{"_id":"58cd78c44f1c1b275a32ba1f","slug":"false-payment-two-clerk-suspended","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी तरीके से किया भुगतान, दो लिपिक निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी तरीके से किया भुगतान, दो लिपिक निलंबित
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 18 Mar 2017 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीआरडीए के दो लिपिकों ने फर्जीवाड़े का लंबा खेल खेला। अफसरों को झांसे में रखकर उनसे अलग-अलग मदों में दस लाख रुपये का फर्जी भुगतान करवा दिया। अब मामले का खुलासा होने के बाद डीएम ने दोनों लिपिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सीडीओ ने दोनों लिपिकों के निलंबन के बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
विकास भवन के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) में लगभग 25 कर्मचारियों की तैनाती है। इस विभाग से सांसद, विधायक, लोहिया और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं के काम देखे जाते हैं। बड़ा महकमा होने से भुगतान भी करोड़ों में होता है।
विभाग में नाजिर का काम कनिष्ठ लिपिक जुनेद अहमद और सहायक लेखाकार राजेंद्र कुमार गुप्ता देखते थे। भुगतान की सारी पत्रावली इन्हीं के द्वारा तैयार की जाती थी। इन फाइलों पर परियोजना निदेशक की संस्तुति के बाद सीडीओ भुगतान का आदेश जारी करते थे।
विज्ञापन
विभाग के दोनों लिपिकों ने आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, ग्रेड पे आदि देने में काफी धांधली की। कुछ कर्मचारियों को लाभ दिए जाने के लिए लगभग दस लाख रुपये की फर्जी पत्रावलियों पर सीडीओ और परियोजना निदेशक से संस्तुति करा ली गई।
अब बड़ी हेराफेरी होने का मामला सामने आने के बाद सीडीओ राकेश कुमार ने दोनों लिपिकों को निलंबित कर दिया है। हालांकि सीडीओ मामले से किनारा कसते नजर आए। सीडीओ ने कहा कि बहाली और निलंबन विभागीय कार्रवाई होती है। फर्जीवाड़े के दौरान कितने कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया है, इस मामले में बोलने से भी सीडीओ ने परहेज किया। कहा कि जांच के बाद ही पूरा मामला सामनेे आ सकेगा।
विकास भवन के सूत्रों की मानें तो महज दो कर्मचारियों के निलंबन को गलत ठहराया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के इतनी बड़ी हेराफेरी संभव नहीं थी। ऐसे में इन अधिकारियों को भी जांच के घेरे में लिया जाना चाहिए। वहीं पैसे की रिकवरी कराने के साथ गलत तरीके से लाभ पाने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
विज्ञापन
विकास भवन के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) में लगभग 25 कर्मचारियों की तैनाती है। इस विभाग से सांसद, विधायक, लोहिया और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं के काम देखे जाते हैं। बड़ा महकमा होने से भुगतान भी करोड़ों में होता है।
विज्ञापन
विभाग में नाजिर का काम कनिष्ठ लिपिक जुनेद अहमद और सहायक लेखाकार राजेंद्र कुमार गुप्ता देखते थे। भुगतान की सारी पत्रावली इन्हीं के द्वारा तैयार की जाती थी। इन फाइलों पर परियोजना निदेशक की संस्तुति के बाद सीडीओ भुगतान का आदेश जारी करते थे।
विज्ञापन
विभाग के दोनों लिपिकों ने आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, ग्रेड पे आदि देने में काफी धांधली की। कुछ कर्मचारियों को लाभ दिए जाने के लिए लगभग दस लाख रुपये की फर्जी पत्रावलियों पर सीडीओ और परियोजना निदेशक से संस्तुति करा ली गई।
अब बड़ी हेराफेरी होने का मामला सामने आने के बाद सीडीओ राकेश कुमार ने दोनों लिपिकों को निलंबित कर दिया है। हालांकि सीडीओ मामले से किनारा कसते नजर आए। सीडीओ ने कहा कि बहाली और निलंबन विभागीय कार्रवाई होती है। फर्जीवाड़े के दौरान कितने कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया है, इस मामले में बोलने से भी सीडीओ ने परहेज किया। कहा कि जांच के बाद ही पूरा मामला सामनेे आ सकेगा।
विकास भवन के सूत्रों की मानें तो महज दो कर्मचारियों के निलंबन को गलत ठहराया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के इतनी बड़ी हेराफेरी संभव नहीं थी। ऐसे में इन अधिकारियों को भी जांच के घेरे में लिया जाना चाहिए। वहीं पैसे की रिकवरी कराने के साथ गलत तरीके से लाभ पाने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।