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पहले दिन क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
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01 बीएचआर 67 - कैसरगंज में धान क्रय केंद्र पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। गनीमत थी कि पहले दिन किसान ही धान बेचने क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंचे अन्यथा प्रशासन के सामने बड़ी दिक्कत आ जाती। शासन ने धान खरीदने के लिए पहली नवंबर का दिन निर्धारित किया था, लेकिन सहकारिता विभाग के सभी कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करने राजधानी पहुंचे हुए थे। फिलहाल प्रशासन का कहना है पहले दिन क्रय केंद्रों पर किसान नहीं पहुंचे क्योंकि अभी धान नहीं कटा है। उम्मीद जताई जा रही है कि दीपावली के बाद किसानों की भीड़ केंद्रों पर पहुंचेगी।
शासन के निर्देश पर बहराइच में 95 धान खरीद केंद्र बनाए गए थे। पहली नवंबर से धान खरीद का निर्णय लिया गया था। प्रशासन ने तैयारी भी पूरी कर ली थी, लेकिन पांच क्रय केंद्रों पर एक-एक किसान धान बेचने के लिए पहुंचा। शेष 90 क्रय केंद्रों पर एक भी किसान नहीं पहुंचा। किसानों का क्रय केंद्रों पर न पहुंचना विभाग के लिए काफी फायदेमंद रहा क्योंकि सहकारिता विभाग के सभी कर्मचारी क्रय केंद्रों को छोड़कर लखनऊ स्थिति सहकारिता भवन में धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे हैं। ऐसी स्थिति में कई क्रय केंद्रों पर हड़ताल का बोर्ड भी लगा हुआ था। अफसरों ने उम्मीद जताई है कि दीपावली के बाद ही धान क्रय केंद्रों पर पहुंचेगा क्योंकि अभी धान खेतों में ही पड़ा हुआ है। सहायक निबंधक कोऑपरेटिव बाबूराम तिवारी ने बताया कि धान को खरीदने के लिए खोले गए क्रय केंद्र पहले दिन खाली रहे।
किसान धान बेचने केंद्रों तक नहीं पहुंचे। अफसरों का कहना है कि अभी 90 फीसदी किसानों ने धान नहीं काटा है। ऐसी स्थिति में वे धान बेचने की स्थिति में नहीं हैं। अफसर दीपावली के बाद धान के बिक्री की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन लगातार व्यवस्था को लेकर नजर बनाए रहा। सोमवार को चित्तौरा, नानपारा, मिहींपुरवा, कैसरगंज व पयागपुर सहित सदर क्षेत्र में स्थापित किसी भी मंडी पर किसान नहीं पहुंचे। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एक लाख 64 हजार हेक्टेयर भूमि पर इस बार धान बोया गया है। बाढ़ के कारण उत्पादन कुछ कम रहेगा, लेकिन खरीद की तैयारी पूरी है। वहीं, सहायक निबंधक ने बताया कि विभाग के 70 कर्मचारी हड़ताल पर गए हुए थे। ऐसी स्थिति में अगर किसान पहुंचते तो धान खरीद में दिक्कत होती। फिलहाल दीपावली के बाद धान खरीद कराएंगे। सोमवार को जिलाधिकारी भी धान खरीद की पल-पल रिपोर्ट लेते रहे।
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शासन के निर्देश पर बहराइच में 95 धान खरीद केंद्र बनाए गए थे। पहली नवंबर से धान खरीद का निर्णय लिया गया था। प्रशासन ने तैयारी भी पूरी कर ली थी, लेकिन पांच क्रय केंद्रों पर एक-एक किसान धान बेचने के लिए पहुंचा। शेष 90 क्रय केंद्रों पर एक भी किसान नहीं पहुंचा। किसानों का क्रय केंद्रों पर न पहुंचना विभाग के लिए काफी फायदेमंद रहा क्योंकि सहकारिता विभाग के सभी कर्मचारी क्रय केंद्रों को छोड़कर लखनऊ स्थिति सहकारिता भवन में धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे हैं। ऐसी स्थिति में कई क्रय केंद्रों पर हड़ताल का बोर्ड भी लगा हुआ था। अफसरों ने उम्मीद जताई है कि दीपावली के बाद ही धान क्रय केंद्रों पर पहुंचेगा क्योंकि अभी धान खेतों में ही पड़ा हुआ है। सहायक निबंधक कोऑपरेटिव बाबूराम तिवारी ने बताया कि धान को खरीदने के लिए खोले गए क्रय केंद्र पहले दिन खाली रहे।
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किसान धान बेचने केंद्रों तक नहीं पहुंचे। अफसरों का कहना है कि अभी 90 फीसदी किसानों ने धान नहीं काटा है। ऐसी स्थिति में वे धान बेचने की स्थिति में नहीं हैं। अफसर दीपावली के बाद धान के बिक्री की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन लगातार व्यवस्था को लेकर नजर बनाए रहा। सोमवार को चित्तौरा, नानपारा, मिहींपुरवा, कैसरगंज व पयागपुर सहित सदर क्षेत्र में स्थापित किसी भी मंडी पर किसान नहीं पहुंचे। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एक लाख 64 हजार हेक्टेयर भूमि पर इस बार धान बोया गया है। बाढ़ के कारण उत्पादन कुछ कम रहेगा, लेकिन खरीद की तैयारी पूरी है। वहीं, सहायक निबंधक ने बताया कि विभाग के 70 कर्मचारी हड़ताल पर गए हुए थे। ऐसी स्थिति में अगर किसान पहुंचते तो धान खरीद में दिक्कत होती। फिलहाल दीपावली के बाद धान खरीद कराएंगे। सोमवार को जिलाधिकारी भी धान खरीद की पल-पल रिपोर्ट लेते रहे।
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