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पीडियाट्रिक आईसीयू को मिले डॉक्टर और 20 नर्सें
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 06 Jan 2016 09:54 PM IST
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बहराइच। दो सालों से ठप पड़े पीडियाट्रिक आईसीयू के अच्छे दिन आ गए। स्वास्थ्य विभाग ने दिमागी बुखार पीड़ितों बच्चों के बेहतर इलाज व आईसीयू संचालन के लिए 20 नई स्टाफ नर्स की तैनाती की है।
बुधवार को छह नर्स व एक एमबीबीएस डॉक्टर ने जिला अस्पताल पहुंचकर कार्यभार ग्रहण कर लिया। बावजूद इसके दिमागी बुखार के संक्रमण काल बीतने के तीन माह बाद मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती स्वास्थ्य विभाग की चैतन्यता पर सवाल उठा रहे हैं।
तराई में प्रतिवर्ष मध्य जून माह से अक्तूबर तक जापानी इंसेफेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) का कहर मासूमों पर बरपता है। वर्ष 1995 से शुरू यह सिलसिला आज भी कायम है।
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वर्ष 2014 में दिमागी बुखार के संक्रमण काल में प्रतिदिन मासूमों की मौत हुई। इस साल 83 बच्चे दिमागी बुखार से पीड़ित मिले। छह बच्चोें की मौत को विभाग ने स्वीकार किया।
जबकि विभाग के मुताबिक नौ ऐसे बच्चे मिले हैं, जो तेज बुखार के प्रकोप सेे उबर तो गए लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं।
इनकी अक्षमता भी 60 से 90 फीसदी से अधिक है। इस प्रकोप से बच्चों को बचाने के लिए वर्ष 2011 में दस बेड का आईसीयू जिला अस्पताल परिसर में स्थापित किया गया।
अमेरिका से वेंटिलेटर आए। वर्ष 2013 में वार्ड संचालन के लिए तैयार हो गया लेकिन महकमे को मेडिकल व पैरा मेडिकल स्टॉफ की तैनाती करने में दो साल लग गए।
अब विभाग ने राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत संविदा पर 20 स्टॉफ नर्स की तैनाती की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि बुधवार को छह स्टॉफ नर्स ने जॉइन किया है।
जबकि एक एमबीबीएस डॉक्टर ने कार्यभार संभाला है। अभी चार डॉक्टर और चाहिए। इनकी तैनाती भी जल्द पूर्ण हो जाएगी।
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बुधवार को छह नर्स व एक एमबीबीएस डॉक्टर ने जिला अस्पताल पहुंचकर कार्यभार ग्रहण कर लिया। बावजूद इसके दिमागी बुखार के संक्रमण काल बीतने के तीन माह बाद मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती स्वास्थ्य विभाग की चैतन्यता पर सवाल उठा रहे हैं।
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तराई में प्रतिवर्ष मध्य जून माह से अक्तूबर तक जापानी इंसेफेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) का कहर मासूमों पर बरपता है। वर्ष 1995 से शुरू यह सिलसिला आज भी कायम है।
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वर्ष 2014 में दिमागी बुखार के संक्रमण काल में प्रतिदिन मासूमों की मौत हुई। इस साल 83 बच्चे दिमागी बुखार से पीड़ित मिले। छह बच्चोें की मौत को विभाग ने स्वीकार किया।
जबकि विभाग के मुताबिक नौ ऐसे बच्चे मिले हैं, जो तेज बुखार के प्रकोप सेे उबर तो गए लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं।
इनकी अक्षमता भी 60 से 90 फीसदी से अधिक है। इस प्रकोप से बच्चों को बचाने के लिए वर्ष 2011 में दस बेड का आईसीयू जिला अस्पताल परिसर में स्थापित किया गया।
अमेरिका से वेंटिलेटर आए। वर्ष 2013 में वार्ड संचालन के लिए तैयार हो गया लेकिन महकमे को मेडिकल व पैरा मेडिकल स्टॉफ की तैनाती करने में दो साल लग गए।
अब विभाग ने राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत संविदा पर 20 स्टॉफ नर्स की तैनाती की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि बुधवार को छह स्टॉफ नर्स ने जॉइन किया है।
जबकि एक एमबीबीएस डॉक्टर ने कार्यभार संभाला है। अभी चार डॉक्टर और चाहिए। इनकी तैनाती भी जल्द पूर्ण हो जाएगी।