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बाल मजदूरों का गढ़ बने बाढ़ व कटान प्रभावित क्षेत्र

Thu, 25 Nov 2021 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 11:15 PM IST
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बहराइच। भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ, आजकल दिल्ली में है जेरे बहस यह मशविरा। राष्ट्रकवि दिनकर की यह पंक्तियां वर्तमान में बाढ़ व कटान पीड़ित क्षेत्र के लिए प्रासंगिक साबित हो रही हैं। कटान पीड़ित क्षेत्र के नौनिहाल दो वक्त की रोटी के लिए महानगरों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। शासन-प्रशासन इन नौनिहालों के पुर्नवास की कोई योजना नहीं तैयार कर पा रहा है।
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तहसील महसी, कैसरगंज व नानपारा का बलहा क्षेत्र (आंशिक) बाढ़ व कटान प्रभावित है। बीते पांच वर्षों में हजारों हेक्टेयर भूमि घाघरा की जलधारा में समाहित हो चुकी है। कटान तहसील महसी के कटान प्रभावित क्षेत्र सिलौटा, गोलागंज, पिपरी, रानीबाग, पचदेवरी, जोगापुरवा, भौंरी, कैसरगंज के मुरौव्वा, मुंसारी, गोड़हिया नंबर 1, 2, 3 व 4 आदि स्थानों पर हजारों की संख्या में परिवार अपना मकान व कृषि योग्य भूमि गंवा चुके हैं। इनमें से अधिकांश लोग बेलहा-बेहरौली तटबंध पर फूस व पन्नी से बने आशियानों में जिंदगी गुजार रहे हैं। दो वक्त की रोटी के लिए इन्हें दर-दर भटकना पड़ता है।
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ऐसे में काफी संख्या में ऐसे परिजन हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को मेहनत मजदूरी करने परदेस रवाना कर दिया है। यह बच्चे लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, पंजाब, उत्तराखंड व राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में होटलों, ढाबों व घरों में बर्तन धुलने, फेरी लगाकर सामान बेंचने, बेकरी व कारखानों में जोखिम भरे कार्य करने को विवश हैं। इनमें से अधिकांश बच्चों की आयु 12 से 16 वर्ष के मध्य है। ककहरा रटने की उम्र में बच्चे मेहनत मजदूरी कर न सिर्फ अपना पेट भर रहे हैं। बल्कि अपने माता-पिता के लिए भी आर्थिक मदद भेजते हैं। बच्चों के घर से दूर रहकर कार्य करने से परिजन सदैव अपने नौनिहालों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं।
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बेलहा-बेहरौली तटबंध पर शरण लिए शफीक ने बताया कि यहां बच्चों को काम नहीं मिल पाता। महानगरों में काम भी आसानी से मिल जाता है और रहने का स्थान भी मुहैया हो जाता है। कटान पीड़ित मोहनलाल ने बताया कि बाढ़ के समय तो कुछ नेता व अधिकारी लंच पैकेट आदि दे जाते हैं। इसके बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। ऐसे में अपने बच्चों को बाहर भेजना उनकी मजबूरी है। बच्चे बाहर मजदूरी कर अपना पेट पाल लेंगे। यहां तो कोई उनका सहारा नहीं।

कटान पीड़ितों को जमीन देकर बसाने का कार्य मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकता में है। ग्राम समाज की जमीनों को चिन्हित किया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पूरी व्यवस्थाएं हैं। परिजन अपनी मर्जी से बच्चों को कार्य करने के लिए बाहर भेज रहे हैं।
सुरेश्वर सिंह, विधायक, महसी।
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