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बाबाधाम की भगदड़ में बहराइच के दो युवकों की जान गई
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Mon, 10 Aug 2015 10:08 PM IST
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बहराइच/रामगांव। बाबा बैजनाथधाम में मची भगदड़ में बहराइच के भी दो युवकों की जान चली गई। खैरीघाट निवासी कालिका प्रसाद (38) की भगदड़ में दबकर और ढपालीपुरवा निवासी मुनीजर (40) ने इसी दौरान हार्ट अटैक पड़ने से दम तोड़ दिया।
दोनों के परिवारीजन उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन इस बीच जब दोनों की मौत की खबर मिली तो कोहराम मच गया।
खैरीघाट थाना क्षेत्र के तिगड़ा निवासी कालिका प्रसाद (38) पांच दिन पूर्व हितमित्रों के साथ बाबाधाम गए थे। वापस लौटते जब देवघर में भगदड़ मची तो उसी भगदड़ में कालिका ने भी दम तोड़ दिया।
कालिका के शव को लाने के लिए परिवारीजन बिहार रवाना हो गए हैं। घर में उनकी पत्नी अनीता, पुत्र उमेश, पुत्री रिंका, पिंका और सचिन की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
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कालिका का परिवार काफी गरीब है। खेती-किसानी और मजदूरी से दो जून की रोटी का जुगाड़ होता है। अब बच्चों का भरण पोषण कैसे होगा, ये सोचकर अनीता पछाड़े खाकर गिर रही है।
उधर, कोतवाली देहात क्षेत्र अंतर्गत ढपालीपुरवा निवासी मुनीजर (40) पुत्र दसई महसी के मंगरवल गांव का मूल निवासी है।
घाघरा की कटान में सब कुछ नष्ट होने के बाद वह परिवार समेत बहराइच आकर बस गया था। किसान डिग्री कॉलेज के निकट चाट का ठेला लगाकर परिवार का भरण पोषण करता था।
वह छह दिन पूर्व बैजनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए वह बहराइच से रवाना हुआ था। रविवार को वहां दिल का दौरा पड़ने के चलते मुनीजर ने दम तोड़ दिया।
मुनीजर के साथ गए सहयोगी उसका शव लेकर सोमवार को घर लौटे। पति की लाश देखकर पत्नी सुनीता बेहोश हो गई। वहीं, पुत्र सचिन की भी हालत अर्द्धविक्षिप्तों जैसी हो गई है। तीन वर्षीय अंकुश को पता ही नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है।
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दोनों के परिवारीजन उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन इस बीच जब दोनों की मौत की खबर मिली तो कोहराम मच गया।
खैरीघाट थाना क्षेत्र के तिगड़ा निवासी कालिका प्रसाद (38) पांच दिन पूर्व हितमित्रों के साथ बाबाधाम गए थे। वापस लौटते जब देवघर में भगदड़ मची तो उसी भगदड़ में कालिका ने भी दम तोड़ दिया।
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कालिका के शव को लाने के लिए परिवारीजन बिहार रवाना हो गए हैं। घर में उनकी पत्नी अनीता, पुत्र उमेश, पुत्री रिंका, पिंका और सचिन की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
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कालिका का परिवार काफी गरीब है। खेती-किसानी और मजदूरी से दो जून की रोटी का जुगाड़ होता है। अब बच्चों का भरण पोषण कैसे होगा, ये सोचकर अनीता पछाड़े खाकर गिर रही है।
उधर, कोतवाली देहात क्षेत्र अंतर्गत ढपालीपुरवा निवासी मुनीजर (40) पुत्र दसई महसी के मंगरवल गांव का मूल निवासी है।
घाघरा की कटान में सब कुछ नष्ट होने के बाद वह परिवार समेत बहराइच आकर बस गया था। किसान डिग्री कॉलेज के निकट चाट का ठेला लगाकर परिवार का भरण पोषण करता था।
वह छह दिन पूर्व बैजनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए वह बहराइच से रवाना हुआ था। रविवार को वहां दिल का दौरा पड़ने के चलते मुनीजर ने दम तोड़ दिया।
मुनीजर के साथ गए सहयोगी उसका शव लेकर सोमवार को घर लौटे। पति की लाश देखकर पत्नी सुनीता बेहोश हो गई। वहीं, पुत्र सचिन की भी हालत अर्द्धविक्षिप्तों जैसी हो गई है। तीन वर्षीय अंकुश को पता ही नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है।