{"_id":"61df1747dbd3dc3ca626d4c4","slug":"bahraich-bahraich-news-lko613183268","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार बेहतर प्रत्याशियों की तलाश में बसपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार बेहतर प्रत्याशियों की तलाश में बसपा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। विधानसभा चुनाव 2022 का बिगुल बज चुका है। सभी पार्टियां चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटी हुईं हैं। इस बार के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के लिए चुनाव जीतने के साथ जिले में खाता खोलने की भी चुनौती रहेगी। साल 2012 मेें एक प्रत्याशी ने बसपा से जीत हासिल की तो 2017 में पूरे जिले में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था। यहीं नहीं 2017 के चुनाव में बसपा कई विधानसभा सीटों में दूसरे नंबर पर भी नहीं पहुंच सकी। अब विधानसभा चुनाव 2022 में एक बार फिर से बसपा नये जोश के साथ चुनाव लड़ेगी, लेकिन यह चुनाव प्रत्याशी के लिए अपनी जीत के साथ ही पार्टी का खाता खोलने को लेकर भी चुनौती भरा रहेगा।
साल 2007 में बसपा ने परचम लहराया था। चार सीटें बसपा के खाते में रहीं थीं। 2012 में बसपा ने एक बार फिर से जोश के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन जिले में बसपा महसी को छोड़कर सभी सीटों पर हार गई। उसके बाद जिले में पार्टी लड़खड़ाती चली गई। साल 2012 में बसपा को एक सीट मिली और 2017 में सातों विधानसभा सीटों पर सूपड़ा साफ हो गया। पूरे एक दशक में जिले की छह विधानसभा सीटों पर बसपा का खाता भी नहीं खुल सका। जिस प्रत्याशी ने 2012 में चुनाव जीतकर पार्टी का झंडा बुलंद रखा वर्तमान में वह सपा से टिकट की दौड़ में शामिल है।
जिले में बलहा सीट सुरक्षित है जहां अनुसूचित जाति की संख्या भी ज्यादा है। इसके बावजूद पार्टी का प्रत्याशी सीट जीतने में सफल नहीं रहा। बसपा जिलाध्यक्ष अजय गौतम का कहना है कि इस बार के चुनाव में बसपा परचम फहराएगी। पूर्व के चुनाव में जो कमियां रहीं, उनको दूर किया गया है। संगठन को और मजबूत किया जा चुका है। इस बार समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की ओर से बेहतर प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे। विधानसभा 2022 में भाईचारे के आधार पर चुनाव लड़कर अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
साल 2007 में बसपा ने परचम लहराया था। चार सीटें बसपा के खाते में रहीं थीं। 2012 में बसपा ने एक बार फिर से जोश के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन जिले में बसपा महसी को छोड़कर सभी सीटों पर हार गई। उसके बाद जिले में पार्टी लड़खड़ाती चली गई। साल 2012 में बसपा को एक सीट मिली और 2017 में सातों विधानसभा सीटों पर सूपड़ा साफ हो गया। पूरे एक दशक में जिले की छह विधानसभा सीटों पर बसपा का खाता भी नहीं खुल सका। जिस प्रत्याशी ने 2012 में चुनाव जीतकर पार्टी का झंडा बुलंद रखा वर्तमान में वह सपा से टिकट की दौड़ में शामिल है।
विज्ञापन
जिले में बलहा सीट सुरक्षित है जहां अनुसूचित जाति की संख्या भी ज्यादा है। इसके बावजूद पार्टी का प्रत्याशी सीट जीतने में सफल नहीं रहा। बसपा जिलाध्यक्ष अजय गौतम का कहना है कि इस बार के चुनाव में बसपा परचम फहराएगी। पूर्व के चुनाव में जो कमियां रहीं, उनको दूर किया गया है। संगठन को और मजबूत किया जा चुका है। इस बार समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की ओर से बेहतर प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे। विधानसभा 2022 में भाईचारे के आधार पर चुनाव लड़कर अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करेंगे।
विज्ञापन