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सूखे हलक वन्यजीवों के आबादी की ओर बढ़ रहे कदम

Mon, 04 Apr 2016 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Mon, 04 Apr 2016 10:51 PM IST
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Dry throat wildlife step are moving towards populations
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के जलस्रोत सूखे - फोटो : अमर उजाला
तराई में भीषण गर्मी से कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के जलस्रोत सूखने लगे हैं। ऐसे में हाथी, बाघ-तेंदुए समेत अन्य जंगली जानवरों के कदम आबादी की ओर बढ़ने लगे हैं। जिसका परिणाम हमले के रूप में सामने आ रहा है। जंगल में पानी का इंतजाम न होने से मानव व वन्यजीवों में संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की संभावना भी विशेषज्ञ जता रहे हैं। 
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

ये वन क्षेत्र सात रेंज में विभक्त है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वर्ष 2012 के सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में 36 बाघ हैं। जबकि तेंदुओं की संख्या लगभग 56 के आसपास है। कतर्नियाघाट और निशानगाड़ा रेंज में बाघ और तेंदुओं की टेरीटरी 12 किलोमीटर से अधिक दायरे में है। कतर्निया सेंक्चुरी के अलावा नेपाल के रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क के दुर्लभ वन्य जीव भी खाता कारीडोर के रास्ते कतर्निया के जंगल में आए दिन पहुंचते हैं।
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अप्रैल में ही पारा 38 डिग्री रिकार्ड हो रहा है, ऐसे में जंगल में स्थित जलस्रोत भी सूखने लगे हैं। जिससे पेयजल की तलाश में हाथी, बाघ और तेंदुए आबादी के इलाके में दस्तक दे रहे हैं। जो मानव व वन्यजीव संघर्ष का कारण बन रहा है। वन विभाग के अधिकारी पानी की वैकल्पिक व्यवस्था का दावा तो कर रहे हैं। मगर ये दावा प्रतिवर्ष हवा हवाई साबित होता है। ककरहा और मोतीपुर रेंज में चार दिन पूर्व तेंदुए ने एक घर में घुसकर दो मवेशियों को निवाला बनाया था।
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जबकि दो दिन पूर्व ककरहा रेंज में आबादी के किनारे जंगल के रास्ते में बाघ और तेंदुआ ग्रामीणों ने देखा था। सोमवार सुबह भरथापुर बिछिया मार्ग पर नदी की ओर जा रहे हाथियों के झुंड ने एक ग्रामीण को पटककर मार डाला। ये तो बानगी भर है। पूर्व में भी हाथी, बाघ और तेंदुए के 13 हमले हो चुके हैं। 

मौसम के साथ बदलने लगता व्यवहार
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि गर्मी में तापमान बढ़ने के चलते वन्यजीव अप्रैल से जुलाई माह के मध्य आबादी की ओर अधिक रुख करते हैं। यही हमलों की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा कि अधिक गर्मी और अधिक ठंड में वन्यजीव मौसम बदलाव के चलते आक्रामक मुद्रा में होते हैं। इस दौरान इनका व्यवहार बदलने लगता है। 

वन क्षेत्र में 80 जलस्रोत चिह्नित
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के सात रेंजों में गेरुआ नदी, ओरई नाला, महादेवा तालाब स्थित है। जबकि निशानगाड़ा में लठौवा कठौवा तालाब है। वहीं, मुर्तिहा में बघेल ताल, धर्मापुर रेंज में धर्मापुर बगहर और बोझिया नाला, ककरहा रेंज में चफरा ताल और सोती नाला है। फिलहाल इन प्राकृतिक जलस्रोतों में तो पानी है।

मगर जंगल के बीच स्थित छोटे-छोटे तालाब सूखे हैं। वहीं, कुछ जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं। इसके अलावा 70 छोटे तालाब स्थित हैं। ककरहा रेंज का चफरा ताल ऐसा है। जिसमें बारहों महीने पानी रहता है। मगर ये तालाब ककरहा रेंज में आबादी के निकट है। जंगल के मध्य स्थित जलस्रोत सूखने पर बाघ और तेंदुए चफरा ताल की ओर रुख करते हैं। जिसके चलते वन्यजीवों के कदम आबादी में पहुंच जाते हैं और मानव व वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनती है। 

पानी की हो रही वैकल्पिक व्यवस्था
कतर्नियाघाट व निशानगाड़ा रेंज के वन क्षेत्राधिकारियों का कहना है कि एक हजार लीटर के टैंकर से जंगल के मध्य स्थित जलस्रोतों को भरने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि गर्मी अधिक पड़ने से जलस्रोत सूख जरूर रहे हैं। मगर वन्यजीवों को पानी मिल सके, इसके वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं। 


बरतें ये एहतियात 
रात में घर का दरवाजा बंद कर सोएं। 
अकेले घर से न निकलें। 
शौच या खलिहान समूह में जाएं। 
घर में पटाखे रखें और तेंदुए/बाघ के दिखने पर दगाएं। 
जानवर के अहाते में तेंदुए/बाघ की आहट मिलने पर बाहर न जाएं। 
बच्चों को घर से अकेले न निकलने दें। 

सजगता के लिए चलेगा विशेष अभियान
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी का कहना है कि कतर्निया के अधिकांश जलस्रोत गेरुआ, कौड़ियाला और घाघरा नदियों से जुड़े हैं। ऐसे में पेयजल की दिक्कत नहीं होती है। जंगल के मध्य स्थित छोटे-छोटे वाटर होल को अधिक गर्मी में भरवाया जाता है। उन्होंने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में बढ़ोत्तरी न हो इसके लिए क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इको विकास समिति के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक जलस्रोत को सूखने नहीं दिया जाएगा। सभी रेंजों के वन क्षेत्राधिकारियों को इस मामले में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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