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नहीं हटा कब्जा, बैरंग लौटी राजस्व टीम
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बहराइच। विकास खंड जरवल के नियामतपुर गांव के कटान पीड़ितों को आवंटित की गई भूमि पर अवैध कब्जे का मामला गहराता जा रहा है। एसडीएम की ओर से गठित टीम बृहस्पतिवार को अवैध कब्जा हटाने तो पहुंची, लेकिन टीम महज जमीन की पैमाइश कर लौट गई। इस पर गुस्साए कटान पीड़ितों ने तहसील प्रशासन पर भूमाफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए 10 जनवरी को लखनऊ-बहराइच हाईवे मार्ग पूरी तरह जाम करने की चेतावनी दी है।
विकास खंड का नियामतपुर गांव चौदह वर्ष पूर्व घाघरा नदी में समाहित हो गया था। पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। कटान पीड़ित आदमपुर रेवली तटबंध व रेलवे की खाली पड़ी भूमि पर अपना अस्थायी आशियाना बनाकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। करीब 11 वर्ष पूर्व तत्कालीन डीम ने क्षेत्र का भ्रमण कर पीड़ितों की समस्याओं को सुनते हुए कटान पीड़ित 52 परिवारों को दो-दो बिसवा ग्राम पंचायत की जमीन का आवंटन कर कटान पीड़ितों के नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी बीच डीएम का स्थानांतरण हो जाने के बाद जमीन पर जरवल के पूर्व चेयरमैन के पुत्र शमीम अहमद ने स्थानीय पुलिस की मदद से जबरन कब्जा कर लिया था तभी से पीड़ित पुलिस व तहसील प्रशासन का चक्कर काटकर जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की गुहार अधिकारियों से लगा रहे हैं। मामले में कटान पीड़ितों ने मुख्यमंत्री समेत अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर जमीन से अवैध कब्जा हटाने की मांग की थी।
कब्जा न हटाए जाने पर सभी ने लखनऊ-बहराइच हाईवे जाम करने की चेतावनी दी थी। पीड़ितों की चेतावनी के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आ गया था। एसडीएम ने आनन-फानन में नायब तहसीलदार विजय कुमार की अगुवाई में पुलिस व राजस्व की टीम गठित कर भूमि की पैमाइश करते हुए अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन बृहस्पतिवार को अवैध कब्जा हटाने पहुंची टीम महज जमीन की पैमाइश कर लौट गई। इससे गुस्साए कटान पीड़ितों ने 10 जनवरी को लखनऊ-बहराइच हाईवे पूरी तरह से अवरुद्ध करने की चेतावनी दी है।
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टीम की अगुवाई कर रहे नायब तहसीलदार विजय कुमार ने कहा कि भूमि की पैमाइश कर ली गई है, लेकिन जमीन पर कब्जाधारियों की फसल लगी हुई है इसलिए कब्जा नहीं कराया जा सका। फसल कटने के बाद कटान पीड़ितों को स्थापित किया जाएगा।
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विकास खंड का नियामतपुर गांव चौदह वर्ष पूर्व घाघरा नदी में समाहित हो गया था। पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। कटान पीड़ित आदमपुर रेवली तटबंध व रेलवे की खाली पड़ी भूमि पर अपना अस्थायी आशियाना बनाकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। करीब 11 वर्ष पूर्व तत्कालीन डीम ने क्षेत्र का भ्रमण कर पीड़ितों की समस्याओं को सुनते हुए कटान पीड़ित 52 परिवारों को दो-दो बिसवा ग्राम पंचायत की जमीन का आवंटन कर कटान पीड़ितों के नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी बीच डीएम का स्थानांतरण हो जाने के बाद जमीन पर जरवल के पूर्व चेयरमैन के पुत्र शमीम अहमद ने स्थानीय पुलिस की मदद से जबरन कब्जा कर लिया था तभी से पीड़ित पुलिस व तहसील प्रशासन का चक्कर काटकर जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की गुहार अधिकारियों से लगा रहे हैं। मामले में कटान पीड़ितों ने मुख्यमंत्री समेत अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर जमीन से अवैध कब्जा हटाने की मांग की थी।
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कब्जा न हटाए जाने पर सभी ने लखनऊ-बहराइच हाईवे जाम करने की चेतावनी दी थी। पीड़ितों की चेतावनी के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आ गया था। एसडीएम ने आनन-फानन में नायब तहसीलदार विजय कुमार की अगुवाई में पुलिस व राजस्व की टीम गठित कर भूमि की पैमाइश करते हुए अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन बृहस्पतिवार को अवैध कब्जा हटाने पहुंची टीम महज जमीन की पैमाइश कर लौट गई। इससे गुस्साए कटान पीड़ितों ने 10 जनवरी को लखनऊ-बहराइच हाईवे पूरी तरह से अवरुद्ध करने की चेतावनी दी है।
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टीम की अगुवाई कर रहे नायब तहसीलदार विजय कुमार ने कहा कि भूमि की पैमाइश कर ली गई है, लेकिन जमीन पर कब्जाधारियों की फसल लगी हुई है इसलिए कब्जा नहीं कराया जा सका। फसल कटने के बाद कटान पीड़ितों को स्थापित किया जाएगा।