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बहराइच से कल्याण सिंह का रहा गहरा नाता, तीन दिन पुआल पर काटी थीं रातें

Mon, 23 Aug 2021 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 10:44 PM IST
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बहराइच। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का बहराइच से गहरा नाता था। वह जिले में भाजपा को मजबूत करने के लिए हर कदम पर साथ खड़े दिखाई देते थे। 1989 में जिले के दौरे पर आए कल्याण सिंह ने तीन दिनों का प्रवास किया था। नानपारा विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत के लिए कार्यकर्ताओं के साथ रुककर पुआल पर लेटे थे। अब उनके निधन की सूचना मिलने पर सहयोगी नेता अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह का लगाव बहराइच से काफी पुराना रहा है। पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी बताते हैं कि वह जब बहराइच के दौरे पर आते थे तो डाक बंगले में सांसद रुद्रसेन चौधरी, पूर्व एमएलसी अमरेंद्र सिंह व पूर्व विधायक जटाशंकर सिंह सभी के साथ मिलकर एक-एक विधानसभा क्षेत्र पर गहरी मंत्रणा करते थे। पार्टी को मजबूत करने के लिए वह जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव अधिक रखते थे। भाजपा जिला उपाध्यक्ष राहुल राय ने बताया कि वर्ष 1989 में नानपारा विधानसभा का उपचुनाव हुआ था जिसमें वह तीन दिन के प्रवास पर बहराइच आए थे। नानपारा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर पुआल पर भी सोये थे। इसके बाद 1991 में विधायक जटाशंकर सिंह के जीतने पर मोतीपुर सिंचाई कॉलोनी में बहुत बड़ी जनसभा को भी संबोधित किया था। राहुल राय ने बताया कि एक बार आरटीओ ऑफिस में पूर्व सांसद पद्मसेन चौधरी कुर्सी पर बैठे थे। अचानक कुर्सी टूट गई, मगर किसी ने उनको उठाने की जहमत नहीं उठाई। इस पर मारपीट हो गई। मुकदमा भी हुआ मगर कल्याण सिंह ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए पूरे मामले का पटाक्षेप कराया था।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बहुत ही स्पष्टवादी व्यक्ति थे। भाजपा व आरएसएस से जुड़े रामकिशोर गुप्ता का कहना है कि वर्ष 2007 में उनको पार्टी ने सदर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था। कई लोग प्रत्याशी की दौड़ में शामिल थे मगर बाबू जी स्पष्टवादी व्यक्ति थे। उन्होंने छह माह पहले ही कह दिया था कि रामकिशोर तुम क्षेत्र में जाकर चुनाव की तैयारी करो। तुम्हारा टिकट फाइनल हो गया है।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह मनमुटाव के कारण भाजपा से कुछ समय के लिए अलग हुए थे। उस समय उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया था। जिले के सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे थे। लोध वोट बैंक में सेंधमारी के चलते भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
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