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जनप्रतिनिधि ने की थी 10 अभ्यर्थियों की सिफारिश
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बहराइच। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज में 24 वार्ड ब्वॉय और 12 नर्सों की नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े के मामले में परत दर परत खुलती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दबे सुर में यह भी बताया कि इन फर्जी नियुक्तियों में 10 अभ्यर्थियों की भर्ती की सिफारिश एक जनप्रतिनिधि ने भी कर रखी थी, लेकिन वेतन उनकी सिफारिश वाले अभ्यर्थियों को भी नहीं मिला। उधर, पूर्व सीएमएस डॉ. डीके सिंह का कहना है कि 36 नियुक्तियों में 16 को अनुमोदन के बाद प्राचार्य ने सालभर दबाए रखा। सभी 36 नियुक्तियों पर प्राचार्य का अनुमोदन है।
बता दें कि इस फर्जीवाड़े में प्राचार्य एके साहनी, पूर्व सीएमएस डॉ. डीके सिंह व आउट सोर्सिंग एजेंसी की संलिप्तता पाई जा रही है। फर्जीवाड़े कर नियुक्त किए गए वार्ड ब्यॉय और नर्सों को धोखे में रखकर लगातार कार्य कराया गया। कोरोना की दोनों लहर में उन्हें फ्रंट लाइन पर रखा गया। यही नहीं उनसे अस्पताल में पोछा तक लगवाया गया। जब वेतन देने की बारी आई तब सभी को टरका दिया गया। मामले की सूचना शासन तक पहुंच चुकी है। प्राचार्य कार्यालय के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, इन फर्जी नियुक्तियों में एक जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर 10 लोगों को रखा गया था। हालांकि, उनकी सिफारिश पर रखे गए वार्ड ब्वॉय व नर्सों को भी भुगतान नहीं मिला। पूरे प्रकरण में बड़ा खेल हुआ है। जिलाधिकारी भी नजर बनाए है।
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बता दें कि इस फर्जीवाड़े में प्राचार्य एके साहनी, पूर्व सीएमएस डॉ. डीके सिंह व आउट सोर्सिंग एजेंसी की संलिप्तता पाई जा रही है। फर्जीवाड़े कर नियुक्त किए गए वार्ड ब्यॉय और नर्सों को धोखे में रखकर लगातार कार्य कराया गया। कोरोना की दोनों लहर में उन्हें फ्रंट लाइन पर रखा गया। यही नहीं उनसे अस्पताल में पोछा तक लगवाया गया। जब वेतन देने की बारी आई तब सभी को टरका दिया गया। मामले की सूचना शासन तक पहुंच चुकी है। प्राचार्य कार्यालय के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, इन फर्जी नियुक्तियों में एक जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर 10 लोगों को रखा गया था। हालांकि, उनकी सिफारिश पर रखे गए वार्ड ब्वॉय व नर्सों को भी भुगतान नहीं मिला। पूरे प्रकरण में बड़ा खेल हुआ है। जिलाधिकारी भी नजर बनाए है।
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