फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   bird

मिथिलेश ने गौरैया संरक्षण को बनाया जीवन

Fri, 19 Mar 2021 10:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Mar 2021 10:58 PM IST
विज्ञापन
bird
19 बीएचआर 24 - गौरैया दिवस पर विशेष- बलहा के भज्जापुरवा निवासी नि:शक्त मिथिलेश घोसले के साथ। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। पर्यावरण की संकेतक गौरैया आज विलुप्त होने की कगार पर है। उसके संरक्षण के लिए दिव्यांग मिथिलेश ने वीणा उठाया। मिथिलेश व उनके आसपास के आंगन में गौरैया चहचहा रही हैं। वहीं, मिथिलेश द्वारा घोसला बनाकर लोगों को नि:शुल्क वितरित किया जा रहा है। पौधरोपण करने के साथ गौरैया संरक्षण को ही अपना जीवन मानकर मिथिलेश चलने लगे हैं।
विज्ञापन

आज विश्व गौरैया दिवस है। पर्यावरण संरक्षण में गौरैया पक्षी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इतना ही नहीं गौैरैया के दर्शन को भी लोग शुभ मानते हैं। लेकिन आज के समय में गौरैया विलुप्त प्राय पक्षी हो गई है। लेकिन जिले में कुछ लोग ऐसे हैं जो गौरैया के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। कुछ इसी तरह बलहा विकास खंड के ग्राम पंचायत गुलरा के मजरा भज्जापुरवा निवासी मिथिलेश जायसवाल पुत्र अच्छेलाल गौरैया को सहेजने के लिए अपना सबकुछ लगा रहे हैं।
विज्ञापन

मिथिलेश जन्म से ही दिव्यांग हैं, लेकिन कविता लिखने के साथ मिथिलेश पर्यावरण प्रेमी व गौरैया संरक्षण का काम भी कर रहे हैं। मिथिलेश ने बताया कि वह तीन वर्ष से लगातार घोंसले अपने घरों के आसपास लगा रहे हैं। जिसमें 30 से अधिक गौरैया के साथ अन्य प्रजाति के पक्षी विचरण कर रहे हैं। मिथिलेश ने कविता के माध्यम से बताया कि मेरी प्यारी सी गौरैया जब आंगन में आती है, चूं-चूं वह राग सुना कर दिल को खुश कर जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शहर के मोहल्ला अकबरपुरा निवासी कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी भी गौरैया संरक्षण पर काम कर रहे हैं। गोष्ठी का आयोजन कर लोगों को इससे पर्यावरण को होने वाले लाभ के बारे में बता रहे हैं। वहीं शहर के सिविल लाइंस निवासी मुकेश जायसवाल भी अपने लॉन में काफी संख्या में गौरैया का घोंसला लगाए हुए हैं। जिसमें गौरैया निरंतर विचरण कर रही हैं।

पर्यावरण प्रेमी व गौरैया संरक्षक मिथिलेश ने बताया कि वह लगातार तीन वर्ष से घोंसलों का निर्माण करवा रहे हैं। इस पर लगभग 200 रुपये का खर्च आता है। मिथिलेश ने बताया कि 200 रुपये खर्च आने के बाद भी वह लोगों को मुफ्त में घोंसला वितरित कर रहे हैं, जिससे गौरैया का संरक्षण हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed