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महसी में घाघरा नदी उफनाई, पांच गांव घिरे
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 06 Jul 2016 11:14 PM IST
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उफनाई घाघरा के बाद बाढ़ के पानी से घिरा कायमपुर तटबंध मार्ग।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में निरंतर बढ़ रहे जलस्तर के चलते महसी तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी उफान पर है। पांच गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। पानी निरंतर फैल रहा है। ऐसे में देर रात आसपास के अन्य 13 गांव चपेट में आ जाएंगे।
हड़कंप की स्थिति है। अफरा तफरी मची हुई है। गांव से मुख्य मार्ग के संपर्क मार्गों पर भी घुटनों भर पानी चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के निकलने का रास्ता नहीं बचा है। उधर प्रशासन ने भी अब तक बाढ़ से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। इससे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
तराई में रात को हुई झमाझम बरसात और नेपाल के पहाड़ों पर बरस रहे पानी से घाघरा नदी का जलस्तर प्रतिघंटे एक सेंटीमीटर बढ़ रहा है। बुधवार दोपहर बाद एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 105.756 मीटर रिकॉर्ड हुआ।
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खतरे का निशान 106.07 मीटर है। ऐसे में नदी लाल निशान से सिर्फ 31 सेंटीमीटर नीचे है। लेकिन महसी तहसील क्षेत्र में नदी पूरी तरह से उफान पर आ गई है। बाढ़ का पानी फैलने से कोरिनपुरवा, गोलागंज, टेपरी, जीरमापुर, लठौरनपुरवा पानी से घिर गए हैं। इन गांवों की 2500 आबादी बाढ़ में फंस गई है।
जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी गांवों में भी घुसने लगा है। अफरा-तफरी और हड़कंप की स्थिति है। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन अब तक गांव में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
पांच गांवों के बाढ़ के पानी से घिरने के साथ ही लगभग 600 एकड़ खेती योग्य जमीन भी जलमग्न हो गई है। चार प्राथमिक विद्यालय भी बाढ़ की चपेट में हैं। इससे वहां पर पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में दहशतजदा ग्रामीण समझ नहीं पा रहे कि जिंदगी कैसे बचाएं।
उधर श्रावस्ती में पांच दिनों से रात में झमाझम बरसात हो रही है। जबकि दिन में बादलों की लुका छिपी व चिलचिलाती धूप निगल रही है। इस कारण पहाड़ी नालों सहित राप्ती नदी का जलस्तर घट बढ़ रहा है। वहीं, अपेक्षित बरसात से किसान प्रफुल्लित हैं।
मंगलवार रात दस बज बरसात शुरू होकर भोर तक जारी रही। झमाझम बारिश से सिरसिया क्षेत्र में पड़ने वाले पहाड़ी नाले भी उफान पर हैं। राप्ती बैराज पर मंगलवार शाम जहां 127.26 मीटर था।
वहीं, रात में बरसात के बाद बुधवार को राप्ती नदी का जल स्तर 127.65 मीटर मापा गया। जो ग्यारह बजे घट कर 127.60 मीटर पहुंच गया। नदी के घटते बढ़ते जलस्तर के कारण जहां नदी अपने दोनों किनारों पर कटान करने लगी है। वहीं, बरसात से कछार के लोगों में बाढ़ का खतरा भी सताने लगा है।
ऐसे में ग्रामीण अपनी गृहस्थी को सुरक्षित करने में लग गए हैं। राप्ती की लहरें खरगौरा गनेश के मजरा मुश्काबाद में कटान करते हुए खेतों को जलमग्न कर रही है। वहीं, रमनगरा में नदी प्राथमिक विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष की कटान कर रही है जिससे विद्यालय पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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हड़कंप की स्थिति है। अफरा तफरी मची हुई है। गांव से मुख्य मार्ग के संपर्क मार्गों पर भी घुटनों भर पानी चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के निकलने का रास्ता नहीं बचा है। उधर प्रशासन ने भी अब तक बाढ़ से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। इससे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
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तराई में रात को हुई झमाझम बरसात और नेपाल के पहाड़ों पर बरस रहे पानी से घाघरा नदी का जलस्तर प्रतिघंटे एक सेंटीमीटर बढ़ रहा है। बुधवार दोपहर बाद एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 105.756 मीटर रिकॉर्ड हुआ।
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खतरे का निशान 106.07 मीटर है। ऐसे में नदी लाल निशान से सिर्फ 31 सेंटीमीटर नीचे है। लेकिन महसी तहसील क्षेत्र में नदी पूरी तरह से उफान पर आ गई है। बाढ़ का पानी फैलने से कोरिनपुरवा, गोलागंज, टेपरी, जीरमापुर, लठौरनपुरवा पानी से घिर गए हैं। इन गांवों की 2500 आबादी बाढ़ में फंस गई है।
जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी गांवों में भी घुसने लगा है। अफरा-तफरी और हड़कंप की स्थिति है। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन अब तक गांव में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
पांच गांवों के बाढ़ के पानी से घिरने के साथ ही लगभग 600 एकड़ खेती योग्य जमीन भी जलमग्न हो गई है। चार प्राथमिक विद्यालय भी बाढ़ की चपेट में हैं। इससे वहां पर पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में दहशतजदा ग्रामीण समझ नहीं पा रहे कि जिंदगी कैसे बचाएं।
उधर श्रावस्ती में पांच दिनों से रात में झमाझम बरसात हो रही है। जबकि दिन में बादलों की लुका छिपी व चिलचिलाती धूप निगल रही है। इस कारण पहाड़ी नालों सहित राप्ती नदी का जलस्तर घट बढ़ रहा है। वहीं, अपेक्षित बरसात से किसान प्रफुल्लित हैं।
मंगलवार रात दस बज बरसात शुरू होकर भोर तक जारी रही। झमाझम बारिश से सिरसिया क्षेत्र में पड़ने वाले पहाड़ी नाले भी उफान पर हैं। राप्ती बैराज पर मंगलवार शाम जहां 127.26 मीटर था।
वहीं, रात में बरसात के बाद बुधवार को राप्ती नदी का जल स्तर 127.65 मीटर मापा गया। जो ग्यारह बजे घट कर 127.60 मीटर पहुंच गया। नदी के घटते बढ़ते जलस्तर के कारण जहां नदी अपने दोनों किनारों पर कटान करने लगी है। वहीं, बरसात से कछार के लोगों में बाढ़ का खतरा भी सताने लगा है।
ऐसे में ग्रामीण अपनी गृहस्थी को सुरक्षित करने में लग गए हैं। राप्ती की लहरें खरगौरा गनेश के मजरा मुश्काबाद में कटान करते हुए खेतों को जलमग्न कर रही है। वहीं, रमनगरा में नदी प्राथमिक विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष की कटान कर रही है जिससे विद्यालय पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।