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केंद्र सरकार के विरोध में किसानों ने मनाया विश्वासघात दिवस
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बहराइच। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) की ओर से केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए विश्वासघात दिवस मनाया गया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार द्वारा आश्वासन के बाद भी छह सूत्री मांगें अब तक न पूर्ण करने का आरोप लगाया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी एसडीएम सदर सौरभ गंगवार को सौंपा। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के तहसील सदर अध्यक्ष रामगोपाल प्रजापति ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के किसानों ने केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने समेत अन्य मांगों के समर्थन में आंदोलन चलाया था।
आंदोलन के बाद किसान विरोधी कानूनों को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बीते नवंबर माह में बकाया छह मुद्दों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया था। इस पर केंद्र सरकार के सचिव संजय अग्रवाल ने सरकार की ओर से आश्वासन देते हुए आंदोलन वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद किसानों ने धरना-प्रदर्शन वापस ले लिया था, लेकिन अब तक किसानों की कोई भी मांग पूर्ण नहीं की गई है। ऐसे में किसान विश्वासघात दिवस मनाने को मजबूर हो रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने किसान आंदोलन से संबंधित सभी मुकदमे वापस लेने, शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देने, किसान विरोधी एजेंडे को समाप्त करने समेत अन्य मांगों के समर्थन में एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर मोहनलाल वर्मा, हरीराम गुप्ता, बृजेश पाठक, घनश्याम वर्मा, इबरार खां, पारसनाथ वर्मा आदि मौजूद रहे।
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आंदोलन के बाद किसान विरोधी कानूनों को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बीते नवंबर माह में बकाया छह मुद्दों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया था। इस पर केंद्र सरकार के सचिव संजय अग्रवाल ने सरकार की ओर से आश्वासन देते हुए आंदोलन वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद किसानों ने धरना-प्रदर्शन वापस ले लिया था, लेकिन अब तक किसानों की कोई भी मांग पूर्ण नहीं की गई है। ऐसे में किसान विश्वासघात दिवस मनाने को मजबूर हो रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने किसान आंदोलन से संबंधित सभी मुकदमे वापस लेने, शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देने, किसान विरोधी एजेंडे को समाप्त करने समेत अन्य मांगों के समर्थन में एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर मोहनलाल वर्मा, हरीराम गुप्ता, बृजेश पाठक, घनश्याम वर्मा, इबरार खां, पारसनाथ वर्मा आदि मौजूद रहे।
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