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी करेंगे। इन बारातियों के हाथों में निशान, चादर, पलंगपीढ़ी व दहेज का पूरा सामान होगा। बारातें जंजीरी गेट से प्रवेश कर नाल दरवाजा होते हुए गाजी की दरगाह पर हाजिरी लगाएंगी। वहां पर पलंगपीढ़ी व दहेज का सामान रखा जाएगा।

ऐसी मान्यता है कि रुदौली, बाराबंकी की रहने वाली जोहराबीबी एक हजार साल पूर्व दुल्हन बनी थीं। उन्हीं की याद में यह बारातें गाजी की दरगाह तक आती हैं। मुख्य बारात टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक व रुदौली (बाराबंकी) की होती है। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि 300 बारातें पंजीकृत हैं। जबकि प्रति वर्ष बारातों को लाने का सिलसिला बढ़ता है। ऐसे में लगभग 525 बारातें देश के विभिन्न हिस्सों से बहराइच पहुंचने की उम्मीद है। 

दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि जौनपुर व ख्ेातासराय बनारस के बाराती परंपरा निर्वहन के तहत इस बार पैदल बहराइच पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि बारातें चल चुकी हैं। पैदल बाराती मेला शुरू होने से दो दिन पहले विभिन्न पड़ाव से होते हुए बहराइच पहुंचेंगे। बताया कि मेले का उद्घाटन 11 मई को होगा। जबकि मुख्य मेला 14 मई को होगा। बताया कि जायरीन की आमद शुरू हो गई है। मेला परिसर सज रहा है।

14 मई को बारात में शामिल होने वाले बाराती पूरे दिन उपवास रखेंगे। वे बारात की रस्म अदायगी के बाद ही भोजन करेंगे। 

सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर बारातें तो आती हैं, लेकिन मुंबई से आने वाले किन्नरों का समूह जो बारात लेकर आता है उसकी छटा अलग ही होती है। ढोलक व मंजीरे की थाप पर थिरकते हुए बाराती किन्नर गाजी की मजार पहुंचकर सलाम करते हुए परंपरा का निर्वहन करते हैं। 


गाजी की दरगाह पर मुख्य मेले के दिन आने वाली बारातों में आतिशबाज भी आगे-आगे आतिशबाजी करते हुए चलते थे। लेकिन इस बार सुरक्षा के चलते जिला प्रशासन ने आतिशबाजी पर रोक लगा दी है। फिर भी मेले में बारातों की अलग ही रौनक रहेगी।
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