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गैंगरेप की रिपोर्ट न दर्ज करने पर दो दरोगा सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 28 Apr 2017 10:55 PM IST
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जरवलरोड में रिपोर्ट नहीं दर्ज होने पर अपहरण व गैंगरेप पीड़िता के खुदकुशी करने के मामले में मानवाधिकार आयोग के सख्त रुख के बाद डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। इसके चलते पुलिस अधिकारी हरकत में आए और प्रभारी एसपी ने जरवलरोड थाने के दो दरोगाओं को निलंबित कर दिया।
इसके साथ ही मृतका के भाई की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि पीड़ित परिवार के लोगों ने पुलिस पर मनमानी तहरीर लिखवाने का आरोप जड़ा है। मामला अपहरण व गैंगरेप का होने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ एक युवक को ही नामजद किया है।
जरवल रोड थाना क्षेत्र की रहने वाली 22 साल की युवती 24 अप्रैल को ब्यूटी पार्लर से घर लौट रही थी। तभी चीनी मिल यार्ड के पास कार सवार युवकों ने उसे अगवा कर लिया और गोंडा ले जाकर गैंगरेप किया।
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इसके बाद आरोपी उसे लेकर लखनऊ जा रहे थे तभी रास्ते में जरवलरोड थाने के सामने युवती दरवाजा खोलकर चलती कार से कूद गई थी। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पीड़ित परिवार से जबरन सुलह-समझौते पर साइन करा लिए थे।
अगले दिन भी युवती ने थाने फोन करके रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई मगर सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद देर शाम युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का संज्ञान लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग की सदस्य आशा तिवारी ने डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह व एसपी बहराइच को नोटिस भेजकर रिपोर्ट तलब की थी।
जिसके बाद प्रभारी एसपी दिनेश त्रिपाठी ने मामले की जांच की। जिसमें थाने के दिवस अधिकारी गौतम कुमार व एसआई शिवकुमार यादव दोषी पाए गए। इन दोनों दरोगा पर जबरन सुलह समझौते पर साइन कराने का आरोप लगा था।
प्रभारी एसपी ने बताया कि दोनों दरोगा को मुकदमा नहीं दर्ज करने के मामले में दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है। वहीं, युवती के भाई की तहरीर पर जरवलरोड थाना क्षेत्र के गोसाईंपुरवा धनसरी निवासी राजन गोस्वामी पुत्र अयोध्या प्रसाद के खिलाफ धारा 342, 376 और 306 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
वहीं, पीड़ित परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर मनमानी तहरीर लिखवाकर सिर्फ एक युवक को ही नामजद किया है। जबकि अपहरण और गैंगरेप में अन्य युवक भी शामिल थे।
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इसके साथ ही मृतका के भाई की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि पीड़ित परिवार के लोगों ने पुलिस पर मनमानी तहरीर लिखवाने का आरोप जड़ा है। मामला अपहरण व गैंगरेप का होने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ एक युवक को ही नामजद किया है।
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जरवल रोड थाना क्षेत्र की रहने वाली 22 साल की युवती 24 अप्रैल को ब्यूटी पार्लर से घर लौट रही थी। तभी चीनी मिल यार्ड के पास कार सवार युवकों ने उसे अगवा कर लिया और गोंडा ले जाकर गैंगरेप किया।
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इसके बाद आरोपी उसे लेकर लखनऊ जा रहे थे तभी रास्ते में जरवलरोड थाने के सामने युवती दरवाजा खोलकर चलती कार से कूद गई थी। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पीड़ित परिवार से जबरन सुलह-समझौते पर साइन करा लिए थे।
अगले दिन भी युवती ने थाने फोन करके रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई मगर सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद देर शाम युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का संज्ञान लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग की सदस्य आशा तिवारी ने डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह व एसपी बहराइच को नोटिस भेजकर रिपोर्ट तलब की थी।
जिसके बाद प्रभारी एसपी दिनेश त्रिपाठी ने मामले की जांच की। जिसमें थाने के दिवस अधिकारी गौतम कुमार व एसआई शिवकुमार यादव दोषी पाए गए। इन दोनों दरोगा पर जबरन सुलह समझौते पर साइन कराने का आरोप लगा था।
प्रभारी एसपी ने बताया कि दोनों दरोगा को मुकदमा नहीं दर्ज करने के मामले में दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है। वहीं, युवती के भाई की तहरीर पर जरवलरोड थाना क्षेत्र के गोसाईंपुरवा धनसरी निवासी राजन गोस्वामी पुत्र अयोध्या प्रसाद के खिलाफ धारा 342, 376 और 306 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
वहीं, पीड़ित परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर मनमानी तहरीर लिखवाकर सिर्फ एक युवक को ही नामजद किया है। जबकि अपहरण और गैंगरेप में अन्य युवक भी शामिल थे।