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20 आरोपियों में सिर्फ 17 पर एफआईआर
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बहराइच। चित्तौरा विकास खंड क्षेत्र के मकुलिया गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हुए भ्रष्टाचार के मामले में तीन लोगों के नाम एफआईआर से हटाने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इस प्रकरण पर विकास विभाग और पुलिस के अलग-अलग बयान आ रहे हैं, लेकिन वायरल एफआईआर की कॉपी को देखने के बाद तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं।
बता दें कि तीन दिन पहले परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने बीडीओ चित्तौरा के साथ मकुलिया गांव के आवास निर्माण का जायजा लिया था। मौके पर कुल स्वीकृत 65 आवासों में से 17 आवास बने नहीं पाए गए थे जबकि धन का आहरण कर लिया गया था। इस पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश परियोजना निदेशक ने बीडीओ को दिया था और 17 लाभार्थियों सहित 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। 17 लाभार्थियों के अलावा तीन अन्य लोगों में प्रधानपति नौशाद, उनके सहयोगी श्मशाद व पंचायत सचिव अरुण पांडेय का नाम भी शामिल करने की बात कही गई थी, लेकिन बुधवार को वायरल हुई एफआईआर की कॉपी में प्रधान पति नौशाद, श्मशाद व अरुण पांडेय का नाम दर्ज एफआईआर की कॉपी में नहीं पाया गया।
सिर्फ 17 अपात्र लाभार्थियों के नाम ही दर्ज एफआईआर की लिस्ट में दिख रहे थे। इस प्रकरण पर एसएचओ रिसिया रमाशंकर यादव ने बताया कि लिपिकीय गलती हुई है। संशोधन करवाया गया है। वहीं, परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने कहा कि इन सभी पर पूर्व में एफआईआर दर्ज थी। संभव है कि उसी में इस घटना की धाराओं को बढ़ा दिया गया है। फिलहाल कारण कुछ भी हो लेकिन कॉपी में तीन नाम न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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बता दें कि तीन दिन पहले परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने बीडीओ चित्तौरा के साथ मकुलिया गांव के आवास निर्माण का जायजा लिया था। मौके पर कुल स्वीकृत 65 आवासों में से 17 आवास बने नहीं पाए गए थे जबकि धन का आहरण कर लिया गया था। इस पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश परियोजना निदेशक ने बीडीओ को दिया था और 17 लाभार्थियों सहित 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। 17 लाभार्थियों के अलावा तीन अन्य लोगों में प्रधानपति नौशाद, उनके सहयोगी श्मशाद व पंचायत सचिव अरुण पांडेय का नाम भी शामिल करने की बात कही गई थी, लेकिन बुधवार को वायरल हुई एफआईआर की कॉपी में प्रधान पति नौशाद, श्मशाद व अरुण पांडेय का नाम दर्ज एफआईआर की कॉपी में नहीं पाया गया।
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सिर्फ 17 अपात्र लाभार्थियों के नाम ही दर्ज एफआईआर की लिस्ट में दिख रहे थे। इस प्रकरण पर एसएचओ रिसिया रमाशंकर यादव ने बताया कि लिपिकीय गलती हुई है। संशोधन करवाया गया है। वहीं, परियोजना निदेशक अनिल सिंह ने कहा कि इन सभी पर पूर्व में एफआईआर दर्ज थी। संभव है कि उसी में इस घटना की धाराओं को बढ़ा दिया गया है। फिलहाल कारण कुछ भी हो लेकिन कॉपी में तीन नाम न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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