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टूटी-फूटी झोपड़ी फिर भी आवास के पात्र नहीं बाबूराम
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खैरीघाट(बहराइच)। गरीब परिवारों को पक्के आवास मुहैया करवाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही है, लेकिन भारत सरकार की यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। योजना के तहत कई बार अपात्रों को आवास आवंटित करने व पात्रों को सूची से बाहर करने के आरोप लग चुके हैं। ऐसा ही कुछ महसी ब्लॉक की ग्राम पंचायत मैकूपुरवा निवासी बाबूराम पुत्र रघुराज के साथ भी हुआ। टूटी-फूटी झोपड़ी में पत्नी व तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहने वाले बाबूराम का नाम पात्रता सूची में होने के बावजूद काट दिया गया। वह अब भी झोपड़ी में रहने को विवश हैं।
महसी ब्लॉक के मैकूपुरवा ग्राम पंचायत निवासी बाबूराम पुत्र रघुराज टूटी-फूटी झोपड़ी में पत्नी व तीन बच्चों के साथ रहते हैं। झोपड़ी कई जगह से टूटी है जिसमें धूप के साथ-साथ बारिश का पानी भी गिरता है। झोपड़ी के अंदर गृहस्थी का सामान चारों ओर बिखरा पड़ा है। छुट्टा जानवर भी घुस आते हैं। इन सबके बावजूद बाबूराम प्रधानमंत्री आवास की पात्रता सूची की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। ऐसा तब है जबकि मुख्यमंत्री व उनके आला अधिकारी प्रदेश में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। बाबूराम ने बताया कि ऐसा नहीं है कि उनका आवास की सूची में नाम नहीं था।
गांव में बनी पात्रता सूची में उनका भी नाम था, लेकिन प्रधान व सचिव की उदासीनता व भ्रष्टाचार के चलते उनका नाम काट दिया गया जिस कारण वह परिवार के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्रता सूची के निर्माण में जमकर खेल किया गया और पात्रों का नाम काटकर अपात्रों का नाम जोड़ दिया गया।
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मैकूपुरवा में आवास आवंटन की सूची में जमकर खेल हुआ। कई अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया। बताया जाता है कि इसके विरोध में कुछ लोग कोर्ट चले गये। कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी के निर्देशन में गांव के छह अपात्रों से आवास की रिकवरी भी कराई गई। इसके बावजूद बाबूराम जैसे कई पात्र अब भी आवास के लिए भटक रहे हैं।
मामला संज्ञान में नहीं है। पीड़ित अगर पात्र है तो तत्काल मेरे कार्यालय में आकर आवेदन दे दे। मैं जांच करवाऊंगा। अगर पीड़ित योजना का पात्र पाया जाता है तो उसे आवास दिलाया जाएगा।
- अनिल सिंह, परियोजना निदेशक
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महसी ब्लॉक के मैकूपुरवा ग्राम पंचायत निवासी बाबूराम पुत्र रघुराज टूटी-फूटी झोपड़ी में पत्नी व तीन बच्चों के साथ रहते हैं। झोपड़ी कई जगह से टूटी है जिसमें धूप के साथ-साथ बारिश का पानी भी गिरता है। झोपड़ी के अंदर गृहस्थी का सामान चारों ओर बिखरा पड़ा है। छुट्टा जानवर भी घुस आते हैं। इन सबके बावजूद बाबूराम प्रधानमंत्री आवास की पात्रता सूची की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। ऐसा तब है जबकि मुख्यमंत्री व उनके आला अधिकारी प्रदेश में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। बाबूराम ने बताया कि ऐसा नहीं है कि उनका आवास की सूची में नाम नहीं था।
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गांव में बनी पात्रता सूची में उनका भी नाम था, लेकिन प्रधान व सचिव की उदासीनता व भ्रष्टाचार के चलते उनका नाम काट दिया गया जिस कारण वह परिवार के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्रता सूची के निर्माण में जमकर खेल किया गया और पात्रों का नाम काटकर अपात्रों का नाम जोड़ दिया गया।
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मैकूपुरवा में आवास आवंटन की सूची में जमकर खेल हुआ। कई अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया। बताया जाता है कि इसके विरोध में कुछ लोग कोर्ट चले गये। कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी के निर्देशन में गांव के छह अपात्रों से आवास की रिकवरी भी कराई गई। इसके बावजूद बाबूराम जैसे कई पात्र अब भी आवास के लिए भटक रहे हैं।
मामला संज्ञान में नहीं है। पीड़ित अगर पात्र है तो तत्काल मेरे कार्यालय में आकर आवेदन दे दे। मैं जांच करवाऊंगा। अगर पीड़ित योजना का पात्र पाया जाता है तो उसे आवास दिलाया जाएगा।
- अनिल सिंह, परियोजना निदेशक