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Bahraich News: घुमनाभारू के सोलर मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान
Tue, 27 Oct 2026 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:31 PM IST
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घूमनाभारु गांव में सोलर माइक्रो ग्रिड मॉडल का निरीक्षण करने के दौरान समूह की महिलाओं के साथ मौज
बहराइच। ग्रामीण विकास, हरित ऊर्जा और महिला सशक्तीकरण को एक साथ जोड़ने वाली मिहींपुरवा ब्लॉक की घुमनाभारू ग्राम पंचायत की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय की ओर से देशभर से चयनित 27 उत्कृष्ट प्रशासनिक पहलों में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तीन मॉडलों को शामिल किया गया है।
इनमें बहराइच के घुमनाभारू गांव का सौर ऊर्जा आधारित एग्री-पीवी मॉडल भी शामिल है। यह मॉडल कम लागत पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण आजीविका के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। केंद्रीय टीम ने 15 अक्तूबर को सोलर प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान कैबिनेट सचिवालय के अपर सचिव सौरभ तिवारी ने सिंचाई आउटलेट और मोटर चलवाकर उनकी कार्यशीलता परखी थी। उन्होंने इस मॉडल को स्वच्छ ऊर्जा, महिला नेतृत्व और ग्रामीण रोजगार के लिहाज से उपयोगी पहल बताया था।
गांव में 43 किलोवाट क्षमता के सोलर माइक्रोग्रिड से 10 सोलर पंप संचालित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से करीब 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है, जिससे लगभग 200 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस पहल से सिंचाई की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। पहले जहां प्रति घंटे सिंचाई पर करीब 200 रुपये खर्च होते थे, वहीं अब यह घटकर 60 रुपये रह गया है। महिला स्वयं सहायता समूह प्लांट के संचालन और किसानों को सिंचाई सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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इनमें बहराइच के घुमनाभारू गांव का सौर ऊर्जा आधारित एग्री-पीवी मॉडल भी शामिल है। यह मॉडल कम लागत पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण आजीविका के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। केंद्रीय टीम ने 15 अक्तूबर को सोलर प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान कैबिनेट सचिवालय के अपर सचिव सौरभ तिवारी ने सिंचाई आउटलेट और मोटर चलवाकर उनकी कार्यशीलता परखी थी। उन्होंने इस मॉडल को स्वच्छ ऊर्जा, महिला नेतृत्व और ग्रामीण रोजगार के लिहाज से उपयोगी पहल बताया था।
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गांव में 43 किलोवाट क्षमता के सोलर माइक्रोग्रिड से 10 सोलर पंप संचालित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से करीब 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है, जिससे लगभग 200 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस पहल से सिंचाई की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। पहले जहां प्रति घंटे सिंचाई पर करीब 200 रुपये खर्च होते थे, वहीं अब यह घटकर 60 रुपये रह गया है। महिला स्वयं सहायता समूह प्लांट के संचालन और किसानों को सिंचाई सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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