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Bahraich News: बाढ़ ने दिए जख्म, 22 कच्चे मकान व 13 झोपड़ियां ढहीं
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बाढ़ से ढहे कच्चे मकान।
बहराइच। सरयू की बाढ़ का पानी गांवों से खिसकने लगा तो तबाही की तस्वीर सामने आने लगी। महसी और मिहींपुरवा इलाके में बाढ़ और बारिश के दौरान 22 कच्चे मकान और 13 फूस की झोपड़ियां ढह गईं। कई मकानों की दीवारें और छतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। पानी में गृहस्थी का सामान, अनाज और जरूरी सामान बर्बाद होने से लोगों के सामने अब रहने के साथ दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इलाके में संक्रामक रोग भी फैलने लगा है।
बृहस्पतिवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेमी नीचे यानी 105.97 मीटर दर्ज हुआ। जलस्तर घटने के साथ ही करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी उतर गया है। हालांकि अधिकांश गांवों के संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी और कीचड़ जमा है। इससे आवागमन में परेशानी बनी हुई है। दूसरी ओर पानी उतरने के बाद लंबे समय तक पानी में डूबीं कच्ची दीवारें कमजोर होकर गिरने लगी हैं।
महसी के पचदेवरी, रामदहिन पुरवा और कोनी गांव में 13 फूस की झोपड़ियां ढह गईं। पूरे प्रसाद गांव में पांच मकानों की दीवारें और छत क्षतिग्रस्त हुई है। गलकारा के मजरा कटेला पुरवा में भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है। जोगला पुरवा में दो मकान ढह गए। ग्राम पंचायत बिसवां में राकेश का कच्चा मकान ढह गया, जबकि एक पक्का मकान भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। बाढ़ के दौरान खेतों में खड़ी फसलों के साथ कई परिवारों के घरों में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान का नुकसान हुआ है। जलस्तर घटने की इस खबर के बीच चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी और अन्य बैराजों से सरयू में 2.95 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तटवर्ती इलाकों के लोगों को बाढ़ की आशंका सता रही है।
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मुआवजे के लिए सर्वे शुरू
तहसीलदार महसी विपिन कुमार चौरसिया ने बताया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त झोपड़ियों, कच्चे और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकानों का राजस्व टीमों से सर्वे कराया जा रहा है। नियमानुसार सहायता दी जाएगी।
अब संक्रामक बीमारियों का सैलाब
बाढ़ प्रभावित महसी इलाके में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। गांवों में खुजली से पीड़ित लोगों की संख्या भी बढ़ी है। बृहस्पतिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महसी में पंजीकरण काउंटर से लेकर जांच और चिकित्सक कक्ष तक मरीज नजर आए। कई मरीजों को फर्श पर बैठकर और लेटकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनु शर्मा ने बताया कि क्षेत्र से वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीज अधिक आ रहे हैं। लोगों को साफ पानी का इस्तेमाल करने और पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है।
मकान-झोपड़ी क्षतिग्रस्त होने पर मिलेगी यह सहायता
नुकसान
सहायता राशि
पक्का मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त 1.20 लाख
कच्चा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त 1.20 लाख
पक्का मकान आंशिक क्षतिग्रस्त
6,500 रुपये
कच्चा मकान आंशिक क्षतिग्रस्त 4,000 रुपये
झोपड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त
8,000 रुपये
झोपड़ी आंशिक क्षतिग्रस्त
4,000 रुपये
ग्रामीणों की जुबानी, पानी घटा, परेशानी नहीं
