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नदी में विचरण करने वाले जलीय जीवों की बोट से होगी सुरक्षा

Sat, 29 May 2021 12:13 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 May 2021 12:13 AM IST
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बहराइच। वन प्रभाग के कछार क्षेत्र में छिपे तेंदुओं व बाघों की निगरानी के लिए वनकर्मियों को दो ड्रोन भेजे गए हैं। अब उधार के ड्रोन से तेंदुए और बाघ पर नजर नहीं रखनी पड़ेगी। इसके अलावा कछार व नदी क्षेत्र में छिपे तेंदुए व जलीय जीवों पर नजर रखने के लिए पुणे से इंजन और बोट भेजी गई है जिस पर पांच लाख रुपये खर्च आया है। बोट व ड्रोन द्वारा वनकर्मी तेंदुए, बाघ और जलीय जीव पर नजर रख सकेंगे।
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बहराइच वन प्रभाग के वनकर्मियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। कछार क्षेत्र व खेत में छिपे तेंदुए पर नजर रखने के लिए उधारी का ड्रोन लेना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा बहराइच वन प्रभाग के वनकर्मियों को नहीं करना पड़ेगा। प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि वन प्रभाग मुख्य वन संरक्षक व शासन की ओर से दो ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं। ये ड्रोन हमेशा बहराइच वन प्रभाग के पास रहेंगे जिससे मक्के, गन्ना व अरहर के खेत व कछार क्षेत्र में छिपे तेंदुए और बाघ पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। डीएफओ ने बताया कि इसके अलावा उच्चाधिकारियों की मांग पर पुणे से इंजन और बोट भेजी गई है। प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि बोट द्वारा वन प्रभाग क्षेत्र में बहने वाली नदियों में जलीय जीवों पर नजर रखा जा सकेगा। साथ ही कछार क्षेत्र में फंसे या छिपे तेंदुए का बोट द्वारा आसानी से रेस्क्यू किया जाएगा। डीएफओ ने बताया कि बोट के आने से जलीय जीवों की सुरक्षा भी बेहतर हो सकेगी। वनकर्मी नदियों में रहने वाले जीवों पर 24 घंटे नजर रख सकेंगे।
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प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि कछार क्षेत्र में फंसे तेंदुए का रेस्क्यू करने में बोट काफी सहायक होगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा नदियों में विचरण करने वाले जलीय जीवों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी।
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डीएफओ ने बताया कि लखनऊ मार्ग स्थित संजय सेतु काफी बड़ी नदी है। नदी में डॉल्फिन, मगरमच्छ व घड़ियाल के अलावा दुर्लभ कछुआ व मछली विचरण करते हैं। इसके अलावा बहराइच, नानपारा रेंज, रुपईडीहा और अब्दुल्लागंज रेंज की नदियों में कछुआ, घड़ियाल, मगरमच्छ व सांप निवास कर रहे हैं। इन पर नजर आसानी से रखी जा सकेगी, जिससे शिकार नहीं हो सकेगा।
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