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स्वास्थ्य विभाग के आठ डॉक्टर वर्षों से नदारद
अमर उजाला/बहराइच
Updated Thu, 01 Jun 2017 11:34 PM IST
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दो-चार दिनों का आकस्मिक अवकाश स्वीकृत कराकर गए डॉक्टर वर्षों बीत जाने के बाद भी नहीं लौटे हैं। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि जिले के आठ डॉक्टर ड्यूटी से नदारद हैं। विभाग की फाइलों में गुमशुदा की सूची में दर्ज भी हो गए हैं, लेकिन अभी तक विभाग उनके लौटने की आस संजोए बैठा है।
कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जिन्हें एक माह का वेतन भी नहीं मिला, जबकि उन्हें नदारद हुए अरसा बीत रहा है। अनुपस्थित चल रहे डॉक्टरों के खिलाफ सीएमओ ने रिपोर्ट शासन को भेजी है। आरोप पत्र तैयार कर गुमशुदा डॉक्टरों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की भी संस्तुति शासन को की गई है।
जिला डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। सरकार उन्हें सहूलियतें देने की घोषणा कर मेहरबान है। इसके बावजूद तराई में नियुक्ति पाए चिकित्सक अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतते हैं। वे लंबे समय तक कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं या तो कार्यभार ग्रहण कर अनुपस्थित रहते हैं। यह खेल जिले में अरसे से चल रहा है। ऐसे में जिले के ऑठ डाक्टर कई साल से नदारद हैं। उन्हें जो नोटिस भेजा गया, उसका भी जवाब नहीं मिला।
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ऐसे डॉक्टरों की कुंडली स्वास्थ्य विभाग ने तैयार कर अब कार्रवाई की तैयारी की है। सीएमओ डॉ. अरुणलाल ने बताया कि नदारद आठ डॉक्टरों की समय-समय पर रिपोर्टिंग शासन को की जाती रही है। पुन: इस मामले में स्वास्थ्य निदेशक और सचिव को पत्र भेजा गया है। सीएमओ ने बताया कि जरवल ब्लॉक के देवीदासपुर पीएचसी पर तैनात डॉ. सौरभ चौरसिया वर्ष 2012 से गैर हाजिर हैं। वहीं कुछ 2014-15 से नदारद हैं।
इनमें डॉ. उमेश कुमार तिवारी को सिर्फ एक माह की सेलरी मिली थी। उनके अलावा अन्य चिकित्सक जॉइन करने के बाद ड्यूटी पर आए नहीं। नदारद डॉक्टरों की कोई जानकारी विभाग को नहीं है। वेतन के भुगतान पर भी रोक लगी है। सीएमओ ने बताया कि नदारद डॉक्टरों के बाबत आरोप पत्र तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। उन पर कार्रवाई शासन स्तर से होनी है।
इंसेट
यह डॉक्टर चल रहे अनुपस्थित
चिकित्सक अनुपस्थिति वर्ष
डॉ. सौरभ चौरसिया मार्च 2012
डॉ. उमेश कुमार तिवारी अगस्त 2014
डॉ. सतीश कुमार जायसवाल मार्च 2014
डॉ. अभिषेक वर्मा मई 2015
डॉ. अनिल कुमार वर्मा अप्रैल 2014
डॉ. अनिल कुमार मार्च 2013
डॉ. रजनीश सितंबर 2015
डॉ. यूनुस मई 2016
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कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जिन्हें एक माह का वेतन भी नहीं मिला, जबकि उन्हें नदारद हुए अरसा बीत रहा है। अनुपस्थित चल रहे डॉक्टरों के खिलाफ सीएमओ ने रिपोर्ट शासन को भेजी है। आरोप पत्र तैयार कर गुमशुदा डॉक्टरों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की भी संस्तुति शासन को की गई है।
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जिला डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। सरकार उन्हें सहूलियतें देने की घोषणा कर मेहरबान है। इसके बावजूद तराई में नियुक्ति पाए चिकित्सक अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतते हैं। वे लंबे समय तक कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं या तो कार्यभार ग्रहण कर अनुपस्थित रहते हैं। यह खेल जिले में अरसे से चल रहा है। ऐसे में जिले के ऑठ डाक्टर कई साल से नदारद हैं। उन्हें जो नोटिस भेजा गया, उसका भी जवाब नहीं मिला।
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ऐसे डॉक्टरों की कुंडली स्वास्थ्य विभाग ने तैयार कर अब कार्रवाई की तैयारी की है। सीएमओ डॉ. अरुणलाल ने बताया कि नदारद आठ डॉक्टरों की समय-समय पर रिपोर्टिंग शासन को की जाती रही है। पुन: इस मामले में स्वास्थ्य निदेशक और सचिव को पत्र भेजा गया है। सीएमओ ने बताया कि जरवल ब्लॉक के देवीदासपुर पीएचसी पर तैनात डॉ. सौरभ चौरसिया वर्ष 2012 से गैर हाजिर हैं। वहीं कुछ 2014-15 से नदारद हैं।
इनमें डॉ. उमेश कुमार तिवारी को सिर्फ एक माह की सेलरी मिली थी। उनके अलावा अन्य चिकित्सक जॉइन करने के बाद ड्यूटी पर आए नहीं। नदारद डॉक्टरों की कोई जानकारी विभाग को नहीं है। वेतन के भुगतान पर भी रोक लगी है। सीएमओ ने बताया कि नदारद डॉक्टरों के बाबत आरोप पत्र तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। उन पर कार्रवाई शासन स्तर से होनी है।
इंसेट
यह डॉक्टर चल रहे अनुपस्थित
चिकित्सक अनुपस्थिति वर्ष
डॉ. सौरभ चौरसिया मार्च 2012
डॉ. उमेश कुमार तिवारी अगस्त 2014
डॉ. सतीश कुमार जायसवाल मार्च 2014
डॉ. अभिषेक वर्मा मई 2015
डॉ. अनिल कुमार वर्मा अप्रैल 2014
डॉ. अनिल कुमार मार्च 2013
डॉ. रजनीश सितंबर 2015
डॉ. यूनुस मई 2016