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Bahraich News: हाथियों की निगरानी के लिए बनेगा साझा तंत्र

Tue, 04 Aug 2026 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Tue, 04 Aug 2026 11:21 PM IST
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A shared mechanism will be established to monitor elephants.
कतर्नियाघाट में आयोजित बैठक में मौजूद भारत-नेपाल के अ​धिकारी।

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बिछिया। भारत-नेपाल सीमा पर जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए मंगलवार को दोनों देशों के वन एवं संरक्षण विशेषज्ञों ने साझा रणनीति बनाने पर मंथन किया। भारत-नेपाल ट्रांसबाउंड्री कार्यशाला में हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना साझा करने, सीमापार निगरानी तंत्र मजबूत करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों ने माना कि हाथियों के सुरक्षित आवागमन के साथ सीमावर्ती गांवों में जन-धन और फसलों की सुरक्षा के लिए दोनों देशों को एकजुट होकर काम करना होगा।


कतर्नियाघाट सभागार में आयोजित कार्यशाला का आयोजन नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्डलाइफ सोसायटी (न्यूज) व नेपाल की संस्था उज्यालो नेपाल के सहयोग से हुआ। इसमें कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित, बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान नेपाल के मुख्य वन संरक्षक डॉ. अशोक राम, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. दबीर हसन, वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि, एसएसबी के निरीक्षक तथा भारत और नेपाल के वन एवं संरक्षण विशेषज्ञ शामिल हुए।
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डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने कहा कि सीमापार समन्वय, त्वरित सूचना आदान-प्रदान और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से मानव-हाथी संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. दबीर हसन ने तराई आर्क लैंडस्केप में एशियाई हाथियों के प्रवासन मार्गों और वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीमा के दोनों ओर संस्थागत सहयोग हाथियों के सुरक्षित आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी है।
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नेपाल के मुख्य वन संरक्षक डॉ. अशोक राम ने खाता कॉरिडोर में हाथियों की आवाजाही, साझा निगरानी और नियमित सूचना विनिमय की जरूरत बताई। न्यूज के सितांग्शु दास ने कतरनियाघाट में संचालित अर्ली वार्निंग सायरन प्रणाली और गजमित्रों की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय रहते चेतावनी मिलने और प्रशिक्षित गजमित्रों के सक्रिय रहने से जन-धन की हानि रोकी जा सकती है।


कार्यशाला में नेपाल के हाथी मेरो साथी अभियान और भारत के गजमित्रों ने जमीनी अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने फसल सुरक्षा, सामुदायिक प्रतिक्रिया तंत्र और सीमापार सूचना व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस दौरान देहात संस्था के रामनरायन, न्यूज की श्रुति लोहानी, जैनुल आबदीन, अरविंद और राजा हसन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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