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कई दावेदारों की टूटी आस, नई राह की तलाश
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बहराइच। विधानसभा चुनाव लड़ने की आस संजोए तमाम दावेदारों की उम्मीदें टिकट का बंटवारा होने के बाद टूट र्गइं। लखनऊ से प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद कई दावेदारों का गुणा-गणित मिनटों में बिखर गया। भाजपा व सपा में कई दावेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि अगर समय रहते पार्टी से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो नई राह की तलाश की जाएगी।
जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। पांचवें चरण में चुनाव होना है। अब तक सपा ने चार, भाजपा ने सहयोगी अपना दल एस के खाते में गई नानपारा सीट समेत सभी व कांग्रेस ने तीन उम्मीदवारों का टिकट फाइनल कर दिया है। टिकट बंटने के बाद पहली नाराजगी भाजपा की ओर से बाहर निकल कर आई है। भाजपा ने अपने सहयोगी अपनादल एस के उम्मीदवार रामनिवास वर्मा को हरी झंडी दी है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखने लगी है। कई पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भी भेजा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी से महसी सीट पर केके ओझा को टिकट मिलने के बाद काफी हलचल शुरू हो गई है। यहां से तीन अन्य दावेदार भी थे।
इनमें से एक राजेश तिवारी ने तो पार्टी की खिलाफत भी शुरू कर दी है। बता दें कि नानपारा विधानसभा सीट गत पांच चुनाव से भाजपा के खाते में रही है। यहां से चार बार जटाशंकर सिंह को क्षेत्र की जनता ने सदन तक भेजा है जबकि वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर लड़ीं माधुरी वर्मा भी चुनाव जीतने में सफल रहीं थीं। माधुरी अब सपा में शामिल हो गईं हैं। वहीं, महसी विधानसभा सीट पर समय-समय पर समीकरण बदलता रहा है। 2012 में बसपा के टिकट से केके ओझा चुनाव जीते थे। उसके बाद 2017 में भाजपा के टिकट से सुरेश्वर सिंह ने जीत हासिल की थी। अब 2022 में जनता किसके पक्ष में रहेगी यह निर्णय 10 मार्च को होगा।
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जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। पांचवें चरण में चुनाव होना है। अब तक सपा ने चार, भाजपा ने सहयोगी अपना दल एस के खाते में गई नानपारा सीट समेत सभी व कांग्रेस ने तीन उम्मीदवारों का टिकट फाइनल कर दिया है। टिकट बंटने के बाद पहली नाराजगी भाजपा की ओर से बाहर निकल कर आई है। भाजपा ने अपने सहयोगी अपनादल एस के उम्मीदवार रामनिवास वर्मा को हरी झंडी दी है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखने लगी है। कई पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भी भेजा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी से महसी सीट पर केके ओझा को टिकट मिलने के बाद काफी हलचल शुरू हो गई है। यहां से तीन अन्य दावेदार भी थे।
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इनमें से एक राजेश तिवारी ने तो पार्टी की खिलाफत भी शुरू कर दी है। बता दें कि नानपारा विधानसभा सीट गत पांच चुनाव से भाजपा के खाते में रही है। यहां से चार बार जटाशंकर सिंह को क्षेत्र की जनता ने सदन तक भेजा है जबकि वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर लड़ीं माधुरी वर्मा भी चुनाव जीतने में सफल रहीं थीं। माधुरी अब सपा में शामिल हो गईं हैं। वहीं, महसी विधानसभा सीट पर समय-समय पर समीकरण बदलता रहा है। 2012 में बसपा के टिकट से केके ओझा चुनाव जीते थे। उसके बाद 2017 में भाजपा के टिकट से सुरेश्वर सिंह ने जीत हासिल की थी। अब 2022 में जनता किसके पक्ष में रहेगी यह निर्णय 10 मार्च को होगा।
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