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सांड ने बाघ को जंगल में खदेड़ा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 25 Jun 2015 10:48 PM IST
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ककरहा रेंज के बेलछा-बभनिया फाटा मार्ग पर गुरुवार सुबह दहशत का आलम था। सड़क पर बाघ और सांड के बीच चले संघर्ष से एक घंटे के लिए आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने झाड़ियों में छिपकर दोनों वन्यजीवों की लड़ाई देखी।
पुलिस और वन विभाग की टीम जब तक मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सांड बाघ को जंगल की ओर भगाने में कामयाब हो गया। हालांकि इस संघर्ष में सांड की दोनों सींग टूट गईं और वह गंभीर रूप से जख्मी भी हुआ है।
बेलछा-बभनिया फाटा मार्ग पर प्रतिदिन की तरह राहगीर आ जा रहे थे। जंगल का रास्ता होने के चलते समूह में ही लोग निकलते हैं। सुबह आठ बजे के आसपास जंगल से निकले एक बाघ ने मार्ग किनारे चर रहे सांड पर हमला कर दिया। इस पर दोनों में संघर्ष शुरू हो गया।
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प्रथम चक्र में सांड़ ने बाघ को दूर तक खदेड़ा। लगभग 15 मिनट बाद बाघ ने फिर सांड पर हमला किया। तीन चक्रों में 55 मिनट संघर्ष चला। इस दौरान मार्ग से गुजर रहे राहगीर पेड़ और झाड़ियों की ओट में छिपे रहे।
प्रत्यक्षदर्शी हरखापुर निवासी मनोज पोरवाल और सेमरी मलमला निवासी नंदकिशोर ने बताया कि संघर्ष के दौरान कभी बाघ सांड़ पर हावी होता था तो कभी सांड बाघ को सींगों से पछाड़ रहा था। इसी दौरान मनोज ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को मामले से अवगत कराया।
वन क्षेत्राधिकारी विकास कुमार अस्थाना, डिप्टी रेंजर शिवप्रताप सिंह और मुर्तिहा कोतवाली की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। 200 मीटर की दूरी से पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने भी बाघ और सांड के संघर्ष को देखा। हालांकि अंतत: सांड बाघ को खदेड़ने में कामयाब रहा।
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पुलिस और वन विभाग की टीम जब तक मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सांड बाघ को जंगल की ओर भगाने में कामयाब हो गया। हालांकि इस संघर्ष में सांड की दोनों सींग टूट गईं और वह गंभीर रूप से जख्मी भी हुआ है।
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बेलछा-बभनिया फाटा मार्ग पर प्रतिदिन की तरह राहगीर आ जा रहे थे। जंगल का रास्ता होने के चलते समूह में ही लोग निकलते हैं। सुबह आठ बजे के आसपास जंगल से निकले एक बाघ ने मार्ग किनारे चर रहे सांड पर हमला कर दिया। इस पर दोनों में संघर्ष शुरू हो गया।
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प्रथम चक्र में सांड़ ने बाघ को दूर तक खदेड़ा। लगभग 15 मिनट बाद बाघ ने फिर सांड पर हमला किया। तीन चक्रों में 55 मिनट संघर्ष चला। इस दौरान मार्ग से गुजर रहे राहगीर पेड़ और झाड़ियों की ओट में छिपे रहे।
प्रत्यक्षदर्शी हरखापुर निवासी मनोज पोरवाल और सेमरी मलमला निवासी नंदकिशोर ने बताया कि संघर्ष के दौरान कभी बाघ सांड़ पर हावी होता था तो कभी सांड बाघ को सींगों से पछाड़ रहा था। इसी दौरान मनोज ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को मामले से अवगत कराया।
वन क्षेत्राधिकारी विकास कुमार अस्थाना, डिप्टी रेंजर शिवप्रताप सिंह और मुर्तिहा कोतवाली की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। 200 मीटर की दूरी से पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने भी बाघ और सांड के संघर्ष को देखा। हालांकि अंतत: सांड बाघ को खदेड़ने में कामयाब रहा।