पूरे प्रसाद गांव निवासी रामसागर यादव ने बताया कि बाढ़ का पानी घर में घुसने से अनाज और गृहस्थी का सामान खराब हो गया। अब पानी निकल रहा है, लेकिन घर की दीवारें कमजोर हो गई हैं। पचदेवरी के सीताराम ने बताया कि झोपड़ी गिर गई है। परिवार के साथ टेंट में गुजर-बसर करना पड़ रहा है। पानी तो कम हुआ है, लेकिन रास्तों पर कीचड़ होने से निकलना मुश्किल है। जोगला पुरवा निवासी मुन्नालाल ने कहा बाढ़ में खेती को नुकसान हुआ और मकान भी ढह गया। अब घर दोबारा खड़ा करने की चिंता से रात की नींद गायब है।
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बृहस्पतिवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेमी नीचे यानी 105.97 मीटर दर्ज हुआ। जलस्तर घटने के साथ ही करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी उतर गया है। हालांकि अधिकांश गांवों के संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी और कीचड़ जमा है। इससे आवागमन में परेशानी बनी हुई है। दूसरी ओर पानी उतरने के बाद लंबे समय तक पानी में डूबीं कच्ची दीवारें कमजोर होकर गिरने लगी हैं।
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महसी के पचदेवरी, रामदहिन पुरवा और कोनी गांव में 13 फूस की झोपड़ियां ढह गईं। पूरे प्रसाद गांव में पांच मकानों की दीवारें और छत क्षतिग्रस्त हुई है। गलकारा के मजरा कटेला पुरवा में भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है। जोगला पुरवा में दो मकान ढह गए। ग्राम पंचायत बिसवां में राकेश का कच्चा मकान ढह गया, जबकि एक पक्का मकान भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। बाढ़ के दौरान खेतों में खड़ी फसलों के साथ कई परिवारों के घरों में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान का नुकसान हुआ है। जलस्तर घटने की इस खबर के बीच चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी और अन्य बैराजों से सरयू में 2.95 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तटवर्ती इलाकों के लोगों को बाढ़ की आशंका सता रही है।
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मुआवजे के लिए सर्वे शुरू
तहसीलदार महसी विपिन कुमार चौरसिया ने बताया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त झोपड़ियों, कच्चे और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकानों का राजस्व टीमों से सर्वे कराया जा रहा है। नियमानुसार सहायता दी जाएगी।
अब संक्रामक बीमारियों का सैलाब
बाढ़ प्रभावित महसी इलाके में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। गांवों में खुजली से पीड़ित लोगों की संख्या भी बढ़ी है। बृहस्पतिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महसी में पंजीकरण काउंटर से लेकर जांच और चिकित्सक कक्ष तक मरीज नजर आए। कई मरीजों को फर्श पर बैठकर और लेटकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनु शर्मा ने बताया कि क्षेत्र से वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीज अधिक आ रहे हैं। लोगों को साफ पानी का इस्तेमाल करने और पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है।
मकान-झोपड़ी क्षतिग्रस्त होने पर मिलेगी यह सहायता
नुकसान
सहायता राशि
पक्का मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त 1.20 लाख
कच्चा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त 1.20 लाख
पक्का मकान आंशिक क्षतिग्रस्त
6,500 रुपये
कच्चा मकान आंशिक क्षतिग्रस्त 4,000 रुपये
झोपड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त
8,000 रुपये
झोपड़ी आंशिक क्षतिग्रस्त
4,000 रुपये
ग्रामीणों की जुबानी, पानी घटा, परेशानी नहीं
पूरे प्रसाद गांव निवासी रामसागर यादव ने बताया कि बाढ़ का पानी घर में घुसने से अनाज और गृहस्थी का सामान खराब हो गया। अब पानी निकल रहा है, लेकिन घर की दीवारें कमजोर हो गई हैं। पचदेवरी के सीताराम ने बताया कि झोपड़ी गिर गई है। परिवार के साथ टेंट में गुजर-बसर करना पड़ रहा है। पानी तो कम हुआ है, लेकिन रास्तों पर कीचड़ होने से निकलना मुश्किल है। जोगला पुरवा निवासी मुन्नालाल ने कहा बाढ़ में खेती को नुकसान हुआ और मकान भी ढह गया। अब घर दोबारा खड़ा करने की चिंता से रात की नींद गायब है।

बाढ़ से ढहे कच्चे मकान।