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41 साल से आवामी चंदे से चल रहा अवैध मदरसा
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बहराइच। शासन के निर्देश पर जिले में बिना मान्यता चल रहे मदरसों की जांच ने तेजी पकड़ ली है। मंगलवार को नानपारा कस्बे में जांच के दौरान एक मदरसा ऐसा मिला है जो मिना मान्यता चल रहा था। जांच में पता चला कि यह मदरसा 1981 से आवामी चंदे से संचालित हो रहा है। इस समय यहां 307 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही सालाना कमाई करीब 31 लाख रुपये है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का काम जारी है। मंगलवार को नानपारा के मदरसा जामिया क़ासमिया खैरुल ऊलूम में जाकर जांच की गई कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मदरसे के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने बताया कि मदरसा 1981 से आवामी चंदे से चल रहा है।
साथ ही मदरसे की सालाना आमदनी लगभग 31 लाख रुपये है। मदरसे के पास चार बीघा जमीन है। प्रबंधक ने यह भी बताया कि मदरसे में 307 बच्चे पढ़ रहे हैं जिनमें से 126 हॉस्टल में रहते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिये 15 अध्यापक मदरसे में कार्यरत हैं। संजय मिश्रा ने बताया कि अभी कई इलाकों में सर्वे नहीं हुआ है। ऐसे में जल्द ही सर्वे का काम निपटाकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का काम जारी है। मंगलवार को नानपारा के मदरसा जामिया क़ासमिया खैरुल ऊलूम में जाकर जांच की गई कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मदरसे के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने बताया कि मदरसा 1981 से आवामी चंदे से चल रहा है।
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साथ ही मदरसे की सालाना आमदनी लगभग 31 लाख रुपये है। मदरसे के पास चार बीघा जमीन है। प्रबंधक ने यह भी बताया कि मदरसे में 307 बच्चे पढ़ रहे हैं जिनमें से 126 हॉस्टल में रहते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिये 15 अध्यापक मदरसे में कार्यरत हैं। संजय मिश्रा ने बताया कि अभी कई इलाकों में सर्वे नहीं हुआ है। ऐसे में जल्द ही सर्वे का काम निपटाकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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