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जिला अस्पताल के डॉक्टर पर भ्रष्टाचार का केस
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बहराइच। चिलवरिया निवासी एक महिला ने आयुष्मान कार्ड जारी होने के बाद भी बेटे के इलाज के नाम पर अस्पताल में 10 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। डीएम के आदेश पर हड्डी रोग विशेषज्ञ के खिलाफ नगर कोतवाली में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर करेंगे।
कोतवाली देहात थाना अंतर्गत चिलवरिया नया गांव निवासी किरन देवी पत्नी चंदन ने जिलाधिकारी शंभु कुमार को पत्र देकर कहा कि उसके बेटे संदीप (10) का पैर टूट गया था। जिसका इलाज कराने के लिए वह 26 जून को जिला अस्पताल गई थी।
आयुष्मान कार्ड जारी होने के बाद भी चिकित्सक के दलालों ने उससे 10 हजार रुपये की मांग की। रुपये न देने पर इलाज करने से मना कर दिया। शिकायत सीएमएस से करने पर चिकित्सक आरके वर्मा महिला पर भड़क गए और 14 हजार रुपये की मांग की।
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उसका कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के लिए 50 रुपये व ड्रिप लगाने के लिए 100 रुपये वसूले गए। बेटे के ठीक होने के बाद उसने डीएम से शिकायत की। डीएम के आदेश पर नगर कोतवाली में चिकित्सक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर टीएन दूबे करेंगे। गौरतलब है कि चिकित्सक डॉ. आरके वर्मा का निजी नर्सिंगहोम पूर्व जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव द्वारा सील भी किया जा चुका था।
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कोतवाली देहात थाना अंतर्गत चिलवरिया नया गांव निवासी किरन देवी पत्नी चंदन ने जिलाधिकारी शंभु कुमार को पत्र देकर कहा कि उसके बेटे संदीप (10) का पैर टूट गया था। जिसका इलाज कराने के लिए वह 26 जून को जिला अस्पताल गई थी।
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आयुष्मान कार्ड जारी होने के बाद भी चिकित्सक के दलालों ने उससे 10 हजार रुपये की मांग की। रुपये न देने पर इलाज करने से मना कर दिया। शिकायत सीएमएस से करने पर चिकित्सक आरके वर्मा महिला पर भड़क गए और 14 हजार रुपये की मांग की।
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उसका कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के लिए 50 रुपये व ड्रिप लगाने के लिए 100 रुपये वसूले गए। बेटे के ठीक होने के बाद उसने डीएम से शिकायत की। डीएम के आदेश पर नगर कोतवाली में चिकित्सक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर टीएन दूबे करेंगे। गौरतलब है कि चिकित्सक डॉ. आरके वर्मा का निजी नर्सिंगहोम पूर्व जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव द्वारा सील भी किया जा चुका था।